इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-श्याम मीरा सिंह।।

शाहीनबाग के प्रदर्शनकारियों की गोद में खेलने वाला नन्हा बच्चा अब हमसे खो चुका है. उसकी आत्मा इधर कहीं ही आपके आसपास किसी एकांत में खड़ी होगी. पिछले दिनों से शाहीनबाग ही उसका ननिहाल बन गया था, वह हर रोज सड़क पर आता, एक-एक प्रदर्शनकारी उसे गोद में उठा लेते, कोई चूमता, कोई हाथ पकड़ता, अक्सर उसके गालों पर तीन रंग का तिरंगा होता था, “मुहम्मद जहां” प्रदर्शनकारियों में सबका चहेता था. लेकिन अब से वह प्यारा बच्चा कभी भी शाहीनबाग नहीं आ पाएगा.

31 जनवरी की रात, शाहीनबाग प्रदर्शन से लौटते समय उसे शीत ने जकड़ लिया था. और 1 फरवरी, मुहम्मद जहां के लिए इस दुनिया में अंतिम दिन साबित हुई.

मुहम्मद जहां के पिता, माता सभी इस देश के नागरिक हैं, इसी मुल्क से प्यार करते हैं, लेकिन NRC-CAA की राजनीतिक साजिश ने उन्हें लाखों अन्य लोगों की तरह सड़क पर खड़ा कर दिया है.

इसपर बहस हो सकती है कि प्रदर्शन में ले जाने का उनका फैसला कितना सही गलत था. लेकिन अपने अस्तित्व, अपने बच्चों के अस्तित्व की लड़ाई में अगर हिस्सा लेना है तो नाजिया पर कोई अन्य विकल्प कहाँ ही बचता था. नाजिया अपने बच्चों, अपने पति के साथ एक प्लास्टिक कवर वाली झुग्गी में रहती है. शीत भी गरीबों को ही लगती है, कभी सुना है पहाड़ पर पिकनिक मनाने वालों को सर्दी लग गई हो? कोई माँ नहीं चाहेगी उसके बच्चे को शीत लग जाए, उसने खुद ही बहुत से इंतजाम किए रहे होंगे, लेकिन जहां की नियति में सड़क पर मर जाना ही लिखा था, किसे पता था, कोई ऐसा कानून आएगा, जो ऐसी माओं को भी मजबूर कर देगा जिनके गर्भ में बच्चा हो, जिनकी गोदी में बच्चा हो! आखिर शाहीनबाग इन बच्चों के भविष्य को तय करने की ही लड़ाई है इसलिए तमाम तर्कों के बाद भी नाजिया को अपराधी नहीं कहा जा सकता. असल अपराधी नाजिया और जहां को सड़क पर बिठाने वाले लोग हैं.

पूरी कहानी परेशान और दुखी करने वाली है, लेकिन इसका एक हिस्सा ऐसा है जिसपर भारत माता भी नाज करे, अपने बच्चे के मरने के बाद भी, नाजिया ने फैसला किया है कि वह प्रदर्शन में हिस्सा लेंगी. वह वापस शाहीनबाग पहुंच चुकी हैं. न केवल अपने बच्चों के हित के लिए, बल्कि हिन्दू-मुसलमान सबके बच्चों के लिए. CAA कानून धर्म के बेस पर लोगों से भेदभाव करता है, और ऐसा कोई भी कानून देश के हित में नहीं हो सकता.

CAA-NRC हिन्दू-मुसलमानों को परेशान नहीं करेगा, नाजिया जैसे गरीब कमजोरों को करेगा.

अनुराग ठाकुर और अमित शाह जैसे व्यापारियों के लिए ये कह देना आसान है कि “गोली मारो सालों” को, लेकिन पिछले 6 सालों में शायद ही किसी ने कहा हो

“रोटी दे दो सालों को”

प्यारे बच्चे मुहम्मद जहां, यदि मरने के बाद भी कोई दुनिया होती हो, और तुम वहां हो, तो माफ करना मेरे बच्चे, हम अपराधी हैं तुम्हारे, तुम्हारी माँ और पिता के…

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
No tags for this post.

By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son