इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-श्याम मीरा सिंह।।
धर्मांधता का जो जहर गोपाल जैसों को लील रहा है. उस जहर के खिलाफ ही शादाब जैसे लोग लड़ रहे हैं. यकीन मानिए ये तस्वीर ही आपका भारत है. जहां मुसलमान रामलीला का राम बनता है, फ़ोटो खिंचवाता है, और इस देश का नागरिक होने पर इतराता है. वहीं हजारों हिन्दू बच्चे भी हैं जो शादाब जैसों के लिए हर रोज अपने पिता से, अपने भाई से, अपने रिश्तेदारों से बहस करते हैं. इसी हिंदुस्तान को बचाने की लड़ाई हम सब लड़ रहे हैं. शादाब के लिए आज शर्मिंदा भी हूँ तो अपने इस मुसलमान दोस्त पर फक्र भी कर रहा हूँ.

शादाब वही है जिसपर कल गोपाल ने गोली चला दी थी.

क्या आपने सोचा? शादाब किसके लिए वहां प्रदर्शन कर रहा था? अपने लिए?……….. नहीं,

वह तो अच्छा सिंगर है, थियेटर जाता है, पेंटिंग बनाता है, अच्छे गाने गाता है. परिवार से सक्षम है. अपनी नागरिकता साबित कर ही देगा.

लेकिन गोपाल नहीं जानता, शादाब उसकी ही लड़ाई लड़ रहा था. नागरिकता साबित करनी पड़ेगी तो गरीब हिंदुओं को भी करनी पड़ेगी, जिसपर अपनी रोजी कमाने के चक्कर में रोटी खाने तक का भी वक्त नहीं है, वह भी कागज के इंतजाम में लग जाएगा. कागज गरीब मुसलमान पर नहीं होंगे तो गरीब हिंदुओं पर भी न मिलेंगे. मुसलमान इलीगल होगा तो हिन्दू भी अपने ही देश में इलीगल हो जाएगा, अपनी रोजी-रोटी छोड़ वकीलों के चक्कर काटेगा.

कभी आपने सोचा किसलिए?…. क्योंकि सरकार ने उसे लाइन में लगाया हुआ है.

एक साम्प्रदायिक सरकार, हिन्दू-मुसलमान की बहसों को हर रोज रोटी की तरह खिला रही है. बस इतनी सी बात आपकी समझ में क्यों नहीं आती?

शादाब असल में गोपाल को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन शादाब को बचाने की लड़ाई, आपको लड़नी होगी. उससे पहले कि उसे किसी मौलवी के भाषण अच्छे लगने लगे, उससे पहले कि उसे अपने मुसलमान होने पर भय होने लगे. उससे पहले कि उसे आपके राम से, आपके हिंदुस्तान से नफरत होने लगे, इस शादाब को बचा लीजिए. शादाब यहां कोई एक व्यक्ति नहीं है, पूरी मुसलमान कौम है. आपके दोस्त हैं, आपके भाई हैं.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
No tags for this post.

By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son