क्या कुणाल कामरा की हवाई यात्राओं पर प्रतिबंध उचित हैं.?

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-सर्वप्रिया सांगवान!!

अर्नब गोस्वामी को हवाईजहाज़ में किसी ने 2-4 बातें सुना दी और तत्काल सिविल एविएशन मंत्री हरदीप एस पुरी ने एक्शन लिया और उस लड़के कुनाल कामरा को दो एयरलाइन से 6 महीने के लिए सस्पेंड करवा दिया.

क्या सही बात है ना कि सत्ता से ऐसी नज़दीकी कि एक फ़ोन घुमाया और एक्शन हो गया. कई पत्रकार तो बस इस लेवल तक पहुँच पाते हैं कि रेल की टिकट ही कन्फ़र्म करवा पाते हैं. आम व्यक्ति को कुछ परेशानी होती है तो कौनसा मंत्री ट्वीट करके सज़ा का एलान करता है भाई!

एक वकील साकेत गोखले ने लिखा है कि ये कार्रवाई करने के लिए एयरलाइन ने प्रक्रिया पूरी नहीं की. पहले तो किसी पूर्व ज़िला या सेशन जज की अध्यक्षता में इंटर्नल कमेटी बैठती है और फिर देखा जाता है कि अपराध लेवल 1,2 या 3 था. किसी से मौखिक बहस लेवल 1 अपराध है जिसमें 3 महीने का सस्पेंशन है. वो भी तब जब दोनों पक्षों के बयान हुए हों. जब कमेटी किसी फ़ैसले पर पहुँचती है तो उसके बाद भी आरोपित को 60 दिन का वक्त दिया जाता है अपील के लिए. क्या ये सब 24 घंटे से पहले कर लिया गया? क्या सज़ा आप ही के लिखे नियमों के अनुरूप हुई?

Air India ने किस आधार पर सस्पेंड किया? उसमें तो दोनों ही लोग यात्रा कर भी नहीं रहे थे.

हाँ वीडियो देख कर तो लग ही रहा है कि ये नहीं होना चाहिए था. लेकिन हमारे कह देने से क्या हमारे साथ ये सब आगे नहीं होगा? ये बिल्कुल होगा और होता रहा है क्योंकि प्रक्रिया और क़ानून की परवाह बहुत कम देखी गयी है. लोग बीच चौराहे इंसाफ़ चाहते हैं.

क़ानून तो सबके लिए समान है लेकिन क़ानून वालों के लिए सब समान नहीं हैं. यहीं पर सारी बात ख़त्म हो जाती है.

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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