सरकार समर्थक एंकर का अहिंसक विरोध भी बर्दाश्त नहीं..

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चौकीदार मंत्री एक नागरिक के पक्ष में और दूसरे के खिलाफ..

-संजय कुमार सिंह।।

मुंबई-लखनऊ उड़ान में टेलीविजन एंकर अर्णब गोस्वामी से सवाल पूछकर और जवाब देने के लिए अड़े रहने के लिए अर्नब को परेशान करने के आरोप में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा को निजी विमानसेवा कंपनी इंडिगो ने छह महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया। दूसरे यात्रियों की सेवा में एक निजी कंपनी का यह व्यवासायिक या पेशेवर फैसला हो सकता है। एक ट्वीट में कंपनी ने कहा है कि कुणाल कामरा के इंडिगो से सफर करने पर छह महीने की अवधि के लिए रोक लगा दी गई हैं। विमान कंपनी ने उनका व्यवहार अस्वीकार्य बताया है। वैसे तो यह अर्नब का अहिंसक विरोध था और दोनों इंडिगो के यात्री थे पर एक के पक्ष में और दूसरे के खिलाफ विमान कंपनी की कार्रवाई उसका अधिकार है। भले ही कुणाल कामरा ने इसके लिए यात्रियों और चालक दल के सदस्यों से माफी मांग ली थी।

इसमें दिलचस्प यह हुआ कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री जो दिल्ली के विधानसभा चुनाव में भी सक्रिय हैं ने कहा कि विमान के अंदर इस तरह की भड़काने वाली गतिविधि अस्वीकार्य है। इससे यात्रियों को नुकसान पहुंच सकता है। हम दूसरी एयरलाइन से भी दरख्वास्त करते हैं कि संबंधित व्यक्ति पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाए। इसके बाद एयर इंडिया ने भी अगले आदेश तक कुणाल कामरा पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिया है। इंडिगो ने छह महीने के लिए रोक लगाई सरकारी एयर इंडिया ने अगले आदेश तक (जो मंत्री जी का भी हो सकता है) रोक लगा दी है। वैसे तो पूरा मामला बहुत ही साधारण और छोटा सा है पर दिल्ली का चुनाव जीतने के लिए मुद्दे तलाश रही भाजपा ने इस मामले को भी लपक लिया है।

अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ ने इसपर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की खबर ली है और कहा है कि यह गलत आईडिया है। और कल का दिन तो कई सारे अच्छे आईडिया का दिन था। आप कुणाल कामरा को आध्यामिक सुधार के रास्ते पर भेज सकते थे या फिर उनपर चीता छोड़ सकते थे। यह सब सुझाव कल की खबरों से प्रेरित है जिसे अखबार ने साथ ही छापा है और उनका भी विवरण दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कल ही एक आदेश के तहत गुजरात के दंगाइयों को मध्यप्रदेश में आध्यात्मिक सेवा के लिए भेजा है। गुजरात के दंगों में हाई कोर्ट इन इन 17 लोगों को दोषी घोषित किया था। दोषियों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। सभी को इस शर्त पर जमानत दी गई है कि वह मध्यप्रदेश में जाकर आध्यात्मिक सेवा करेंगे। दोषियों पर 33 लोगों को जिंदा जलाने का आरोप है।

टेलीग्राफ ने लिखा है कि मंगलवार का यह आदेश देर रात तक सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया था और यह पहला मौका है जब सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त पर जमानत दी है कि दोषी अध्यात्म के रास्ते पर चलें। अब यह एक नजीर बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 142 के तहत यह अधिकार है कि वह ऐसे आदेश / फैसला / या निर्देश दे सकता है जिससे पूर्ण न्याय मिले। इस तरह हम देख रहे हैं कि दंगाइयों / अपराधियों / हत्यारों को अध्यात्म के रास्ते पर भेजा जा रहा है और प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि देश युवा सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान के साथ युद्ध की बात कर रहे हैं। देश के नागरिकों को मारने वालों के लिए अध्यात्म और पाकिस्तान से युद्धकर ने अपने सैनिकों को मौत के मुंह में ढकेलने की यह तैयारी अखबारों में नजर आ रही है कि नहीं? आपको कैसी सूचनाएं मिल रही हैं इसका ख्याल आप रखिए।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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