अखबारों की जांच का तमाशा, जांच करने वाले ही बटोर रहे है मोटी रिश्वत..

Page Visited: 361
0 0
Read Time:2 Minute, 3 Second

-महेश झालानी||

अखबारों के घोटालों की ईमानदारी से जांच होनी चाहिए, इस पर ना तो किसी पत्रकार को एतराज है और ना ही समाचार पत्र संगठन को । अगर अखबारों की जांच की जाती है तो जांच करने वाले अधिकारियों के काले धंधों की जांच करना भी अनिवार्य है ।

राजस्थान के अलवर का एक मामला प्रकाश में आया है । अलवर के जन सम्पर्क अधिकारी योगेंद्र शर्मा ने एक कुख्यात अखबार की फर्जी रिपोर्ट पेश करने के लिए ना केवल 35 हजार रुपये ऐंठ लिए बल्कि अपने एक रिश्तेदार को फर्जी अखबार का प्रभारी भी बनवा दिया । जयपुर स्थित इस अखबार अलवर सहित पांच संस्करण है । मजे की बात यह है कि जयपुर के अलावा इस अखबार का ना तो कही कार्यालय है और ना ही प्रेस । फर्जी संस्करण के आधार राज्य एवं केंद्र सरकार से हर माह लाखो रुपये के विज्ञापन बटोरे जा रहे है ।

पीआरओ साहब ने इस अखबार का जहां कार्यालय दर्शाया है, वस्तुतः वहां भैस का तबेला है । जिस प्रेस में अखबार प्रकाशित होने का उल्लेख है, उस प्रेस में आज तक इस अखबार की एक भी कॉपी प्रकाशित नही हुई । अपने कारनामों और करतबों की वजह से जन सम्पर्क अधिकारी महोदय काफी कुख्यात है । झुंझुनू से अलवर तबादला होकर आ रहे थे तो साथ मे कुर्सी भी ले आये । इस बार फर्जी सफाई के लिए ये पुरस्कृत भी हो चुके है । बताया जाता है कि और भी कई अखबारों की जांच के नाम पर उगाही करने का आरोप है ।

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram