इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-श्याम मीरा सिंह।।

शरजिल इमाम पर दो बातें तीन बातें कहनी हैं, पहली बात कि शरजिल इमाम और योगी आदित्यनाथ की भाषा में कोई अंतर नहीं है, एक ने कुछ महीने एक स्टेट को, मैन लैंड से अलग करने की बात कही, एक इसी देश के नागरिकों को इस देश से अलग करने की बात करता है. मुझे याद है एक मंच पर आदित्यनाथ थे, उसी मंच पर आकर एक लफंगे ने कहा था कि मुस्लिम औरतों का कब्र से निकालकर बलात्कार कर देना चाहिए. भीड़ वहां भी थी, तालियां वहां भी थीं. वो लफ़ंगा हिन्दू था, लेकिन किसी मंच पर जाकर कुछ भी अंडबंड बक देने से वह सभी हिंदुओं का नेता नहीं हो गया, न ही सभी हिंदुओं की आवाज बन गया. भीड़ की अपनी कॉन्शियसनेस नहीं होती, वहां एक ने ताली बजा दी, सब बजा देंगे, एक ने हु हु हु कर दिया, भीड़ भी हु हु हु करने लग जाएगी. शाहीनबाग का कॉमन कॉन्शियसनेस शरजिल इमाम नहीं है. जब हम योगी आदित्यनाथ और उस लफंगे से लड़ लिए, तो शरजिल से भी लड़ लेंगे. जैसे साध्वी की भाषा, भोपाल की भाषा नहीं है, ट्रंप की भाषा अमेरिका की भाषा नहीं है, योगी की भाषा पूरे उत्तरप्रदेश की भाषा नहीं है. शरजिल की भाषा भी शाहीनबाग की नहीं है.

शाहीनबाग वहां की औरतों ने खड़ा किया है! लेकिन वही मीडिया वाले, वही आईटी सेल वाले, जिन्होंने शरजिल की वीडियो को आपके दिमाग में ला लाकर घुसाया है, उसने शाहीनबाग की औरतों की कितनी बाइट्स? कितने वीडियोज? आपतक पहुंचाए? एक भी नहीं. एक महीना ठंड में बीत गया. शाहीनबाग की औरतों की आवाज आप तक नहीं पहुंची, उनका असली मुद्दा आपतक नहीं पहुंचा, लेकिन एक लफंगे की वीडियोज आप तक मीडिया पहुंचा गया. क्योंकि यही माल है जो दिल्ली की पगडंडी तक जाता है.

आप मुसलमानों को देश से निकालने के लिए कानून बना सकते हैं, आपकी पूरी की पूरी कौम उसे सेलिब्रेट कर सकती है, आप डिटेंशन सेंटरों का जश्न मना सकते हैं, आप लिंचिंग का त्योहार मना सकते हैं. फिर उन्हीं मुसलमानों में से कोई एक आकर आपकी बात को स्वीकार ले, आपकी बात को ही दोहरा दे, आपकी आवाज को ही अपने लहजें में बोल दे, आपके जय श्री राम को “अल्लाह हु अकबर” कर दे. तब आपका दम निकल जाता है, तब आप अकस्मात प्रगतिशील बन जाते हैं. तब आप को संविधान के आर्टिकल अचानक से याद आ जाते हैं.

शरजिल ने वही बात कही है जो मोदी-शाह कानून बनाकर कहना चाहते हैं. उसने वही भाषा तो बोली है, जो NRC-CAA कानूनों की भाषा है. उसमें अलग क्या लगा आपको?

मुझे और मेरे जैसे तमाम लोगों को जिन्हें CAA-NRC से आपत्ति है तो हमें शरजिल से भी है. हमें योगी से भी है, साध्वी से भी है. लेकिन आपको तो NRC काफी स्वीट आईडिया लगता है. अपने ही देश के नागरिकों को आप डिटेंशन सेंटरों में डालने के आईडिया को कूल कूल कहकर, सेलिब्रेट करते हैं, फिर आपको शरजिल से आपत्ति कैसी?

अब आखिरी बात सुन लीजिए, हम NRC-CAA के विरोध में इसलिए नहीं हैं कि इस देश में शाहीनबाग नाम की एक जगह प्रतिरोध का प्रतीक बन चुकी है, हम NRC-CAA के विरोध में इसलिए भी नहीं हैं क्योंकि मुस्लिम हमारे दोस्त हैं. हम NRC का विरोध में इसलिए भी नहीं हैं कि शरजिल ने हमें निमंत्रण दिया था.

हम CAA-NRC के विरोध में इसलिए हैं, क्यों मेरे देश के संविधान के अस्तित्व पर प्रश्न है. विरोध में इसलिए हैं क्योंकि ये मेरे आस्तित्व का प्रश्न है. मेरे देश की कल्चर का प्रश्न है. एक शरजिल से, एक भीड़ से, एक योगी से, एक लफंगे के आने से हम CAA-NRC का समर्थन नहीं कर देंगे, यदि हम ऐसा करते हैं, तो समझिए हम शरजिल की बातों को ही दोहरा रहे हैं.

हम शरजिल की विचारधारा के खिलाफ हैं, हम योगी की विचारधारा के खिलाफ हैं, हम इस्लामिस्ट स्टेट के खिलाफ हैं, हम हिन्दू स्टेट के खिलाफ हैं. तभी हम CAA-NRC के खिलाफ हैं.

लेकिन आप योगी पर सवाल नहीं करते, आप साध्वी पर सवाल नहीं करते, आप लिंचिंग पर सवाल नहीं करते, आप हिन्दू राष्ट्र के कांसेप्ट का विरोध नहीं करते, आप NRC के खिलाफ नहीं बोलते, तो फिर आप किस आधार पर शरजिल के खिलाफ बोल सकते हैं?

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
No tags for this post.

By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son