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धूर्तो के विरोध से भी ठग लेते मुर्खजन..

By   /  January 14, 2020  /  No Comments

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-सत्य पारीक।।

फिल्मों से लेकर व्यक्ति विशेष का किसी भी मुद्दे पर विरोध करने वाले धूर्त लोग होने का खिताब पाये होतें है, जबकि विरोध का शिकार होने वाला भी कम धूर्त नहीं होता है। जिसका सीधा लाभ मूर्ख उठाते हैं और ठगी जाती है जनता भोली भाली , जो भेड़चाल की शिकार होती है। ऐसे कितने ही दृष्टांत भारत देश में देख सकते हैं, धूर्त्तता की बड़ी बातों पर गौर बाद में करेंगें , सबसे पहले ताजातरीन घटना फ़िल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ( जिसे  विवादों की रानी भी कहा जा सकता है ) की है जिसने अपनी नई फ़िल्म प्रमोट करने के लिए झगड़ा स्थल जे एन यू का भ्रमण किया ।

संयोग ऐसा बना कि एक तरफ जे एन यू में झगड़ा हुआ दूसरी तरफ निर्भया कांड के आरोपियों को फांसी की सज़ा के ब्लैक वारंट जारी करने के आदेश हुए।

उन्ही दिनों दीपिका अभिनीत फिल्म ‘ छपाक ‘ जो तेजाब फेंक कांड पर बनी है रिलीज़ के लिये तैयार हुई।

दीपिका के जे एन यू के पग फेरे को देख भाजपा वालों ने धूर्त्तता दिखाते हुए ऐलान कर दिया कि छपाक का विरोध किया जाएगा। कांग्रेस वाले कौनसे कम धूर्त हैं, उन्होंने तपाक से जवाब ठोक दिया कि हमारी पार्टी द्वारा प्रशासित राज्यों में छपाक टैक्स फ्री होगी , ऐसे में फ़िल्म देखने वाले मुर्खजन धड़ाधड़ फिल्म की और बढ़ने लगे और फ़िल्म के साथ दीपिका पादुकोण रातों रात चर्चित हो गई ।

 ऐसे ही दीपिका की फ़िल्म ‘ पद्मावती ‘ की धूर्तो ने विरोध कर उसका नाम पद्मावत करा कर सैंकड़ो करोड़ से फ़िल्म की कमाई करा दी। अब जरा राजनीतिक धूर्तताओं पर ध्यान दीजिए। नरेंद्र मोदी ने चुनावों में धूर्तता की सारी सीमा लांगते हुए मूर्ख जनता के सामने वायदे की आड़ में जुमले परोसे परोसे , जिनमें काला धन आएगा , 15 लाख प्रत्येक व्यक्ति के खाते में , अच्छे दिन , एक के बदले पाकिस्तानियों के दस सिर , छप्पन इंच की छाती जैसे धूर्त बातें कही बस झांसों में आकर मुरखजन लूट गये , ऐसी कितनी ही राष्ट्रीय स्तर की धूर्तताओं की चर्चा की जाए जिससे भाजपा राजनीति में बल्ले बल्ले करा रही है और मुरखजन ठगे जा रहें हैं ।

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  • Published: 6 months ago on January 14, 2020
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  • Last Modified: January 14, 2020 @ 7:57 pm
  • Filed Under: मनोरंजन
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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