जहाँ भी अन्याय हुआ, वहां हम खड़े होंगेः प्रियंका गांधी..

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-तौसीफ कुरेशी।।
मुजफ्फरनगर और मेरठ में पुलिसिया हिंसा के पीड़ितों के परिजनों से कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने की मुलाकात।
सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जज की निगरानी में हो जांच, बिना तथ्य और जांच किये बिना प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं: प्रियंका गांधी
महासचिव प्रियंका गांधी ने दोहराई प्रमुख चार मांग, पुलिसिया हिंसा में शामिल अधिकारियों पर हो कार्रवाई।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं प्रभारी उप्र श्रीमती प्रियंका गांधी ने मुजफ्फरनगर और मेरठ में CAA के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद पुलिसिया हिंसा के शिकार हुए पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। मुजफ्फरनगर में उन्होंने मौलाना असद रजा हुसैनी से मुलाकात की। मौलाना असद रजा मुजफ्फरनगर के नामचीन लोगों में से हैं, देश-विदेश में शिक्षा जगत में उनका नाम बड़े अदब से लिया जाता है। वे गरीब और अनाथ बच्चों को मुफ्त में मदरसे में शिक्षा देते हैं।पुलिस ने उनको बुरी तरह से पीटा है। उनके हाथ तीन जगह से बुरी तरह टूट गए हैं। मदरसे से पुलिस 17 बच्चों को उठा कर ले गयी, जिसमें से ज्यादातर नाबालिग बच्चें हैं। गिरफ्तार किए गए बच्चों को भी पुलिस ने बर्बर तरीके से मारा-पीटा है। अभी भी ज्यादातर बच्चे हिरासत में हैं। मौलाना असद रजा का मेडिकल तक नहीं हुआ है।

कांग्रेस महासचिव ने हिंसा में मारे गए नूर मोहम्मद की पत्नी सन्नो से खालापार दक्षिण में उनके घर पर मुलाकात की। नूर मोहम्मद दिहाड़ी मजदूर थे और अपने घर में इकलौते कमाने वाले थे। उनके मां-बाप की पहले ही मौत हो चुकी थी। मारे गए नूर मोहम्मद की पत्नी सन्नो के पेट में सात माह का बच्चा है। घर पर बाप की राह जोह रही 15 माह की बेटी है। नूर मोहम्मद की मौत का एफआईआर जबरन पुलिस ने अज्ञात के नाम दर्ज कर दिया। अभी तक उनकी बेवा सन्नो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के लिए ऑफिसों का चक्कर लगा रही हैं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने रुकैया परवीन से मुलाकात की। रुकैया और उनकी बहन की फरवरी में शादी है। उनके घर पर पुलिस रात के वक्त पहुंची और पूरे घर में तोड़-फोड़ मचा दी। परिजनों का आरोप है कि दहेज का सामान और कैश भी पुलिस लूट कर ले गयी। रुकैया परवीन ने जब गिड़गिड़ाते हुए पुलिस से गुजारिश की तो पुलिस ने उनके साथ मारपीट की। पुलिस ने इतनी बुरी तरह से पीटा है कि उसके सर में 16 टांके लगे हैं।श्रीमती प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जहां-जहाँ अन्याय हुआ है हम वहां खड़े होंगे। उन्होंने नूर मोहम्मद की पत्नी सन्नो के बारे में कहा कि बड़ी दर्दनाक स्थिति है। 22 साल की लड़की 7 माह की प्रैग्नेंट है। गोद में छोटी सी बच्ची है। उसके पति नूर मोहम्मद को हिंसा में मार दिया गया। वह एकदम अकेले है।
उन्होंने कहा अगर किसी ने हिंसा की है तो पुलिस कार्यवाही करे, उसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन पुलिस खुद घर में घुसकर मारपीट कर रही है।

एक लड़की की शादी होने वाली थी उसके यहां मारपीट हुई है। तोड़फोड़ हुई है। उस लकड़ी को भी मारा-पीटा है, उसके सर में 16 टांके लगे हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस का काम क्या है, जनता की सुरक्षा और न्याय दिलाना, लेकिन यहां तो उल्टा हुआ है तो जहां-जहां उल्टा हुआ है उसके खिलाफ हम लड़ेंगे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी मेरठ में ओम साईं धाम कालोनी में पुलिसिया हिंसा में मारे गए मो. अलीम पुत्र श्री हबीब, आसिफ पुत्र श्री ईद उल हसन, मोहसिन पुत्र मोहम्मद अहसान, आसिफ पुत्र सईद और जहीर पुत्र मुन्शी के परिजनों से मुलाकात कीं। मेरठ में CAA के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन में मारे गए सभी मृतक बेहद गरीब परिवार से आते हैं। हिंसा में मारे गए अलीम होटल पर वेटर का काम करते थे। उनके परिजनों का कहना है कि वे अपने घर लौट रहे थे कि रास्ते में पुलिस ने गोली मार दी। आसिफ रिक्शा चलाते थे। मोहसिन, आसिफ और जहीर दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह अपना परिवार पालते थे। जहीर के परिजनों का दावा है कि जहीर गली में सामान लेने गए थे पर वे लौट कर नहीं आ पाए, पुलिसिया हिंसा में वे मारे गए।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि वे हर उस व्यक्ति के साथ खड़ी हैं, जिनको सताया गया है, जिनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों से वे मेरठ में मिलीं हैं उनके साथ सरासर अत्याचार हुआ। मारे गए लोगों के परिवारों के लोगों का एफआईआर तक दर्ज नहीं हो पाई है। परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तक नहीं दी गई जो कि उनका कानूनी हक है। इस तरह की नाइंसाफी और अत्याचार हुआ है।
उन्होंने कहा कि CAA के खिलाफ हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बाद हुई पुलिसिया हिंसा के खिलाफ उन्होंने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था और चार प्रमुख मांग की थी। उन्होंने कहा कि हम फिर से उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से अपनी मांगें दोहरा रहें हैं-
1. उप्र सरकार के गृह विभाग और डीजीपी द्वारा तुरन्त आदेश जारी करके पुलिस और सरकार द्वारा किये जा रहे गैर कानूनी, हिंसात्मक और आपराधिक कार्यवाही को तुरन्त रोका जाए।
2. मौजूदा हाईकोर्ट के जज या सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के जज की निगरानी में कानूनी ढंग से शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लगाये गये आरोपों की सत्यता और तथ्य की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया जाए।
3. न्यायिक प्रक्रिया पूरी किये बिना सम्पत्तियों को सीज करना या सम्पत्तियों की कुर्की सम्बन्धी प्रक्रिया पर तुरन्त रोक लगाई जाए।
4. शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी जो निर्दोष हैं उन पर किसी तरीके का आपराधिक और गैर कानूनी कार्यवाही न की जाए।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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