काहे का NRC? बिहार में नहीं होने देंगे लागू – नीतीश

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शुक्रवार को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनआरसी पर एक बड़ा बयान दिया है। ऐसा पहली बार था जब उन्होंने एनआरसी वाले मामलों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। नीतीश कुमार जी ने इशारों ही इशारों में दिए गए अपने दो टूक में कह दिया कि वो बिहार में एनआरसी कभी लागू नहीं होने देंगे।

मुख्यमंत्री जी जब भारतीय रोड कांग्रेस के 80 वें अधिवेशन में शामिल होने पटना स्थित बापू सभागार पहुंचे थे। तब वहां से निकलते हुए एक पत्रकार द्वारा एनआरसी पर पूछे गए सवाल पर सुशासन बाबू ने बड़े ही बेबाक अंदाज में जवाब दिया, ” काहे का NRC”? उनके इस बयान से यह तो बिल्कुल साफ हो गया है कि जदयू राष्ट्रीय नागरिक पंजी के अपने पुराने स्टैंड पर अभी तक कायम है।

आपको बता दें कि सीएए और और एनआरसी का विरोध पार्टी के कई नेता समेत जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लगातार करते आ रहे थे। इसपर विचार करने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री सह पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात भी की थी जिसके बाद नीतीश जी ने पीके को इस कानून को बिहार में नहीं लागू करने का आश्वासन भी दिया था। अब जब नीतीश जी ने खुल कर इसपर अपना बयान दे दिया है, तो पार्टी का स्टैंड भी क्लियर नजर आता है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि बिहार में एनडीए के बाकी घटक दलों को नीतीश जी का यह फैसला कितना पसंद आता है और यह मजूदा समय में बिहार के एनडीए सरकार के लिए कितना घातक साबित हो सकता है।

हालांकि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ देश के कई हिस्‍सों में हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का राज्‍य में एनआरसी लागू नहीं करने का बयान ने, आंदोलन कर रहे लोगों को वाकई राहत देने का काम किया होगा।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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