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जब प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने वहां से भगा दिया था तो फिर बस में आग किसने लगाई..

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-रुबा अंसारी।।

जामिया के प्रोटेस्ट से मैं कई दिनों से जुड़ी हूँ मैं हरगिज़ ये नही कहूंगी की प्रदर्शनकारी मासूम थे और सारी गलती पुलिस की है। लेकिन कुछ चीज़ें हैं जो मैं आपसे शेयर करना चाहती हूं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय दिल्ली के ओखला में स्थित है और ये मुस्लिम बाहुल्य इलाका है। इस इलाके के सभी निवासी ‘नागरिकता संशोधन एक्ट’ के खिलाफ थे। आम लोग भी इसके खिलाफ प्रदर्शन करना चाहते थे लेकिन उनके पास प्लेटफॉर्म नही था। जैसे ही जामिया के स्टूडेंट्स ने CAA के विरोध में लांग मार्च निकालने की घोषणा की तो आप पास के इलाके में भी इसकी खबर फैल गयी।
जामिया प्रोटेस्ट के दिन जब बच्चे कैम्प्स में इखट्ठे हुए तो उनकी संख्या कम थी लेकिन जैसे ही छात्र सड़क पर उतरे उस प्रोटेस्ट में आस पास के लोग भी शामिल हो गए। प्रदर्शनकारियों की संख्या हाज़रों में बढ़ गयी। जब छात्रों ने बैरिगेट गिराने की कोशिश की तो पुलिस ने उनपर लाठी चार्ज कर दी भगदड़ में गिरे छात्र छात्राओं को पीटा भी गया और कुछ को जामिया की गेट के अंदर तक खदेड़ दिया गया कुछ रोड के दूसरी तरफ भाग निकले। ध्यान रहे कि कैम्प्स के अंदर छात्रों के साथ साथ आस पास के लोग भी थे। इसके बाद शरू हुई पुलिस पर पत्थरबाज़ी। जिसके जवाब में पुलिस ने पत्थर फेंके और आंसू गैस की फायरिंग की। तो ये जामिया प्रोटेस्ट के पहले दिन की खबर है

दूसरे दिन जामिया के स्टूडेंट्स ने ये तय किया कि वो अपने कैम्पस के अंदर ही विरोध करेंगे। माहौल पूरी तरह शांत था। इसी बीच ओखला के लोकल नेताओं ने ये भांप लिया कि मुद्दा गरम है और इनके पास अपनी राजनीति चमकाने का बढियां मौका है। उन्होंने तय किया कि अब वो भी जामिया में हुए प्रोटेस्ट की तरह सड़कों पर प्रोटेस्ट करेंगे।

तीसरे दिन लोकल नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ आम लोगो द्वारा ओखला के अलग अलग इलाके में गली गली प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों की एक टुकड़ी (जिसमे जामिया के छात्र भी शामिल थे) मथुरा रोड पर बैठ कर प्रदर्शन कर रही थी जिससे ट्रैफिक में बाधा पड़ी। पुलिस ने बैठे हुए प्रदर्शनकरियों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा रबर बुलेट चलाई और वहां से भगा दिया। इसके बाद वहां खड़ी बस में आग लगने की खबर मिली…

इस पर सीधा सवाल ये बनता है कि जब प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने वहां से भगा दिया था तो फिर बस में आग किसने लगाई??

इस के बाद पुलिस की बड़ी फ़ोर्स जामिया मिल्लिया इस्लामिया पहुंच गयी और कैंपस के बन्द गेट को तोड़ते हुए, गार्ड के साथ मार पीट करते हुए जामिया कैम्पस में घुस गयी और एक तरफ से सबको पीटना शुरू कर दिया। जो कैम्पस में प्रोटेस्ट कर रहे उन्हें भी… जो कैंटीन में खाना खा रहे थे उन्हें भी… जो लाइब्रेरी में पढ़ रहे थे उन्हें भी,, और जो मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे थे उन्हें भी और जो छात्राएं घबरा कर मस्जिद में छुप रही थीं उन्हें भी… यहां तक कि मस्जिद के बूढे इमाम को भी पीटा.. आंसू गैस के गोले छोड़े,,
पुलिस ने कैम्पस में मौजूद टेबल, चेयर, खिड़की, दरवाजे, बाथरूम के शीशे सब तोड़ दिए, कुछ नही छोड़े।

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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