यह समय जामिया मिलिया इस्लामिया के साथ खड़े होने का है, छात्रों ने किया साथ देने का आह्वान..

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-प्रियांशु।।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र,जब रविवार को नागरिक संशोधन विधेयक के विरोध में संसद की ओर मार्च कर रहे थे और जब पुलिस द्वारा विश्वविद्यालय के द्वार पर मार्च को रोकने की कोशिश की गई तो छात्रों से उनकी झड़प शुरू हो गई।
पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया और आंदोलन को शांत करने के लिए लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में प्रदर्शनकारी छात्रों ने पथराव भी किया था जो पुलिस बल के पक्षों की ओर से भी देखने को मिली। इस कार्रवाई के बाद छात्रों के आंदोलन कि गति थोड़ी धीमी हुई और विश्विद्यालय को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया।

लेकिन सूत्रों के मुताबिक आज कुछ नकाबपोश लोगों द्वारा दिल्ली के जामिया नगर इलाके में डीटीसी की सरकारी बसों में आग लगा दी गई। पुलिस ने बिना उन लोगो की पहचान किए सारा दोष निर्दोष छात्रों पर मढ़ते हुए जामिया के कैंपस में घुस कर उनको मारना – पीटना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि पुलिस ने लाइब्रेरी और गुसलखानों तक मे घुस कर आंसू गैस के गोले दागने के साथ लाठियाँ बरसाई। जिसके चलते कई छात्र छात्राएं घायल हो गए। इसके अलावा पुलिस ने सैंकड़ों छात्रों को अपनी हिरासत में ले अलग अलग पुलिस थानों में भेज दिया।

पुलिस पर आरोप लग रहा है कि पुलिस बिना किसी परमिशन के यूनिवर्सिटी में घुस आई और वहां जम कर तांडव मचाया इसके बाद जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों तथा एक्टिविस्टों की अपीलें आने लगी कि यदि आप दिल्ली में है तो जरूर आईए!
हमारे साथ कदम से कदम मिला कर हिटलरशाही के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए आईए!
देश के संविधान को बचाने के लिए आईए! पुलिस की के

बर्बरता के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए आईए! सरकार को आईना दिखाने के लिए आईए!
देश के अमन चैन और भाई चारे के लिए आईए!
देश की धूमिल हो रही पुरखों की विरासत और गंगा जमुनी तहजीब को बचाने के लिए आईए!
अपने हक और अधिकार की लड़ाई को लड़ने के लिए आईए।
आपसे हांथ जोड़ कर विनती है प्लीज आईए!
(यह अपील जेएनयू, जामिया, डीयू में पढ़ रहे उन तमाम छात्रों ने की जो नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जारी लड़ाई में दिल्ली पुलिस की निर्ममता के खिलाफ आईटीओ का घेराव करने के लिए निकले है।)

क्योंकि आज दिल्ली पुलिस ने जामिया के छात्रों को बहुत पीटा है। कैंपस के भीतर घुस के छात्रों पर हमला किया गया है। लाइब्रेरी में पढ़ रहे बच्चों को मारा गया है और तोड़ फोड़ करी है, उन्हें वहां बंधक बनाकर उनके ऊपर आंसू गैस के गोले छोड़े गए है और पुलिस द्वारा फायरिंग भी की गई है । केवल इसलिए क्योंकि वो इस देश के संविधान के लिए लड़ रहे थे।
और ख़बर यह भी आ रही है कि दिल्ली के कालकाजी पुलिस थाने में 20 के करीब छात्र लहू-लुहान हालत में पड़े हैं और उनके शरीर से लगातार खून बह रहा है लेकिन दिल्ली पुलिस थाने में किसी को नहीं घुसने दे रही है। वकीलों को भी नहीं।

बीबीसी की पत्रकार बुशरा शेख इस प्रकरण का कवरेज करने गई थी उनका आरोप है कि पुलिस ने उनका फोन छीन लिया और उनके साथ मारपीट की जबकि वे खुद पथराव न करने की अपील कर रही थी।

दिल्ली मेट्रो ने भी हिटलरशाही का नमूना पेश करते हुए जेएनयू के छात्रों के लिए हुए मुनरिका, आरके पुरम और IIT मेट्रो स्टेशन को बंद करवा दिया है। लेकिन बावजूद इसके जेएनयू, दिल्ली यूनिवर्सिटी और तमाम कॉलेजों के छात्रों की भीड़ दिल्ली पुलिस मुख्यालय को घेरने निकल पड़ी है ।

जामिया विश्वविद्याल में पुलिस के द्वारा की गई बर्बरता पूर्वक कारवाई के बाद पीड़ित छात्रों और लोगों ने इसे कयामत की रात बताते हुए दिल्ली पुलिस के मुख्यालय तक पहुँचने का अपील की है ।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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