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पिंकसिटी प्रेस क्लब के अध्यक्ष और महासचिव बर्खास्त..

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अभय जोशी एन्ड कंपनी की बेकद्री से रवानगी..
काले अक्षरों में अंकित होंगे अभय जोशी एन्ड कंपनी के काले कारनामे..

प्रेस क्लब की वार्षिक साधारण सभा मे कल जो कुछ हुआ, उससे शर्मनाक घटना कोई हो ही नही सकती थी । अध्यक्ष और महासचिव बड़ी बेशर्मी से अनियमित तरीके से आयोजित एजीएम में अपने काले कारनामो पर ठप्पा लगवाने के लिए उपस्थित हुए थे । छब्बे जी बनने वालों को क्लब से बेआबरू होकर रुखसत होना पड़ा ।

क्लब का माहौल तभी से खराब होगया था जब अभय जोशी ने चीप पब्लिसिटी हासिल कर शहर को होर्डिंग्स से पाट दिया था । मुख्यमंत्री की चमचागिरी करने के लिए नियम विरुद्ध होर्डिंग्स लगाकर सरेआम नियमो की धज्जियां उड़ाई गई ।
अभय जोशी एन्ड कंपनी को कल यह बताना चाहिये था कि जिस नेक कार्य के लिए मुख्यमंत्री की प्रशस्ति में राग अलापा गया, क्या उसके आदेश निकल गए ? हकीकत यह है कि क्लब की धींगामुश्ती की वजह से सरकार पत्रकारों से खफा है । अप्रेल में पत्रकार पेंशन वाले आदेश आज तक नही निकले । आवास योजना भी फाइलों में कैद होकर कराह रही है । चमचागिरी करने का सबको हक है । लेकिन अभय जोशी एन्ड कंपनी ने होर्डिंग्स लगाकर पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से शर्मसार किया ।

अभय जोशी सदस्यो से बेअदबी के साथ कभी पेश नही आये । लेकिन मुकेश चौधरी का बुनियादी कार्य ही सदस्यो को आये दिन धमकी देना था । इसी वजह से उसकी जबरदस्त धुनाई हुई । गाल पर तड़ातड़ तमाचे जड़कर उसका लाल कर दिया । इनके कार्यकाल में जितने सदस्यो को गैरकानूनी रुप से निकाला गया, वह विश्व रिकार्ड बन गया है । गिनीज बुक में यह रिकॉर्ड दर्ज है । अभय जोशी एन्ड कंपनी ने क्लब सुधारने की दिशा में कोई प्रयास नही किया । जबकि इनके कार्यकाल में कई कीर्तिमान स्थापित किये गए । पैसे के अभाव में 6 दिन बार रूम में आबकारी विभाग का ताला ठुका रहा । बिजली का कनेक्शन कट गया । अनेक बार पगार के लिए कर्मचारियों को हड़ताल करनी पड़ी । हरियाणा की नकली दारू बेचने का रिकार्ड भी अभय जोशी एन्ड कंपनी के नाम दर्ज है ।

जब किरायेदार मकान खाली करके जाता है तो वह खूंटी, सेनेटरी, बिजली के स्विच, दरवाजो के कुंडी आदि को उखाड़कर ले जाता है या उन्हें क्षतिग्रस्त करके अपनी ओछी मानसिकता का परिचय देता है । कमोबेश यही हाल अभय जोशी एन्ड कंपनी ने क्लब का किया । केंटीन में नींबू, शिमला मिर्च, अंडे, ब्रेड, बटर तथा लहसुन आदि लम्बे समय से गायब है । बार मे बीयर नदारद है तो पैसों के अभाव में बाजार से हरियाणा की नकली दारू बेची जा रही है । टिन बियर के भी दर्शन दुर्लभ है । 20 हजार की सेल घटकर 5-6 हजार होगई । क्या यह अभय जोशी एन्ड कंपनी की ऐतिहासिक उपलब्धि नही है ? क्लब परिसर में 27 बार पुलिस तथा अनेक बार आबकारी वालो का आना अभय जोशी एन्ड कंपनी की उपलब्धियों में शुमार नही किया जाएगा ?

क्लब की कुर्सियां दम तोड़ चुकी है । टॉयलेट की सेनेटरी कराह रही है । सफाई बन्द है । ना हार्पिक है और ना हाथ धोने का साबुन । क्या इन उपलब्धियों को अभय जोशी एन्ड कंपनी के खातों में दर्ज नही किया जाना चाहिए ? कल अभय जोशी अपनी उपलब्धियों का बखान करते हुए सीना तानकर कह रहे थे कि हमने कंगना रनौत से माफी मंगवाई । हैदराबाद की घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकाला । यह उपलब्धि नही ओछी पब्लिसिटी हासिल करने का ओछा हथकंडा था । जो लोग एक महिला पदाधिकारी की इज्जत को पलीता लगाने अपराधी हो उनके मुंह से कैंडल मार्च निकालने की बात करना शोभा नही देता ।

सबको पता है कि होर्डिंग्स को लेकर दिए गए धरने का बदला लेने के लिए नियोजित तरीके से उपाध्यक्ष बबिता शर्मा की इज्जत को बेरहमी और निर्ममता से कुचला गया । फिल्मी स्टाइल में एक महिला को क्लब में षड्यंत्र के तहत जबरन लाया गया । इस महिला को औजार बनाकर बबिता की ना केवल सार्वजनिक रूप से इज्जत का जनाजा निकाला गया बल्कि उनको निलम्बित भी कर दिया गया । सत्ता के नशे में चूर बबिता का साथ देने वालो को निलंबित कर अभय जोशी एन्ड कंपनी ने अपनी तानाशाही का परिचय दिया । कल एजीएम में हंगामा नही होता तो अभय जोशी एन्ड कंपनी पांच-सात लोगो जैसे शंकर नागर, बृहस्पति शर्मा, महेश झालानी, आरके चौधरी, बबिता, रघुवीर तथा पुष्पेंद्र सिंह की और बलि लेने वाले थे ।

अभय जोशी एन्ड कंपनी ने अपनी तानाशाही का परिचय देते हुए क्लब की समय पर ना तो ऑडिट कराई और ना ही रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के नियमो का पालन किया । अभय जोशी और मुकेश चौधरी की वजह से कार्यकारिणी के सभी सदस्यो को न्यूनतम 71800 रुपये 15 दिन में अदा करने होंगे । अगरचे पैसा जमा कराने में असफल रहते है तो उनकी संपत्ति भी कुर्क हो सकती है और जेल की सजा भी ।

बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि बड़े बड़े लुभावने वायदे करने वालो ने अपने दुष्कर्मो और नाजायज कार्यो से ना केवल क्लब की गरिमा को खंडित किया है बल्कि क्लब के माथे पर कालिख पोती है । अभय जोशी एन्ड कंपनी का कार्यकाल पहली बार काले कोयले से दर्ज किया जाएगा । अच्छा हुआ इनकी रवानगी होगई । वरना ये क्लब की कुर्सी, टेबल, टॉयलेट के मग्गे आदि को भी बेच खाते ।

यहाँ गांधी की प्रतिमा का उल्लेख करना न्यायसंगत होगा । इन लोगो ने क्लब में गांधी की प्रतिमा इसलिए नही लगवाई कि ये गांधी के फॉलोवर है । बल्कि इसलिए लगवाई ताकि स्थापना दिवस पर होने वाले विरोध से बचा जा सके । गांधी को इन्होंने औजार की तरह इस्तेमाल कर अपनी ओछी मानसिकता का परिचय दिया है । सार्वजनिक या निजी स्थान पर महापुरुष की प्रतिमा लगाने से पूर्व जिला प्रशासन से इजाजत लेना अनिवार्य है । इन्होंने इजाजत नही लेकर अपनी दादागिरी का परिचय दिया है । खैर ! ये तो चले जायेंगे । लेकिन क्लब का तो इन्होंने कूंडा कर दिया है । कोर्ट केस और मुकदमेबाजी, पुलिस में बयान, यही इस क्लब की एकमात्र गतिविधि रहेगी । नए आने वाला लाख कोशिश करे, क्लब की हालत कभी नही सुधर सकती । अंतिम परिणाम ? क्लब पर हरिसन का ताला ।

नए लोगो को चाहिए कि वे पहले क्लब की बकाया राशि जमा कराए फिर बकाया जमा नही करने वालो के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें । चाहे रघुवीर जांगीड़ हो या कोई अन्य । इसके अलावा सुयोग्य व्यक्तियों को शामिल कर क्लब संचालन के लिए अविलम्ब 11 या 13 सदस्यो की तदर्थ समिति बनाई जाए । पूर्व में गठित सभी समितियो को भंग कर केंटीन, बार और अनुशासन/छानबीन समिति का गठन किया जाए ताकि क्लब का सुचारू संचालन हो सके । क्लब के कुछ चोर और हेराफेरी करने वाले कर्मचारियों की भक्ति अभय जोशी और मुकेश चौधरी के साथ हो सकती है । ऐसे दोगले कर्मचारियों तुरन्त बाहर का रास्ता दिखाए । अभय जोशी और मुकेश चौधरी द्वारा किये गए गबन, घोटाले, हेराफेरी की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करना वांछनीय होगा । इसके अतिरिक्त पुलिस में मुकदमा भी दर्ज करने की आवश्यकता है ।

हंगामे के साथ एजीएम सम्पन्न:ऑडिट रिपोर्ट नही हुई पारित

 
पिंकसिटी प्रेस क्लब की गैर कानूनी रूप से आयोजित वार्षिसाधारण सभा आज जोरदार हंगामे और तनावपूर्ण माहौलमें समाप्त होगई बैठक में ध्वनिमत से अध्यक्ष अभय जोशी और महासचिव को निष्कासित करने का निर्णय लिया गया ।अधिकांश लोगों ने भोजन का बहिष्कार कर अपने रोष का इजहार किया हंगामे के बीच बैठक में समूची कार्यकारिणी को भंग कर तदर्थ समिति बनाने का भी निर्णय लिया गया ।बैठक की शुरुआत करते हुए उपाध्यक्ष बबिता शर्मा ने आरोपलगाया कि क्लब को अध्यक्ष और महासचिव मनमाने तरीके से संचालित कर रहे है उन्होंने कहाकि क्लब ने षड्यंत्रपूर्वक उनके चरित्र का चीरहरण कर उनको समाज मे बदनाम कर दिया है उन्होंने कहाकि इन दोनों की मनमानी को नही रोका गया तो क्लब पर ताले लगने से कोई रोक नही सकता ।अध्यक्ष अभय जोशी ने बोलने का प्रयास किया लेकिन 
उत्तेजित सदस्यो ने उन्हें बोलने नही दिया ।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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