पुलिस का न्याय – आरोपी दबंग है तो पीड़िता की हत्या, आरोपी गरीब है तो एनकाउंटर..

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आज गौहनिया बाजार में प्रगतिशील महिला संगठन ने समाज में बलात्कार की बढती घटनाओं, पीड़िताओं की हत्या एवं पुलिस द्वारा बलात्कारियों की रक्षा करने के विरोध में सभा कर रैली निकाली।
हाथो में झण्डे व स्लोगन लिखी तख्तियां लिए सभा कर नारे लगाए व मांग की कि ‘‘बलात्कारियों को सजा देने की गारंटी करो‘‘, ‘‘नया कानून का नाटक बन्द करो – सजा की गारंटी करो‘‘, ‘‘सेंगर की रक्षा कब तक ? जवाब दो!‘‘, ‘‘चिन्मयानंद की रक्षा कब तक ? जवाब दो!‘‘, ‘‘रेप पीड़िता पर दबाव बनाना बन्द करो‘‘, ‘‘हैदराबाद रेप कांड में केस न लिखने वाली दोषी पुलिस और हत्या करने वालों को जेल भेजो‘‘, ‘‘बलात्कारी नेताओं की रक्षा करना बंद करो‘‘, ‘‘दबंग बलात्कारियों की रक्षा करना व गरीब आरोपियों की हत्या न्याय नहीं है‘‘, ‘‘तेलंगाना की हत्यारी पुलिस मुर्दाबाद‘‘, ‘‘मुख्यमंत्री व डीजीपी, तेलंगाना को गिरफ्तार करो‘‘, ‘‘महिलाओं का दोयम दर्जा मुर्दाबाद‘‘, ‘‘लड़कियों के साथ छेड़छाड़ बन्द करो‘‘, ‘‘पीडित पर फर्जी केस लिखाना बन्द करो‘‘, ‘‘पितृसत्ता मुर्दाबाद‘‘, ‘‘मनुवाद मुर्दाबाद‘‘, आदि।
सभा में वक्ताओं ने कहा तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद रेप पीड़िता की प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी और दूसरे थाने का मामला बताकर पीड़ित परिवारों को रात भर दौड़ाती रही। इस घटना मे भावनाओं पर खेलकर पुलिस ने चारो गरीब आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया है।
भारतीय पुलिस तंत्र व न्यायिक तंत्र पहले पीड़िता की शिकायत नहीं दर्ज करता, दर्ज होने पर जांच सही से व समय पर नहीं करता, अपराधी पीड़िता को धमकाकर समझौते का दबाव बनाता है, खुले घूम रहे अपराधी पुलिस सहयोग से पीड़िता पर फर्जी मुकदभे दर्ज कराते हैं। इन घटनाओं ने साबित किया है कि आरोपी गरीब है तो पुलिस उसे मार डालती है, आरोपी दबंग है तो पीड़िता की हत्या हो जाती है।
बलात्कार के बाद पीड़िताओं की निर्मम हत्या से जब सरकार घिरती है तो आरोपियों की फांसी देने की कानून बनाने, लिंचिंग की बात करने लगती है। जनवरी – जून 2019 के बीच पोक्सो एक्ट के अंतर्गत 24,212 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से फास्ट्रैक कोर्ट में पुलिस ने 12,231 में आरोप पत्र दाखिल किये, 1,198 में जांच जारी है, 6,449 में ट्रायल जारी है, केवल 911 को में फैसला सुनाया है।
सभा के दौरान मंजूदेवी, गुलबकली, सुषमा कुशवाहा, शबनम, विमला, अनारकली, शांतिदेवी, कल्लो देव, मंजुसा देवी, मालती देवी, लालमनी, देवकली, गुंजन देवी, शिवकुमारी, सुमन, रामकली, राजकली, वर्षा, कोमल,वंदना निषाद आदि उपस्थित रही।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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