पाक पर एयर स्ट्राइक का भरपूर चुनावी फायदा मिलेगा भाजपा को..

admin
Read Time:9 Minute, 37 Second

-दिलीप ख़ान ||

आज तड़के भारतीय वायु सेना ने सरहद पार पाकिस्तान की ज़मीन पर बम बरसाए. इस हमले पर रत्ती भर भी संदेह की कोई वजह नहीं बनती. भारत की तरफ़ से होने वाले किसी भी दावे से पहले पाकिस्तान ने ख़ुद इस घटना की पुष्टि कर दी. पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने ट्वीटर पर चार तस्वीरें साझा कीं और कहा कि पाकिस्तान की तरफ़ से ‘त्वरित कार्रवाई के बाद भारतीय जहाज़ हड़बड़ी में बम गिराकर वापस चला गया’. इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने कहा कि ये हमला बालाकोट के पास हुआ, लेकिन इसके तीन घंटे बाद अपने इस दावे से पलटते हुए सेना के प्रवक्ता आसिफ़ ग़फूर ने कहा, “भारतीय वायु सेना का जहाज़ मुज़फ़्फ़राबाद सेक्टर में नियंत्रण रेखा से 3-4 मील अंदर घुस आया था”. आपको बता दें कि बालाकोट और मुज़फ़्फ़राबाद के बीच की दूरी 45 किलोमीटर है. ग़फ़ूर के ये दोनों परस्पर विरोधी दावे असल में कश्मीर पर दावेदारी को लेकर कूटनीतिक स्टैंड को दर्शाता है. भारत ये दावा कर रहा है कि ज़माने बाद भारतीय वायु सेना पाकिस्तानी ज़मीन पर हमला करने में क़ामयाब हुई, लेकिन पाकिस्तान अपनी ‘सुरक्षा चूक’ को आधिकारिक तौर पर मानने से कतरा रहा है, इसलिए बालाकोट के पास हुए धमाके को बाद में ‘दुरुस्त’ कर ‘पीओके से 3-4 मील अंदर’ कर दिया गया.

मोदी सरकार या वायु सेना?

वायु सेना की इस कार्रवाई की ख़बर देश में जैसे ही फैली, उसी वक़्त से इस पर दी जा रही प्रतिक्रियाएं साफ़ तौर पर दो लाइनों में बंट गईं. सत्ताधारी बीजेपी के नेता इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दे रहे हैं, वहीं विपक्ष के नेता भारतीय वायु सेना को. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसके तत्काल बाद राजस्थान के चुरु ज़िले में चुनाव प्रचार करने पहुंच गए. वहां उन्होंने कहा, “आज ये संभव इसलिए हुआ है क्योंकि हमारे लिए ख़ुद से बड़ा दल है और दल से बड़ा राष्ट्र है”. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीटर पर लिखा, “आज की कार्रवाई ने यह पुन: साबित किया है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मज़बूत और निर्णायक नेतृत्व में भारत सुरक्षित है.” कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संक्षिप्त ट्वीट किया, “मैं एयर फोर्स के पायलट्स को सलाम करता हूं.” आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने भी वायुसेना के इस साहस को सलाम पेश किया. बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने ‘बहादुर जांबाजों की साहसिक कार्रवाई को सलाम और सम्मान’ पेश करते हुए सवाल भी उठाया कि ‘काश हमारी सेना को फ्री हैंड बीजपी की सरकार पहले ही दे देती तो बेहतर होता’. विपक्ष की तरफ़ से इस मौक़े पर इकलौता लेकिन झिझकता हुआ सवाल मायावती की तरफ़ से ही उठाया गया है.

मोदी सरकार की जवाबी कार्रवाई बीते कुछ दिनों से ‘मोदी है तो मुमकिन है’ और ‘कुछ बड़ा होने वाला है’ जैसी बातें सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में सबसे ज़्यादा चर्चित वाक्यों में रहे. जिस तरह श्रीनगर में अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती हुई और जिस तरह बीजेपी की तरफ़ से लगातार इस तरह की देहभाषा अपनाई जा रही थी, उससे साफ़ लग रहा था कि मोदी सरकार चुनाव से पहले किसी भी सूरत में ‘ठोस कार्रवाई’ के बग़ैर बैठे नहीं रहने वाली है. 14 फ़रवरी 2019 के पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार पर ‘जवाबी कार्रवाई’ का काफी दबाव था. इस हमले के बाद से विपक्ष का सरकार पर आक्रामक तेवर और तेज़तर्रार प्रचार का सिलसिला अचानक थम गया. लेकिन, ये सरकार और बीजेपी दोनों को अंदाज़ा था कि एक बार देश में भावना का गुबार बैठा तो विपक्ष फिर से पुलवामा हमले पर ‘सरकार की चूक’ और मोदी सरकार की नीयत को लेकर हमलावर हो सकता है.

हफ़्ते भर बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर ‘जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में फोटो शूट’ को लेकर तीखे सवाल पूछे. ज़ाहिर है मोदी सरकार के लिए इन सवालों का रक्षात्मक जवाब देने के बजाए एक कदम आगे बढ़कर विपक्ष को रक्षात्मक भूमिका अपनाने के लिए मजबूर करने वाले कदम उठाना मुफ़ीद होता. एयरफोर्स की कार्रवाई के बाद बीजेपी के भीतर नई जान आ गई है. अमित शाह ने इसके फौरन बाद ऐलान कर दिया कि पाकिस्तान को जो सरकार जवाब दे सकती है, उसी आधार पर 2019 का चुनाव लड़ा जाएगा. विपक्ष की मुश्किलें 2016 की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ पर सवाल उठाकर विपक्ष ने जो ग़लती की, उसे कोई भी पार्टी फिर से नहीं दोहराना चाहेगी. मोदी सरकार ने पहले विपक्ष के सवालों को पहले ‘सेना पर सवाल’ कहकर ख़ारिज़ किया और उसके महीनों बाद मीडिया में लीक हुए/कराए वीडियो के ज़रिए विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह धराशाई कर दिया.

भारतीय वायु सेना की ताज़ा कार्रवाई को लेकर भारत और पाकिस्तान के पक्ष में कई अंतर सामने आ रहे हैं. लेकिन, अगर विपक्षी दलों ने 2016 वाली ग़लती दोहराई तो अवाम का सारा समर्थन भावनात्मक तौर पर उसके ख़िलाफ़ जा सकता है. मसलन, भारत की तरफ़ से ये आधिकारिक दावा किया जा रहा है कि इस कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर कार्रवाई हुई जिसमें कई आतंकवादी मारे गए. पाकिस्तान इससे इनकार कर रहा है, पाकिस्तान का कहना है कि हमला वीरान जगह पर हुआ और इससे कोई भी हताहत नहीं हुआ है.

विपक्षी दल अब दोहरी मुश्किलों में घिर गए हैं. पहली मुश्किल ये कि सरकार के दावों पर कोई भी सवाल उठाने का साहस फ़िलहाल वो नहीं कर पाएंगे. 2016 की तरह किसी भी तरह के सबूत की मांग नहीं कर पाएंगे. वजह साफ़ है कि इन सवालों को बीजेपी आसानी से ‘सेना पर उठाए गए सवाल’ के रूप में पेश कर सकती है, इसके बावजूद कि बीजेपी इस कार्रवाई का श्रेय सेना से ज़्यादा ‘मोदी सरकार’ को दे रही है. दूसरी मुश्किल ये है कि विपक्ष द्वारा बीते कई महीनों में गढ़ा गया सत्ता-विरोधी नैरेटिव पुलवामा हमले के बाद भारत-पाकिस्तान मुद्दे के आगे गौण हो गया है. चुनाव तक अगर यही मुद्दा प्रमुख रूप से चर्चा में रहता है तो निश्चित तौर पर बीजेपी इसका फ़ायदा उठाने में क़ामयाब रहेगी. विपक्ष के पिछले तमाम सवाल ‘राष्ट्रवाद’ और ‘पाकिस्तान को सबक’ सिखाने जैसे भावनात्मक मुद्दों के नीचे दबकर रह जाएंगे. ऐसे में विपक्ष ना सिर्फ़ इस विमर्श को चुनाव से पहले बदलने की कोशिश करेगा, बल्कि इस मामले पर सेना की प्रशंसा करते हुए कोई ऐसा ठोस मुद्दा ढूंढने की भी कोशिश करेगा जिससे मोदी सरकार के पांच साल को वो नाकामयाब बताते हुए अपनी दावेदारी पेश कर सके.

0 0

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments
No tags for this post.

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

दैनिक जागरण के महासमर 2019 के चार पन्नों की समीक्षा- विपक्ष और पाठकों की हो रही है हत्या

-रवीश कुमार|| तारीख़ 25 मार्च। पन्ना नंबर दो। महासमर 2019। इस पन्ने पर छोटी-बड़ी 14 ख़बरें हैं। 7 ख़बरें भाजपा नेताओं के बयान पर बनाई गईं हैं। मुख्यमंत्री योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जे पी नड्डा, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी प्राची, भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह। बयानों के आधार […]
Facebook
%d bloggers like this: