/* */

“सफाई कर्मियों को बराबरी का दर्जा चाहिये, पैर धोना उनका अपमान है” बेज़वाड़ा विल्सन

Page Visited: 423
0 0
Read Time:5 Minute, 22 Second

-हृदयेश जोशी||

सफाई कर्मचारी आंदोलन के संस्थापक और रमन मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता बेजवाड़ा विल्सन का कहना है कि कुम्भ में सफाईकर्मियों के पैर धोना असंवैधानिक है। यह उन्हें तुच्छ दिखाकर खुद को महिमामंडित करने जैसा है। विल्सन पिछले कई दशकों से मैला उठाने के काम में लगे लोगों के बीच काम कर रहे हैं और इसके लिये उन्हें देश विदेश में सम्मानित किया जा चुका है।

विल्सन ने मुझसे कहा, “प्रधानमंत्री को सफाई कर्मियों और दलितों के पैर नहीं धोने चाहिये बल्कि उनसे हाथ मिलाना चाहिये। पैर धोने से कौन ग्लोरिफाई (महिमामंडित) होता है। वह (प्रधानमंत्री) ही ग्लोरिफाइ होते हैं ना। वह सफाईकर्मियों के पांव पकड़ते हैं तो वह यह संदेश दे रहे हैं कि आप (सफाईकर्मी) बहुत तुच्छ हैं और मैं महान हूं। इससे किसका फायदा होता है? इनके पैर धोकर वह खुद को महान दिखा रहे हैं। यह बहुत खतरनाक विचारधारा है।”

Clean your mind not our feet, Mr. PM! Highest form of humiliation. 1.6 lac women still forced to clean shit, not a single word in five years. What a shame! #StopKillingUs https://t.co/Hs898ZJlT5— Bezwada Wilson (@BezwadaWilson) February 24, 2019

प्रधानमंत्री ने रविवार को कुम्भ में डुबकी लगाने के साथ वहां सफाईकर्मियों के चरण धोये और उन्हें सम्मानित किया। टीवी पत्रकारों ने जब सफाई कर्मियों से बात की तो प्रधानमंत्री के इस कर्म से वह काफी खुश और भावुक दिखे। उनमें से कुछ ने कहा कि उनके लिये यह सपने की बात सच होने जैसा है तो कुछ ने पत्रकारों के पूछने पर कहा कि वह मोदी जी को ही वोट देंगे।

प्रधानमंत्री ने जहां सफाईकर्मियों को खुश किया वहीं टीवी और इंटरनेट पर चली उनकी तस्वीरें राजनीतिक संदेश भी थीं। मोदी अकेले नहीं हैं उनसे पहले भी अनुसूचित जाति के लोगों को लुभाने के लिये नेता कुछ न कुछ करते रहे हैं। एक वक्त राहुल गांधी अनुसूचित जाति के लोगों के घर जाकर रहे और खाना खाया। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी के दूसरे नेता भी इस तरह कर चुके हैं जबकि सफाईकर्मियों और मैला ढोने वालों की स्थिति खराब बनी हुई है और उन्हें अमानवीय स्थितियों में काम करना पड़ रहा है।

संसद द्वारा गठित नेशनल कमीशन फॉर सफाई कर्मचारी – जो कि एक वैधानिक बॉडी है – के मुताबिक हर पांच दिन में गटर में जाकर सफाई करने वालों में से एक आदमी की मौत हो रही है। बेजवाड़ा विल्सन कहते हैं कि 1 लाख 60 हज़ार महिलायें ड्राइ लैट्रिन साफ कर मैला ढो रही हैं। उनके काम करने के हालात सुधारने के लिये सरकारें कुछ नहीं करतीं। पिछले दो महीनों में 13 लोगों की मौत हुई है।

विल्सन कहते हैं कि पैर पकड़ने जैसी नेताओं की ये हरकतें बहुत ग़लत और असंवैधानिक हैं। यह बराबरी के फलसफे के खिलाफ हैं। विल्सन ने कहा कि राहुल गांधी हों या नरेंद्र मोदी दोनों को अम्बेडकर का अध्ययन करना चाहिये। “संविधान कहता है कि सब बराबर हैं लेकिन जब कोई इस तरह सफाईकर्मियों के पैर धोता है तो यह एक बिल्कुल ग़लत है। यह ड्रामेबाज़ी बन्द होनी चाहिये।” उनके मुताबिक यह दलितों को मैला उठाने के काम में लगाये रखने को ही प्रोत्साहित करने जैसा है।

विल्सन ने कहा, “इस तरह पैर धोने से वह (सफाईकर्मी) क्या सोचेंगे? यही ना कि मैला ढोना बड़ा महान काम है और हम इसी में लगे रहेंगे तो लोग मेरे पांव पकड़ोगे और मैं इसी में लगा रहूं।”

राहुल गांधी के अनुसूचित जाति के लोगों के घर जाने को भी बेजवाड़ा एक ढकोसला ही बताते हैं।

“हमने देखा है कि दलितों को गांवों में जहां उनके घर वहीं उन्हें सम्मान से नहीं रहने दिया जाता। अपने (ऊंची जातियों के) गांवों में उन्हें नहीं घुसने देते। यह सब खुद को महिमामंडित करने की कोशिश है। अगर दलितों से इतना प्यार है तो उन्हें अपने घर क्यों नहीं बुलाते। अपने साथ अपने घर में क्यों नहीं सुलाते। उनके लिये अच्छे घर क्यों नहीं बनाते?”

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram