राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे का विदेशों में काले धन का कारखाना : ‘कैरवां’ की रिपोर्ट

Desk


कौशल श्रॉफ नाम के एक खोजी पत्रकार ने अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से दस्तावेज़ जुटाकर डोभाल के बेटों के काले को सफेद करने और भारत के पैसे को बाहर भेजने के कारोबार का खुलासा कर दिया है.

-रवीश कुमार||

कौशल श्रॉफ नाम के एक खोजी पत्रकार ने अमेरिका, इंग्लैंड, सिंगापुर और केमैन आइलैंड से दस्तावेज़ जुटाकर डोभाल के बेटों के काले को सफेद करने और भारत के पैसे को बाहर भेजने के कारोबार का खुलासा कर दिया है. इस गोरखधंधे को हेज फंड और ऑफशोर कंपनियां कहते हैं. नोटबंदी के ठीक 13 दिन बाद 21 नवंबर, 2016 को टैक्स चौरी के गिरोहों के अड्डे केमैन आइलैंड में विवेक डोभाल अपनी कंपनी का पंजीकरण कराते हैं. ‘कैरवां’ के एडिटर विनोद होज़े ने ट्वीट किया है कि नोटबंदी के बाद विदेशी निवेश के तौर पर सबसे अधिक पैसा भारत में केमैन आइलैंड से आया था. 2017 में केमैन आइलैंड से आने वाले निवेश में 2,226 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के बेटे विवेक डोभाल भारत के नागरिक नहीं हैं, इंग्लैंड के नागरिक हैं, और सिंगापुर में रहते हैं, और GNY ASIA Fund के निदेशक हैं. केमैन आइलैंड, टैक्स चोरों के गिरोह का अड्डा माना जाता है. कौशल श्रॉफ ने लिखा है कि विवेक डोभाल यहीं ‘हेज फंड’ का धंधा करते हैं. BJP नेता और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे शौर्य और विवेक का बिज़नेस एक दूसरे से जुड़ा हुआ है.

2011 में अजित डोभाल ने एक रिपोर्ट लिखी थी कि टैक्स चोरी के अड्डों पर कार्रवाई करनी चाहिए और उनके ही बेटे की कंपनी का नाम हेज फंड और ऐसी जगहों पर कंपनी बनाकर कारोबार करने के मामले में सामने आता है. विवेक डोभाल की कंपनी के निदेशक हैं डॉन डब्ल्यू ईबैंक्स और मोहम्मद अलताफ मुस्लियाम. ईबैंक्स का नाम पैराडाइज़ पैपर्स में आ चुका है. ऐसी कई फर्ज़ी कंपनियों के लाखों दस्तावेज़ जब लीक हुए थे, तो ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने भारत में पैराडाइज़ पेपर्स के नाम से छापा था. उसके पहले इसी तरह फर्ज़ी कंपनियां बनाकर निवेश के नाम पर पैसे को इधर से उधर करने का गोरखधंधा पनामा पेपर्स के नाम से छपा था. पैराडाइस पेपर्स और पनामा पेपर्स दोनों में ही वॉकर्स कॉरपोरेट लिमिटेड का नाम है, जो विवेक डोभाल की कंपनी की संरक्षक कंपनी है.

‘कैरवां’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि विवेक डोभाल की कंपनी में काम करने वाले कई अधिकारी शौर्य डोभाल की कंपनी में भी काम करते हैं. इसका मतलब यह हुआ है कि कोई बहुत बड़ा फाइनेंशियल नेटवर्क चल रहा है. इनकी कंपनी का नाता सऊदी अरब के शाही खानदान की कंपनी से भी है. भारत की गरीब जनता को हिन्दू-मुस्लिम परोसकर सऊदी मुसलमानों की मदद से धंधा हो रहा है. वाह! मोदी जी, वाह!

हिन्दी के अख़बार ऐसी रिपोर्ट सात जन्म में नहीं कर सकते. उनके यहां संपादक चुनावी और जातीय समीकरण का विश्लेषण लिखने के लिए होते हैं. पत्रकारिता के हर छात्र को ‘कैरवां’ की इस रिपोर्ट का विशेष अध्ययन करना चाहिए. देखना चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और उनके बेटों का काला धन बनाने का कारखाना पकड़ने के लिए किन-किन दस्तावेज़ को जुटाया गया है. ऐसी ख़बरें किस सावधानी से लिखी जाती हैं. यह सब सीखने की बात है. हम जैसों के लिए भी. मैंने भी इस लेवल की एक भी रिपोर्ट नहीं की है.

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

“सफाई कर्मियों को बराबरी का दर्जा चाहिये, पैर धोना उनका अपमान है” बेज़वाड़ा विल्सन

-हृदयेश जोशी|| सफाई कर्मचारी आंदोलन के संस्थापक और रमन मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता बेजवाड़ा विल्सन का कहना है कि कुम्भ में सफाईकर्मियों के पैर धोना असंवैधानिक है। यह उन्हें तुच्छ दिखाकर खुद को महिमामंडित करने जैसा है। विल्सन पिछले कई दशकों से मैला उठाने के काम में लगे लोगों के बीच […]
Facebook
escort eskişehir - lidyabet - macbook servis - kabak koyu
%d bloggers like this: