/* */

गरीबी की नई परिभाषा पर योजना आयोग के सदस्यों ने ही खोला मोर्चा, कहा PMO ने दी थी मंजूरी

admin
Page Visited: 211
0 0
Read Time:6 Minute, 16 Second


योजना आयोग के दो सदस्यों अभिजीत सेन और मिहिर शाह ने सरकार द्वारा दी गई उस परिभाषा की मुखालफत शुरू कर दी है जिसमें एक टाइम के खाने पर 13 रुपए खर्च करने वालों को गरीबी रेखा से ऊपर माना गया है….

सरकार ने गरीबी की जो परिभाषा बनाई है उसके मुताबिक एक दिन के खाने पर 26 रूपये यानि एक टाइम के खाने पर 13 रुपए खर्च करने वाले लोग गरीब नहीं होते। योजना आयोग ने देश की सबसे बड़ी अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में आयोग ने कहा है कि खानपान पर शहरों में 965 रूपये प्रति महीना और गांव में 781 रूपये प्रति महीना खर्च करने वाले शख्स को गरीब नहीं माना जा सकता है।

योजना आयोग के मुताबिक शहर में हर रोज 32 रूपये और गांव में 26 रूपये खर्च करने वाला शख्स बीपीएल परिवारों को मिलने वाली सुविधा पाने का हकदार नहीं है। गरीबी की यह नई परिभाषा तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है।

योजना आयोग का मानना है कि हर रोज 5.5 रूपये का अनाज, 1.02 रूपये की दाल, 2.33 रूपये का दूध और 1.55 रूपये का खाद्य तेल एक इंसान को सेहतमंद रखने के लिए काफी है। रिपोर्ट यह भी कहती है कि सब्जियों पर हर रोज 1.95 रूपये, फल पर 44 पैसे, चीनी पर 70 पैसे और नमक-मसाले पर 78 पैसे खर्च करना उचित होगा, जबकि 1.51 रूपये दूसरे खाद्य पदार्थो पर खर्च हो सकते हैं। किचन में गैस या दूसरे ईधन पर रोजाना 3 रूपए 75 पैसे का खर्च प्रस्तावित है।

उधर आयोग के दो सदस्य अभिजीत सेन और मिहिर शाह हलफनामे के विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं।  यह बात भी सामने आ रही है कि योजना आयोग के इन आंकड़ों को प्रधानमंत्री कार्यालय से भी सहमति मिली थी। हालांकि अब आंकड़े में सुधार करने की बात भी कही जा रही है।

सेन और शाह ने मीडिया को जानकारी दी है कि योजना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के अहम सवालों के जवाब नहीं दिए। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों  की सूची में शामिल लाभार्थियों की संख्या सीमित क्यों है?  योजना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल का कोई साफ सुथरा जवाब नहीं दिया है कि बीपीएल सूची में आने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ लेने की सीमा क्यों तय की गई है। अभिजीत सेन के मुताबिक आयोग ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया है। वहीं, शाह ने भी लाभार्थियों की सीमा तय किए जाने पर ऐतराज जताया है।  कोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा बीपीएल लाभार्थियों के लिए कट ऑफ लगाए जाने की वजह पूछी थी। लाभार्थियों को बीपीएल कार्ड राज्य सरकारें जनगणना के आधार पर देती हैं। समाज के इस तबके के लिए कल्याणकारी योजनाओं में धन केंद्र मुहैया कराता है। लेकिन इसे योजना आयोग द्वारा तय कट ऑफ लाइन के आधार पर ही बीपीएल कार्ड धारकों को लाभ दिया जाता है।

ऐसे में अगर राज्य सरकार जनगणना के आधार पर तैयार बीपीएल सूची में आने वाले सभी लोगों को योजना का लाभ देना चाहे तो उसे सब्सिडी का भार खुद उठाना पड़ता है। योजना आयोग ने अपने हलफनामे में तेंडुलकर आयोग के ही आंकड़े दोहरा दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान सलाहकार खाद्य आयुक्त बिरज पटनायक का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूछे गए सवाल का ठोस जवाब न देकर योजना आयोग ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की है। पटनायक के मुताबिक योजना आयोग ने दो अहम बिंदुओं पर कोई जवाब नहीं दिया है। पहला बिंदु है, गरीबी रेखा का महंगाई के आधार पर संशोधन और दूसरा बीपीएल तय करते समय कैप का इस्तेमाल न करना।

अभिजीत सेन का कहना है, ‘यह बेहद अहम सवाल है। योजना आयोग बीपीएल सूची में भी सीमा निर्धारित करने के मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आया है। हमें इन सवालों के जवाब आज नहीं तो कल देने होंगे। अफसोस है कि समय से इन मुद्दों पर फैसला नहीं लिया जा सका ताकि कोर्ट को सूचित किया जा सके।’ पटनायक के मुताबिक इस चूक के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भी जिम्मेदार है क्योंकि वहां भी इस हलफनामे की जांच की गई थी। सूत्रों के मुताबिक योजना आयोग के सदस्यों के बीच हलफनामे को लेकर गंभीर मतभेद थे। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस पार्टी के वकीलों ने आयोग को अड़ने के लिए कहा था। वहीं, पीएमओ भी इसी रुख पर अड़ा रहा।

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

मनीष छोटे भाई, अन्ना बड़े भाई...। सब भाई-भाई, अब नहीं होगी कोई लड़ाई..।।

खबर है कि मनीष तिवारी के वकील ने अन्ना के वकील को जो लिखित माफी-नामा भेजा था उसे मंजूर कर […]
Visit Us On TwitterVisit Us On FacebookVisit Us On YoutubeVisit Us On LinkedinCheck Our FeedVisit Us On Instagram