पिछले दो साल में दस में दस लोकसभा उप चुनाव हारी है बीजेपी: गठबंधन की नकेल तो अब कसेगी मोदी पर..

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प्रशांत टंडन॥

कल तीन सीटो में हार के बाद बीजेपी का अब लोकसभा में आंकड़ा है 273. इसमे स्पीकर को न गिने तो 272 (स्पीकर बिल पास करने में वोट नहीं देता है – अपवाद के तौर पर सिर्फ तभी जब दोनों पक्ष को बराबर वोट मिल जायें). इसमें शत्रुघन सिन्हा और कीर्ति आज़ाद को भी न गिना जाये तो लोकसभा में बीजेपी की वास्तविक संख्या 271 है – यानि बहुमत से एक कम. 2014 में बीजेपी की अपनी संख्या 282 थी और NDA के 48 सहयोगी दलों को मिला कर ये संख्या 331 है.

2017-18 में बीजेपी सभी उपचुनाव हारी: नोटबंदी और तमाम वादों में खरा न उतारने के कारण बीजेपी एक के बाद एक सभी उप चुनाव हारती गई. 2017 मे हुये उपचुनाव में अमृतसर, श्रीनगर, मल्लापुरम और गुरदासपुर बीजेपी लड़ी और हारी. हार का सिलसिला 2018 में भी जारी है और बीजेपी गोरखपुर, फूलपुर, अररिया, अजमेर, अलवर और उलबेरिया (पश्चिम बंगाल) के उपचुनाव हार चुकी है. कल आए नतीजों में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर बीजेपी के हाथ से निकाल गई जबकि बिहार के अररिया में आजेडी का कब्जा बना हुआ है. गोरखपुर के बारे काफी कुछ लिखा ही जा चुका है.

गठबंधन की राजनीति तो अब शुरू होगी:

चंद्रबाबू नायडू और उद्धव ठाकरे ने ये स्थिति महीनो पहले भांप ली थी और तेवर दिखने शुरू कर दिये थे. उद्धव कभी खुद तो कभी शिव सेना सांसद संजय राऊत या अपने अखबार सामना के जरिये मोदी की हवा निकालते रहे हैं। नायडू ने तो अपने मंत्री सरकार से निकाल लिए है. ये दोनों गठबंधन की राजनीति के माहिर और पुराने खिलाड़ी हैं. अब मोदी को हर बिल लोकसभा में पास कराने के लिए विपक्ष से पहले अपने ही सहयोगी दलों से मानमुनव्वल और सौदेबाजी करनी होगी और अब इसकी कीमत भी चुकानी पड़ेगी.

मोदी वाजपेयी नहीं हैं कि 48 पार्टियों के गठबंधन को चला पाये. जिस हेकड़ी के साथ वो अब तक सरकार चलाते रहे हैं अब उसके लिए उनके पास संख्या बल नहीं है. देश में लोकतंत्र के सेहत के लिए मोदी जैसे नेता के उपर गठबंधन की नकेल ज़रूरी भी है.

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2 thoughts on “पिछले दो साल में दस में दस लोकसभा उप चुनाव हारी है बीजेपी: गठबंधन की नकेल तो अब कसेगी मोदी पर..

  1. सर स्पष्ट बहुमत का होना जरूरी है क्योंकि मोदी सरकार ने अबतक जितने भी निर्णय लिये हो देशहित मे लिए है यदि गठबंधन के किसी दल की कोई भी समस्या या मांग है तो उसे कैबिनेट की बैठक मे उठा सकते हैं अगर मीडिया के माध्यम से सरकार की अलोचना करना सही नही है अगर गठबंधन के सदस्यों अपनी मांगो के लिए सरकार पर नाजायज दबाव बनायेगे तो विपक्षी दलो को सरकार की बिना अलोचना का मौका मिलेगा ।जबकि इस समय देश को मजबूत सरकार की जरूरत है

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