Home देश जस्टिस लोया के पुत्र की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर दस अहम बिंदु..

जस्टिस लोया के पुत्र की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर दस अहम बिंदु..

मयंक सक्सेना॥

जस्टिस लोया के पुत्र की प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कुछ अहम बिंदु, जिन पर ध्यान दिया जाना ज़रूरी है…

1. अनुज लोया के परिवार से न तो कोई पूछताछ, न ही इंटेरोगेशन हुई है। अगर होती भी है या हुई भी है और उनको यक़ीन है कि उनके पिता की मृत्यु स्वभाविक थी, तो उनको इसके लिए प्रेस कांफ्रेंस करने की क्या ज़रूरत है? क्या पुलिस की पूछताछ (अगर होती है तो) में सहयोग करने की ज़िम्मेदारी, देश के सभी नागरिकों पर नहीं? क्या ये चुपचाप पूछताछ (जो हुई नहीं है और होगी कि नहीं, पता नहीं) में सहयोग कर के और अपना पक्ष रख के नहीं हो सकता था?

2. अनुज लोया को आखिर देश की सबसे महंगी और प्रतिष्ठित (जो बॉलीवुड के तमाम स्टार्स और कम्पनियों के विधिक काम देखती है…नाइक एंड नाइक ने उड़ता पंजाब का केस देखा था, अमिताभ बच्चन समेत तमाम का लीगल काम देखती है) लॉ फर्म के साझीदार अमित नाइक को ही क्यों बुलाना था? क्या वो उनका लीगल मामला (जो अभी है ही नहीं) देखने के लिए उनको कोई फीस दे रहे हैं…(क्योंकि वे बेहद महंगे हैं)..और अगर नहीं, तो नाइक एंड नाइक इस मामले में मुफ्त में दिलचस्पी क्यों ले रही है…या इसके पीछे कोई और है?

3. आखिर सिर्फ ये कहने के लिए, कि अनुज लोया (उनके परिवार के दो लोग, हत्या का शक जता चुके हैं) और उनके परिवार को जज लोया की मौत बिल्कुल स्वभाविक लगती है…अव्वल तो प्रेस कांफ्रेंस की ज़रूरत क्या थी…और अगर थी भी, तो उनको साथ में वकील…वो भी देश के सबसे महंगे वकीलों में से एक को, साथ बिठा कर, उससे प्रेस कांफ्रेंस करवाने की क्या ज़रूरत थी? क्या जज लोया होते, तो वह ऐसा ही करते?

4. अनुज लोया, जब बार-बार ये कहते हैं कि उनको अपने पिता की मौत पर कोई शक नहीं…और वो कोई जांच नहीं चाहते…तो ये अस्वाभाविक क्यों नहीं लगता…हम अमूमन कहते हैं कि अगर किसी को शक़ हो, तो हम जांच के लिए तैयार हैं…आखिर अनुज के ज़रिए कौन है, जो नहीं चाह रहा है कि इस मामले में कोई जांच हो?

5. अनुज लोया बार-बार सामने आ रहे हैं, आखिर ये बात उनके दादा, उनकी बुआ (जज लोया की बहन) और मां क्यों नहीं कह रहे…क्या बाकी लोगों की कोई राय नहीं या फिर उनको जानबूझ कर सामने नहीं लाया जा रहा है…क्योंकि दो लोग पहले ही हत्या का शक ज़ाहिर कर चुके हैं।

6. परिवार, दोबारा पोस्टमॉर्टम पर एतराज तो कर सकता है, लेकिन अगर ज़रूरी होता है, तो उसकी इच्छा को दरकिनार किया जाता है। फिर आखिर क्यो परिवार के एक सदस्य के ज़रिए, ये दबाव बनवाया जा रहा है…

7. आखिर जिस तरह अनुज लोया के बयान तो तरजीह दी जा रही है, उसी तरह जज लोया के पिता और उनकी बहन के बयान पर बात क्यों नहीं की जा रही है? कैरावेन के पत्रकार को खुद सम्पर्क कर के, वीडियो बयान दर्ज करने वाले पिता और बहन कहां गायब हैं? इस पर बात क्यों नहीं हो रही है….

8. नागपुर पुलिस जांच को आगे बढ़ाने की जगह सब कुछ सामान्य होने का बयान क्यों नहीं दे रही?

9. आखिर सर्वोच्च न्यायालय के जांच को लेकर अंतिम आदेश देने से पहले ही, इस मामले पर कोई अंतिम राय बनाने की लगातार कोशिश क्यों हो रही है। जांच होगी या नही, होनी चाहिए या नहीं…ये अदालत के अलावा कैसे तय हो जाना चाहिए??

10. बाकी हज को भूलिए, जज की बात कीजिए…सारी कवायद जज को भुलाने की है….हज जिनको करना है, वो कर आएंगे, वो आपके नियम और प्रतिक्रिया की बात नहीं करेंगे…अगर वाकई जज लोया की हत्या हुई है, तो सोचिए कि किनके हाथ में लोकतंत्र सौंप दिया है आपने….

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