मैन्युपुलेटेड खबरों के सहारे वाहवाही बटोरते मंत्रिगण..

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-गिरीश मालवीय||

सरकार के मंत्री किस तरह से खबरों का मैन्युपुलेशन कर वाहवाही बटोरते है यह इस खबर से समझिए पोस्ट थोड़ी लम्बी है लेकिन यह खबर मीडिया के रोल को समझने का एक अच्छा जरिया भी है.

आपने भी कही न कही उच्च शिक्षा के क्षेत्र 80 हजार शिक्षक पकड़ाए वाली खबर सुनी होगी ,पहली नजर में ही संदेह उत्पन्न होता हैं कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पहले ही तो शिक्षक नही है वहाँ 80 हजार फर्जी शिक्षक ?

यह खबर समाचार एजेंसी भाषा ने जारी की है बड़े पेपर्स ने भी इसे बिना सोचे समझे छाप दिया है पहले खबर पढ़िए.

‘भाषा : मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आधार के जरिये देश के विभिन्न कालेजों और विश्वविद्यालयों में करीब 80 हजार ऐसे शिक्षकों की पहचान की है जिनका दरअसल कोई वजूद ही नहीं है।

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने हालांकि स्पष्ट किया कि इनमें से कोई भी शिक्षक किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय से नहीं है.

जावडेकर ने एक कार्यक्रम में कहा कि कुछ ऐसे फर्जी शिक्षक हैं जो छद्म उपस्थिति का तरीका अपनाते हैं और कई जगहों पर पूर्णकालिक पढ़ा रहे हैं। आधार शुरू होने के बाद, ऐसे 80 हजार शिक्षकों की पहचान हुई है और उनके खिलाफ कार्वाई पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने कहा, किसी केन्द्रीय विविद्यालय में फर्जी शिक्षकों की पहचान नहीं हुई है। लेकिन कुछ राज्य एवं निजी विविद्यालयों में ऐसे शिक्षक हैं।.त्रालय ने सभी विविद्यालयों से सभी कर्मचारियों और छात्रों से आधार संख्या मांगने के लिए कहा है ताकि डुप्लीकेशन नहीं हो। हालांकि डेटा लीक होने के बारे में चिंता जताई गई है.

इस खबर को पढ़ कर यह लगता है कि मंत्री जी के कथनानुसार ‘कुछ ऐसे फर्जी शिक्षक हैं जो छद्म उपस्थिति का तरीका अपनाते हैं और एक साथ कई जगहों पर पूर्णकालिक पढ़ा रहे हैं’ ओर इस तरह के 80 हजार केस पकड़ाए हैं, यानी सारी गलती इस तरह के शिक्षकों की ही है, ओर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.

आप को लगेगा कि मंत्री जी ने क्या चोर पकड़े हैं !
अब असली खबर क्या है यह समझिए यह खबर लाइव मिंट अखबार के हवाले से सत्याग्रह ने छापी हैं
‘देश के 1,30,000 कॉलेज शिक्षक अचानक ‘नदारद’ हो गए हैं. लाइव मिंट की ख़बर के मुताबिक़ ऐसा आधार के जरिए इनकी पहचान की पुष्टि कराए जाने के बाद यह ख़ुलासा हुआ है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय 2017 में सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से कहा था कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों की जानकारी देते वक़्त उनका 12 अंकों का आधार नंबर भी आवश्यक रूप से उपलब्ध कराएं. इसी प्रक्रिया के दौरान यह पता चला कि देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत बताए जा रहे 1,30,000 शिक्षक असल में हैं ही नहीं.

ख़बर के मुताबिक इस क़वायद से यह भी सामने आया है कि वास्तव में देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शिक्षकों की कमी उससे कहीं ज़्यादा है जितनी मानी जा रही थी. फ़िलहाल सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों में 14 लाख के क़रीब शिक्षकों की संख्या बताई जाती है. लेकिन आधार से पहचान पुष्टिकरण के बाद इसमें क़रीब 10 फ़ीसदी की कमी और आ गई है. इस प्रक्रिया से जुड़े मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक शीर्ष सूत्र ने इस आंकड़े की पुष्टि की है.

नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया, ‘अब भी कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी ऐसे हैं जिन्होंने अपने यहां कार्यरत शिक्षकों की जानकारी उनके आधार नंबर सहित उपलब्ध नहीं कराई है. ऐसे में संभावना है कि अभी ‘फ़र्ज़ी शिक्षकाें’ का आंकड़ा और बढ़ सकता है. हालांकि इससे यह साफ़ हो गया है कि तमाम संस्थान विस्तार और नए कोर्स शुरू करने के मक़सद से ज़रूरी नियामक मंज़ूरियां हासिल करने के लिए कार्यरत शिक्षकों का ग़लत आंकड़ा पेश कर रहे हैं.’

यानी क्या हो रहा है आप समझे ? दरअसल पूरी गलती मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ही पकड़ में आई है वह किस तरह से ऐसी यूनिवर्सिटी को मान्यता दे रहा हैं जो इस स्तर का घोटाला कर रहे हैं.

लेकिन जावड़ेकर साहब ने इसमें एक ’80 हजार शिक्षक एक साथ कई जगह पढ़ा रहे हैं’ का अलग एंगल डाल कर वाहवाही लूटने की मूर्खता पूर्ण कोशिश की है.

मीडिया इतना मूर्ख हो गया है कि ये सवाल करने के बजाए मानव संसाधन मंत्री की बात पर तालियां बजवा रहा है वह यह भी नही पूछ रहा कि यदि 80 हजार लोग कही मौजूद ही नही है तो इनकी मोनिटरिंग करने वाला आपका मंत्रालय क्या कर रहा हैं, इसको एप्रूव कौन कर रहा था,अब तक आपका मंत्रालय क्या कर रहा था, यदि इतने शिक्षक फर्जी है तो देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र मे शिक्षकों की कमी कितनी भयावह रूप ले चुकी है इसका जिम्मेदार कौन है ?

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