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हिमांशु कुमार॥

2 जी मामले में अदालत ने जिन आरोपियों को बरी किया है

उनमें डीएमके पार्टी के तत्कालीन मंत्री ए राजा और तमिलनाडु के भूतपूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि की बेटी कनिमोझी मुख्य हैं

इसके अलावा बचने वालों में पूंजीपति अनिल अम्बानी, रूईया वगैरह भी शामिल हैं

ये लोग जो बरी हुए हैं वे मोदी सरकार की मदद से बरी हुए हैं

मोदी सरकार को इन लोगों को सज़ा दिलाने में कोई भी फायदा नहीं था

बल्कि मोदी सरकार को इन लोगों के जेल जाने से बड़ा नुकसान हो सकता था

इन्हीं पूंजीपतियों के पैसे से चुनाव जीता जाता है और सत्ता मिलती है

इसलिए भाजपा द्वारा पूंजीपतियों को तो बचाना ही था क्योंकि वह तो सरकार के माई बाप हैं

दूसरी तरफ इस मामले का जितना भी फायदा भाजपा उठा सकती थी

वह भाजपा पहले ही शोर मचा कर सत्ता पाकर उठा चुकी थी

अब अगर डीएमके पार्टी ये दो नेता जेल चले भी जाते तो भाजपा को उससे कोई भी फायदा अब मिलने वाला नहीं था

इसलिए सीबीआई जो प्रधानमंत्री के मातहत काम करती है

उसने इस केस में आरोपियों के खिलाफ अदालत को सबूत देने बंद कर दिए

इस तरह अदालत को मजबूरन आरोपियों को बरी करना पड़ा

अदालत ने सीबीआई को इस बात के लिए डांट भी लगाई है

साफ़ तौर पर मोदी सरकार ने इन सभी को जान बूझ कर बचाया है

अब आप ध्यान से देखते रहिएगा कि तामिलनाडू में अगले विधान सभा चुनाव भाजपा डीएमके पार्टी के साथ मिल कर लडेगी

इसी डील के साथ मोदी सरकार ने डीएमके के दोनों नेताओं को इस मामले में बचाया है

हम सब जानते हैं कि तामिलनाडू में बारी बारी डीएमके और एआइडीएमके की सरकार बनती है

अभी वहाँ एआइडीएमके की सरकार है

यानी अबकी बार सरकार बनाने की बारी डीएमके की है

इसलिए मोदी सरकार ने डीएमके के साथ यह डील करी है

भाजपा दक्षिण भारत में हमेशा कमजोर ही रही है

दक्षिण भारत में अपनी सरकार बनाने के लिए भाजपा केरल में बम बनाना और विरोधी कार्यकर्ताओं की हत्या करने में लगी रहती है

लेकिन भाजपा की दाल दक्षिण भारत में कभी नहीं गली

डीएमके पार्टी के साथ इस डील के बाद भाजपा की डीएमके के साथ सरकार में शामिल होने की संभावना बन गई है

जो लोग यह समझ रहे हैं कि भाजपा भ्रष्टाचार दूर करेगी

उन्हें बड़ी निराशा होगी क्योंकि भाजपा की लड़ाई सिर्फ सत्ता के लिए है

भाजपा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने लगी तो उसे कभी सत्ता नहीं मिलेगी

हम भ्रष्टन के
भ्रष्ट हमारे

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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