मोदी ने राहुल को दिया क्रिस्मिस पर नायाब तोहफ़ा..

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2 जी पर आये थे – 2 जी पर ही जायेंगे..

-प्रशांत टण्डन॥

2014 में मोदी को मिला 31% वोट पूरा धार्मिक उन्माद या हिंदू राष्ट्र के लिये नही था. अहमदाबाद से दिल्ली के सफर का टिकट उन्हे अन्ना हज़ारे ने दिया था. कल  स्पेशल जज ओ.पी. सैनी ने वो टिकट फाड़ दिया. इस सरकार के भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने की प्रतिबद्धता को देखे तो एक भी बड़ा अदमी जेल नही गया. हॉ छोटे व्यापारियों और राजनीतिक विरोधियों पर ही सीबीआई, इनकम टैक्स, ईडी को छोड़ा गया. इसके उलट बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को संस्थागत किया गया. आलम तो ये है कि कर्ज़ में डूबे अडानी ग्रुप ने कर्ज में डूबी दूसरी कंपनी – अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रा को 19 हज़ार करोड़ खरीद लिया. ये सौदा जनता के साथ धोखा है क्योकि दोनो ही कंपनियो पर बैक खातेदारो का हाज़ारो करोड़ लगा हुआ है. ये एक ऐसी सरकार की निशानी है जो अपने वोटरों को ठेंगे पर रखती है.

मोदी का चौथा सेल्फ गोल:

तामिलनाडू में राजनीतिक फायदे के लिये मोदी ने अपनी सरकार की साख को दांव पर लगा दिया है. 2 जी केस सरकार जानबूझ कर हारी है. जज ने भी कहा है कि सरकारी पक्ष ने साक्ष्य देने और अभियुक्तों को धेरने में ढिलाई बरती. मोदी को अपनी भाषण देने की कला पर बहुत भरोसा है और वो जनता को मूर्ख समझते है. उन्होने अपने आपको ये समझा लिया है कि वे कुछ भी करे – चार भाषण देंगे और जनता को वो जो बर्गलाने में कामयाब हो जायेंगे. अभी तक ऐसा ही होता भी आया है – लेकिन आगे भी होगा ऐसा नही है.
नोटबंदी, जीएसटी, गुजरात चुनाव में पाकिस्तानी साजिश बताने के बाद ये उनका चौथा बड़ा सेल्फ गोल है. 2019 में वो अब इसी स्कोर के साथ मैदान में होंगे. आर्थिक कठिनाइयॉ बढ़ी है – आगे और भी मुश्किल भरा समय है. अभी गांव प्रभावित हुये है – जो गुजरात के नतीजो में दिखा भी. अब शहरो की बारी है.

राहुल गांधी को क्रिसमस गिफ्ट:

राहुल गांधी के अध्यक्ष बनते ही गुजरात ने कांग्रेस को बड़ी राहत मिली. अब यूपीए सरकार पर सबसे बड़े आरोप को मोदी ने हटा लिया है. कांग्रेस के नेता जनता के बीच उनकी सरकार के दौरान उजागर हुये घोटालो का जवाब नही दे पाते थे. मोदी ने उनका रास्ता आसान कर दिया है. राहुल गांधी की कांग्रेस इस मौके को कैसे भुनाती है इसी पर निर्भर करता है कि 2019 में उनकी दावेदारी कितनी मज़बूत रहेगी.

कांग्रेस को अब पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना होगा. अभी.

(प्रशांत टण्डन वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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