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राडिया फ़ोन टेप और 2G घोटाला..

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-गिरीश मालवीय
2 जी घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया कि कोई घोटाला था ही नही कांग्रेसीयो का दिल यह सुनकर बल्लियों उछलने लगा भाजपाई खेमा में अरुण जेटली के बयान से सांस में सांस आयी कि इस फैसले को कांग्रेस अपनी बेगुनाही का सबूत न माने ‘यानी पिक्चर अभी बाकि हैं मेरे दोस्त’.

ओर पत्रकारों को एक नया काम मिल गया अब वह इस नूरा कुश्ती की खबरे खूब चटखारे लेकर के सुनाएंगे.

पिछले दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री रहे मधु कौड़ा को विशेष सीबीआई जज ने सजा सुनाई आप कहेंगे कि इस पोस्ट में मधुकोड़ा क्या कर रहे है पर बहुत गहरा संबंध है जिसके बारे में बड़े से बड़े पत्रकार भी बात करने से बचते हैं दरअसल 2 जी घोटाला ओर मधुकोड़ा का कोयला खान से संबंधित घोटाला एक ही महिला के टेलीफोन टेपिंग से संबंधित है जिसका नाम है नीरा राडिया.

मधुकोड़ा का मामला भी तभी प्रकाश में आया जब नीरा राडिया के टेप पकड़ में आये और 2 जी मामला भी तभी खुला जब नीरा राडिया की बातचीत सार्वजनिक हो गयीं, एक मे सजा हुई क्योंकि मधुकोड़ा का कोई माईबाप नही था और दूसरे केस में विश्व का बहुत बड़ा घोटाला होने के बाद भी कोई आरोपी साबित नही हो पाया.

ऐसा क्यों हुआ अभी इसकी बहुत सी थ्योरी सामने आएंगी लेकिन जिसे आप 2 जी घोटाला कहते है वह दरअसल हमारी सड़ चुकी नोकरशाही, कमीनी राजनीति और बिक चुकी हुई पत्रकारिता का ऐसा कॉकटेल है जिसकी विश्व मे दूसरी मिसाल मिलना मुश्किल है

आधुनिक समय मे बड़े शहरों की पीआर एजेंसीया भड़वागिरी का दूसरा ओर सभ्य नाम है.

कहते हैं कि भारत की सबसे बड़ी फिक्सर वूमेन या लाइजनर नीरा राडिया एक तरह की पी आर एजेंसी ही चलाती थी. नीरा राडिया के क्लाइंट में टाटा ग्रुप की कम्पनियों, मुकेश अंबानी के रिलायंस ग्रुप की कम्पनियों, स्टार न्यूज, एनडीटीवी,नईदुनिया, न्यूज एक्स, यूनीटेक,स्वान, वेदान्ता, डी.बी., रेमंड, चैनल वी,इ बे, हाल,एअरबस, सिंगापुर एअरलाइंस, सीआईआई, कोटक महिन्द्रा, सहारा एअरलाइंस सहित बहुत सी कम्पनिया शामिल थी.

नीरा ने लाइजनिंग की अपनी लगभग आधा दर्जन कम्पनियां बना रखी थीं जिसमें पूर्व उर्जा सचिव व ट्राई अध्यक्ष प्रदीप बैजल, पूर्व वित्त सचिव सी.एम वासुदेव, पूर्व एअरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया चेयरमैन एस.के.नरूला, पूर्व फारेन इन्वेस्टमेंट बोर्ड चेयरमैन अजय दूआ आदि भारी भरकम नौकरशाह मोटे पगार पर सलाहकार , निदेशक की नौकरी कर रहे थे नीरा के ग्रुप में बरखा दत्त, वीर सांघवी जैसे लगभग आधा दर्जन से अधिक तथाकथित बड़े पत्रकार और इनके बड़े बड़े मीडिया संस्थानों के मालिक शामिल थे.

कहा जाता है कि ए राजा को दूरसंचार मंत्री बनवाने में भी राडिया का बड़ा योगदान रहा राडिया राजा की करीबी थीं और तीन टेलीकॉम ऑपरेटरों यूनिटेक, स्वान और डाटाकॉम को 2 जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिलवाने के प्रयास में लगी थीं। राडिया और कनिमोझी (करूणानिधि की बेटी) ने पत्रकार वीर संघवी और बरखा दत्त के मार्फत राजा को दूरसंचार मंत्री बनवाने के लिए बातचीत की थीं और राडिया ने ही राजा को 24 मई 2009 को फोन करके सबसे पहले दूरसंचार मंत्री बनाए जाने की सूचना दी.

टेपों से पता चलता है कि दयानिधि मारन केन्द्रीय कैबिनेट में जगह पाने के लिए किस तरह प्रयासरत थे। वे करूणानिधि के रिश्तेदारों के जरिये दबाव बना रहे थे। इतना ही नहीं टेप में राडिया यह भी बताती हैं, मारन ने मंत्री बनने के लिए करूणानिधि की एक पत्नी (स्टालिन की मां) को 600 करोड़ रूपए दिए थे.

नीरा राडिया के यह टेप कितने खतरनाक थे यह इस बात से समझ लीजिए कि टाटा ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी जिसमें मांग की गई थी कि कारपोरेट लॉबिस्ट राडिया के टेप के प्रकाशन पर रोक लगाई जाए और इसे लीक करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए,

आप कहेंगे कि कांग्रेस तो वैसे ही भ्रष्ट लोगो की पार्टी है तो जान लीजिए नीरा राडिया की पैठ भाजपा में भी उतनी ही थी जितनी कांग्रेस पार्टी में थी। जब बंगाल में टाटा नैनो फैक्टरी को लेकर बवाल मचा था तो जुगाड़ कर यह फैक्टरी नीरा ही मोदी जी के लिए गुजरात लाई थी
अटल बिहारी वाजपेयी के दत्तक दामाद रंजन भट्टाचार्य और वाजपेयी सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री रहे अनन्त कुमार नीरा राडिया के दोस्त थे
कहते हैं कि उमा भारती के गुरू और पंजावुर के स्वामी जी के दरबार में तो अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनकी फोटो भी मौजूद है। अपने ऐसे ही सम्पर्कों का फायदा उठाकर 1996 में नीरा ने बहुत बड़ा फॉर्म हाउस दक्षिण दिल्ली में खरीद लिया था ओर यही से असली जनसंपर्क की पार्टियां दी जाती थीं.

आगे कभी ओर लिखेंगे पर आप इतना जान लीजिए कि इस राडिया पुराण के हरि भी अनंत हैं और उनकी कथाए भी अनन्त है और इस 2 जी घोटाला की जितनी तहे अभी खुलनी चाहिए थी उतनी नही खुली क्योंकि अगर खुलती तोक्या भाजपाई , क्या कांग्रेसी, क्या नोकरशाही , क्या बड़े उद्योगपति ओर क्या नामचीन पत्रकार सब के सब नंगे हो जाते.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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