Home सुप्रीम कोर्ट को आख़िर आपत्ति क्यों.?

सुप्रीम कोर्ट को आख़िर आपत्ति क्यों.?

-ओम थानवी॥

भाजपा जीतेगी, सब एग्ज़िट पोल कहते हैं। सही ही होगा। मरज़ी माफ़िक़ चुनाव का समय ख़ुद तय करने की सुविधा पाकर, अरबों की चुनावकालीन ख़ैरात और इतना हिंदू-मुसलमान, भारत-पाक, रफ़ीक-पटेल, ऊँच-नीच, रोरो-फ़ैरी, सी-प्लेन के चमत्कारों के बाद भी भाजपा न जीते तो हैरानी होगी।

लेकिन सर्वोच्च अदालत को मतों की पर्चियाँ गिनवाने पर आपत्ति क्यों है? मशीन से मतदान हो मगर साथ में मत की पर्ची का छपा रेकार्ड रखने की व्यवस्था इसीलिए की गई थी कि कुछ लोग मशीन में गोलमाल की गुंजाइश देखते हैं।

ऐसे में चुनाव को हर तरह के झूठे-सच्चे संशय से दूर रखने की ग़रज़ से मशीन के साथ पर्चियों की गिनती करवा लेने में हर्ज़ क्या था? मशीन में चार वोट, उसकी चार ही पर्चियाँ। न शक, झगड़ा, न टंटा! पर्ची है, पर गिनेंगे नहीं। तो शंकाएँ तो वहीं की वहीं रहेंगी न? हारा हुआ भी कहेगा मैं तो जीत रहा था! जिस शंका को प्रमाण से निर्मूल किया जा सकता है, मतगणना में नहीं करेंगे तो कब करेंगे?

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