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मनमोहन सिंह ने नरेन्द्र मोदी से कहा – राजनीति करने का समय पूरा हुआ, आइए, अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण करें..

-संजय कुमार सिंह||

नोटबंदी: मनमोहन सिंह ने नरेन्द्र मोदी से कहा – राजनीति करने का समय पूरा हुआ, आइए, अर्थव्यवस्था का पुनर्निर्माण करें.

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नोटबंदी की पहली बरसी पर दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि नोटबंदी का प्रभाव समाज और कारोबार के कमजोर वर्ग पर अभी तक बहुत ज्यादा नुकसानदेह रहा है और यह इतना है कि कोई आर्थिक इंडिकेटर इसका खुलासा नहीं कर सकता है।

ब्लूमबर्ग क्विन्ट के प्रवीण चक्रवर्ती को दिए एक दुर्लभ इंटरव्यू में मनमोहन सिंह ने छोटे और मध्यम उपक्रमों के क्षेत्र में नौकरी जाने पर चिन्ता जताई है और इस बात पर जोर दिया है कि समाज में फैली गैरबराबरी पर इसका प्रभाव परेशान करने वाला हो सकता है।

बढ़ती गैरबराबरी आर्थिक विकास की हमारी प्रकृति के लिए हमेशा ही खतरा रही है। नोटबंदी से संभव है इस तरह की गैरबराबरी में वृदधि हुई हो जिसे ठीक करना भविष्य में और मुश्किल होगा। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में गैर बराबरी दूसरे देशों की तुलना में ज्यादा बड़ी समाजिक समस्या साबित हो सकती है।

मोदी सरकार ने अक्सर यह स्पष्ट किया है कि नोटबंदी नकद आधारित लेन-देन को कम करने की कोशिश थी जिससे अर्थव्यवस्था को डिजिटल भुगतान की ओर ले जाया जा सके। मनमोहन सिंह मानते हैं कि ये मकसद “प्रशंसनीय प्रयास” हैं। पर वे आगे कहते हैं, “हमें अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को भी ठीक करने की जरूरत है। यह अस्पष्ट है कि नकदहीन अर्थव्यवस्था के ये लक्ष्य वास्तव में छोटे उपक्रमों को बड़ा बनने या बिक्री में कार्यकुशलता हासिल करने में सहायता करेंगे। इसे हमारी प्राथमिकता होना चाहिए।”

पूर्व प्रधानमंत्री जाने माने अर्थशास्त्री भी हैं, उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप देने की आवश्यकता भी बताई। देश की विशाल अनौपचारिक अर्थव्यवस्था जो एक अनुमान के अनुसार जीडीपी का 40 प्रतिशत है, को नोटबंदी और जीएसटी के जरिए टैक्स के दायरे में कोशिश पर मनमोहन सिंह ने कहा, “साधन साध्य की ही तरह महत्वपूर्ण है” और लक्ष्य जबरदस्ती या दबाव से नहीं हासिल किए जा सकते हैं जिसका असर उल्टा होगा।

औपचारिक क्षेत्र जो मूल्य तैयार करेगा उसे आय, संपदा या खपत प्रभाव के रूप में कैप्चर किया जाएगा। इसलिए हमें औपचारिक क्षेत्र में अर्थव्यवस्था के बारे में जनरलाइजेशन (सामान्यीकरण) तथा समूचे क्षेत्र के बारे में नैतिक निर्णयों से बचना चाहिए।
नोटबंदी को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका की भी पिछले साल के दौरान अच्छी-खासी निन्दा निन्दा की गई है। श्री सिंह ने नोटबंदी को “एक संस्थान के रूप में आरबीआई की स्वतंत्रता और साख पर एक हमला” कहा और अन्य क्षेत्रों में भी “संस्थाओं के क्षरण की डरावनी संस्कृति” कहा।
मनमोहन सिंह ने अपने उत्तराधिकारी और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सहमति वाले नीतिगत समाधानों की दिशा में काम करने के लिए कहा ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था का पुनर्निमाण किया जा सके। उन्होंने कहा, मैं गंभीरता से मानता हूं कि नोटबंदी पर राजनीति का समय पूरा हो गया। अब समय है कि प्रधानमंत्री उदारता अपनी भारी भूल स्वीकार करें और देश की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के लिए सबसे सहायता मांगें।
पूरा इंटरव्यू आप ब्लूमबर्ग के साइट पर देख सकते हैं।

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