इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे में पहले पेज पर फोर्टिस के डॉक्टर अशोक सेठ..

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-संजय कुमार सिंह||

इंडियन एक्सप्रेस ने अपने खुलासे में पहले पेज पर फोर्टिस के डॉक्टर अशोक सेठ का मामला भी छापा है। शीर्षक में ही कहा गया है कि डॉ. सेठ अपने मरीजों के लिए जिस कंपनी के स्टेंट का उपयोग करते थे उन्हें उसके शेयर मिले थे। इस खबर के साथ डॉ अशोक सेठ की फोटो है और कैप्शन लगा है नो रांग डुइंग, क्लेम्स कार्डियोलॉजिस्ट अशोक सेठ।

यानी कोई गलत काम नहीं, हृदय रोग विशेषज्ञ अशोक सेठ ने दावा किया। ऋतु सरीन की इस खबर के मुताबिक जांचे गए दस्तावेजों के एक सेट में यह हितों के संभावित टकराव के रूप में सामने आता है। इंडियन एक्सप्रेस ने रिकार्ड की जांच के बाद लिखा है कि पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित, फोर्टिस-एस्कॉर्ट्स के चेयरमैन डॉ अशोक सेठ को 2004 में सिंगापुर आधार वाली एक कंपनी जो स्टेंट बनाती है, ने पूंजी बाजार में जाने से पहले अपने शेयर दिए थे। बाद में डॉ. सेठ ने अपने मरीजों को यही स्टेंट लगवाने की सिफारिश की और प्राप्त शेयरों से लाभ कमाया। कंपनी का नाम बायोसेंसर्स इंटरनेशनल ग्रुप है। यह इंटरवेंशन कार्डियोलॉजी और क्रिटिकल केयर प्रक्रियाओं के लिए चिकित्सा उपकरणों का निर्माण और उनका विपणन करती है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, बायोसेंसर्स इंटरनेशनल ग्रुप लिमिटेड का निगमन बरमुडा में 28 मई 1998 को हुआ था और यह सिंगापुर में पंजीकृत है।

इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि संपर्क करने पर डॉ.सेठ ने बताया कि उन्होंने तीन साल तक बायोसेंसर्स के शेयर अपने पास रखे और 54 लाख रुपए का मुनाफा कमाकर बेच दिया। डॉ. सेठ का दावा है कि जब तक कंपनी के शेयर उनके पास रहे उन्होंने इसका उपयोग उनका दावा है कि अपने टैक्स रिटर्न में उन्होंने इसकी घोषणा की है। अखबार की खबर में हितों के टकराव आदि का विस्तार से विवरण है। जब मेरे पास कंपनी के शेयर थे (कंपनी ने आवंटित 2004 में किए थे पर इन्होंने लिया अप्रैल 2013 में पर उसी कीमत में, ठीक से समझने के लिए एक्सप्रेस की पूरी खबर देखें) तब मैंने सिर्फ सिर्फ सात बायोमेट्रिक्स स्टेंट लगाए। डॉ. सेठ का कहना है कि उनके पास कंपनी के शेयरों की संख्या बहुत मामूली थी पर इसे हितों का टकराव माना जा सकता है इसलिए जब मेरे पास शेयर थे तब मैंने बायोसेंसर्स के उत्पादों का उपयोग नहीं किया।

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