प्रसार भारती को नए चेयरमैन की ज़रूरत, चार अन्य शीर्ष पदों पर जल्द होगी नियुक्तियां..

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पब्लिक ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती के चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश का कार्यकाल खत्म हो गया है और उन्हें बीते शुक्रवार संस्था ने विदाई दी. वे पिछले तीन सालों से संगठन का नेतृत्व कर रहे थे.

हालांकि उनके जाने के बाद अब दो महत्वपूर्ण पद और खाली होने वाले हैं. यानी अब कुल पांच पदों पर केंद्र सरकार को जल्द से जल्द नियुक्तियां करनी होंगी. इनमें से दो सदस्यों का कार्यकाल तो अगले महीने ही खत्म होने वाला है. इन सदस्यों के नाम हैं अनूप जलोटा और मुजफ्फर अली, जोकि बोर्ड के अंशकालिक सदस्य हैं.

इसके अतिरिक्त शशि शेखर वेम्पती के सीईओ पद बनने के बाद से उनकी सीट भी रिक्त है. उन्हें जून में इस पद की कमान सौंपी गई थीं. वहीं एक अन्य पद एससी पांडा का भी रिक्त है, जो प्रसार भारती के सदस्य (personnel) थे और इस साल फरवरी में रिटायर हुए थे.

हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो पिछले 6 महीनों में प्रसार भारती ने पदों पर नियुक्ति के लिए दो बार विज्ञापन दिए थे, लेकिन उन्हें अभी तक कोई सही कैंडिडेट नहीं मिल पाया है.

गौरतलब है कि प्रसार भारती बोर्ड में एक चेयरमैन, एक एग्जिक्यूटिव मेंबर (चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर), एक मेंबर (फाइनेंस), एक मेंबर (personnel), 6 पार्ट टाइम मेंबर (कर्मियों), सूचना-प्रसारण मंत्रालय का अधिकारी (representative) के अलावा ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के डायरेक्टर जनरल शामिल होते हैं.

फिलहाल यह संभावना है कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की अध्यक्षता वाली एक समिति जल्द ही नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित कर सकती हैं.

वहीं पिछले हफ्ते हुई अपनी अंतिम बोर्ड की बैठक में प्रसार भारती के पूर्व चेयरमैन ए. सूर्य प्रकाश ने संगठन की स्वायत्तता और इसके संचालन को और बेहतर बनाने पर पर जोर दिया था.

बता दें कि प्रसार भारती के चेयरमैन पद पर वरिष्ठ पत्रकार ए. सूर्यप्रकाश की नियुक्ति तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर तीन साल के लिए 28 अक्टूबर, 2014 को हुई थी, जिसके चलते 28 अक्टूबर, 2017 को उनका कार्यकाल खत्म हो गया है. फिलहाल प्रसार भारती के अगले चेयरमैन कौन होंगे, इसकी न तो अभी कोई आधिकारिक घोषणा की गई है और न ही कोई जानकारी मिल पाई है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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