Home मीडिया इन पत्रकारों को घास छीलने के काम पर लगा दीजिये..

इन पत्रकारों को घास छीलने के काम पर लगा दीजिये..

-गिरीश मालवीय||

आज कल के इन पत्रकारों को घास छीलने के काम पर लगा दीजिये क्योंकि यह पत्रकार पत्रकारिता छोड़कर मोदी के दिवाली मिलन समारोह मे सेल्फी विथ मोदी खींचने में व्यस्त है, सरकार को आइना दिखाने का काम इनसे नही हो पायेगा क्योंकि इनके ऊपर सकारात्मक पत्रकारिता और नो निगेटिव न्यूज़ का भूत चढ़ा हुआ है पराड़कर ओर गणेश शंकर विद्यार्थी वाली पत्रकारिता इनसे तो नही हो पायेगी.

यहाँ मोदी जी और मोदी जी के मंत्री रोज नया शगूफा छोड़ देते हैं अब यह कह रहे हैं कि पांच साल यानी 2022 में हम 83 हजार किलोमीटर रोड बना देंगे , ओर इसे भारतमाला परियोजना का नाम दिया गया है यह सुन कर मीडिया लहालोट हो रहा है, लेकिन कोई इनसे ये नही पूछ रहा कि भाई आपने जो सागरमाला परियोजना लायी थी उसका क्या हुआ ?

आज से दो साल पहले इसी अक्टूबर में केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने एक अहम ऐलान किया था. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना सागरमाला पर 70 हजार करोड़ रु खर्च करेगी. सागरमाला का मकसद भारत के शिपिंग क्षेत्र की तस्वीर बदलना था. इसके तहत बंदरगाहों को आधुनिक बनाया जाना था और उनके इर्द-गिर्द विशेष आर्थिक क्षेत्र विकसित किये जाने थे. जिससे 50 लाख नौकरियों का सृजन होगा आज किसी पत्रकार ने पूछा कि वो 50 लाख नॉकरिया कहा है ? 70 हजार करोड़ का क्या किया ? कितने बंदरगाह आपने विकसित किये कि सब निल बटे सन्नाटा ही है?

गडकरी जी ने दो साल पहले अक्टूबर में कहा था कि ‘हम आज हर दिन 14 किलोमीटर सड़क बना रहे हैं और उम्मीद है मार्च तक 30 किलोमीटर सड़कें प्रतिदिन बनने लगेंगे , कहा बनी है 30 किलोमीटर सड़के प्रतिदिन जरा बताइये ? बीबीसी बता रहा है कि 16- 17 में दिसम्बर तक 4699 किलोमीटर सड़क बनी है यानी अभी भी लगभग वही रफ्तार है.

मीडिया सरकार के खिलाफ एक स्थायी विपक्ष होता है जो आज चरणवन्दना में ही अपनी सदगति खोज रहा है , आज के कथित पत्रकार का आदर्श यह हो गया है कि सत्ताधारी दल के नेताओं से अच्छे संबंध बना ले, उनके लिये दलाली का कार्य करे इसे ही आज सफल पत्रकार का लक्षण समझा जा रहा है.

ओर यह सरकार कभी सागरमाला, कभी भारतमाला करके अर्थव्यवस्था को ही चन्दन की माला पहना रही है और आज का पत्रकार मोदी के साथ सेल्फी खीचने को जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि समझ रहा है.

{गिरीश मालवीय की फेसबुक वाल से}

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