दो लाख करोड़ के घोटाले पर चुप्पी का कोई तो कारण होगा ही..

admin
0 0
Read Time:11 Minute, 49 Second

-तमन्ना पंकज||

कुछ साल पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच ने कहा था कि ‘‘भ्रष्टाचार इस कदर फ़ैल चुका है कि इससे देश की एकता पर खतरा पैदा हो गया है। क्या न्यायपालिका को चुप रहना चाहिए ? हे भगवान, सहायता करो और शक्ति दो। यदि न्यायपालिका चुप रही या असहाय हुई तो देश से लोकतंत्र खत्म हो जाएगा। सरकार ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कदम नहीं उठाए तो देश की जनता कानून अपने हाथ में ले लेगी और भ्रष्टाचारियों को सड़कों पर दौड़ा कर पीटेगी।’’ हां, यह बात दीगर है कि जिस मसले में अदालत ने यह कहा वह मामला ना तो सदन में ना ही अदालत में और ना ही मीडिया में चर्चा में रहता है। इस चुनाव में भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा रहा, लेकिन गरीबों का अनाज चट कर जाने का यह कई हजार करोड़ के मामले पर कोई दल चूं भी नहीं करता…. कारण यह है कि इसमें सभी शामिल हैं। देश के अभी तक के सबसे बड़े घोटाले पर सभी सियासती दलों, अदालतों, जांच एजेंसियां व मीडिया घरानों की चुप्पी बेहद रहस्यमयी  है। अदालत में सरकार कहती है कि वह घोटाला केवल पैंतीस हजार करोड़ का ही है, जबकि आंकड़े दो लाख करोड़ की ओर इशारा करते हैं। दो लाख करोड़, शायद उसमें लगे शून्य की गिनती करते-करते थक जाएंगे।grains-scam

मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा, वे जेल जाने वाले थे, कम से कम सात साल के लिए उन्हें बचाया अमर सिंह ने। उसका अहसान है। एक सुराग तो उभर आया कि आखिर मुलायम सिंह एक अपराध के जिम्मेदार हैं, इसी लिए अमर सिंह, भैयाराजा और अन्य कई दागी, विवादी  प्रिय हैं। एक गरीब किसान के घर पैदा हुए, एक सरकारी स्कूल में मास्टर रहे पहलवान मुलायम सिंह यादव का अाखिर कौन सा ऐसा बिजनेस रहा है कि वे करोड़ो-करोड़ की संपत्ति के मालिक हो गए? कहानी इतनी जटिल है कि लगता है कि मुलायम सिंह जेल जाने के डर से पूरा उत्तर प्रदेश भाजपा के चरणों में सौंपने को लालायित हैं। जेल जाने का डर इतना है कि बेटा भी बेगाना लग रहा है और बेटा जान गया है कि यदि लंबी रेस का घेाड़ा बनना है तो रोज-रोज सीबीआई की भभकी में जिया नहीं जा सकता। बेटा चाहता है कि एक ही बार में पाप से विमुक्त हो जाए और नेताजी इस उम्र में जेल जाने के भय, दूसरी पत्नी के दवाब और जेल जाने के कारक भ्रष्टाचार के सहयात्रियों का साथ निभाने की मजबूरी के चलते अपनी राजनीतिक तपस्या खुद ही भंग करने पर मजबूर है।

देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का एलान करने वाले बहुत से लोगों को मालूम ही नहीं होगा या जानबूझ कर मुंह बंद रखें हैं कि आजादी के बाद का सबसे बड़ा घोटाला कौन सा है ? मालूम भी है तो उस पर कुछ बोलने से क्यों बच रहे हैं – केजरीवाल, बाबा, अन्ना और मोमबत्ती बटालियन ? शायद इसकी परतों को कोई जन-लोकपाल भी नहीं खोल पाएगा। पूरे दो लाख करोड़ का घपला है यह, वह भी गरीबों के मुंह से निवाला छीन कर विदेश में बेचने का। भले ही बाबाजी स्वीस बैंक से पैसा लाने का शोशा छोड़ रहे हों, लेकिन यह मामला तो हमारे गरीबों को मिलने वाले अनाज को पड़ोसी देशों-नेपाल और बांग्लादेश में बेचने का है। पता नहीं इसका भुगतान डालर में हुआ कि देशी रूपए में- इस पर बोलने से सभी दल के नेता ना जाने क्यों कन्नी काट रहे हैं।

बड़ा ही विचित्र मामला है- सनद रहे कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत गरीबों व गरीबी की रेखा से नीेचे रहने वालों के लिए सस्ती दर पर अनाज वितरित करने की कई योजनाएं राज्यों में संचालित होती हैं। ऐसी ही अन्त्योदय, जवाहर रोजगार योजना, स्कूलों में बच्चों को मिडडे मील, बीपीएल कार्ड वालों को वितरण आदि के लिए सन 2001 से 2007 तक उत्तरप्रदेश को भेजे गए अनाज का अधिकांश हिस्सा गोदामों से सीधे बाजार में बेच दिया गया। घोटालेबाजों की हिम्मत और पहुंच तो देखो कि कई-कई रेलवे की मालगाड़ियां बाकायदा बुक की गईं और अनाज को बांग्लादेश व नेपाल के सीमावर्ती जिलों तक ढोया गया और वहां से बाकायदा ट्रकों में लाद कर बाहर भेज दिया गया। खबर तो यह भी है कि कुछ लाख टन अनाज तो पानी के जहाजों से सुदूर अफ्रीकी देशों तक गया। ऐसा नहीं कि सरकारों को मालूम नहीं था कि इतना बड़ा घोटाला हो रहा है, फिर भी पूरे सात साल तक सबकुछ चलता रहा। अभी तक इस मामले में पांच हजार एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। हालांकि कानून के जानकार कहते हैं कि इसे इतना विस्तार इसीलिए दिया गया कि कभी इसका ओर-छोर हाथ में ही ना आए।

नवंबर-2004 में उ.प्र. के खाद्य-आपूर्ति विभाग के सचिव ने बांग्लादेश व अन्य देशों को भेजे जा रहे अनाज के बारे में जानकारी मांगी। दिसंबर-2004 में रेलवे ने उन जिलों व स्टेशनों की सूची मुहैया करवाई जहां से अनाज बांग्लादेश भेजने के लिए विशेष गाड़ियां रवाना होने वाली थीं। वर्ष 2005 में लखीमपुरी खीरी के कलेक्टर सहित कई अन्य अफसरों की सूची सरकार को मिली, जिनकी भूमिका अनाज घोटाले में थी। सन 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने ई ओ डब्लू को इसकी जांच सौंपी थी और तब अकेले बलिया जिले में 50 मुकदमें दर्ज हुए। राज्य में सरकार बदली व जून-2007 में मायावती ने जांच का काम स्पेशल टास्क फोर्स को सौंपा, जिसकी जांच के दायरे में राज्य के 54 जिले आए और तब कोई पांच हजार मुकदमें कायम किए गए थे। सितंबर-2007 में राज्य सरकार ने घोटाले की बात स्वीकार की और दिसंबर-2007 में मामला सीबीआई को सौंपा गया। पता नहीं क्यों सीबीआई जांच में हीला-हवाली करती रही, उसने महज तीन जिलों में जांच का काम किया।

सन 2010 में इस पर एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई, जिसे बाद में हाई कोर्ट, इलाहबाद भेज दिया गया। 03 दिसंबर 2010 को लखनऊ बेंच ने जांच को छह महीने में पूरा करने के आदेश दिए लेकिन अब तीन साल हो जाएंगे, कहीं कोई सुगबुगाहट नहीं है। विडंबना है कि जांच एजेंसियां अदालत को सूचित करती रहीं कि यह घोटाला इतना व्यापक है कि उसकी जांच के लिए उनके पास मशीनरी नहीं है। इसमें तीस हजार मुकदमें और कई हजार लोगों की गिरफ्तारी करनी होगी। इसके लिए जांच एजेंसी के पास ना तो स्टाफ है और ना ही दस्तावेज एकत्र करने लायक व्यवस्था। प्रारंभिक जांच में मालूम चला है कि राज्य के कम से कम 31 जिलों में बीते कई सालों से यह नियोजित अपराध चल रहा था। सरकार कागज भर रही थी कि इतने लाख गरीबों को इतने लाख टन अनाज बांटा गया, जबकि असली हितग्राही खाली पेट इस बात से बेखबर थे कि सरकार ने उनके लिए कुछ किया भी है। जब हाई कोर्ट ने आदेश दिया तो सीबीआई ने अनमने मन से छह जिलों में कुछ छापे मारे, कुछ स्थानीय स्तर के नेताओं के नाम उछले। फिर अप्रैल-2011 में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे डाली जिसमें सीबीआई जांच का निर्देश दिया गया था। जाहिर है कि मामला लटक गया, या यों कहें कि लटका दिया गया।

देश का अभी तक का सबसे बड़ा घोटाला, आम-गरीब लोगों के मुंह से निवाला छीनने का अपराध, ऐसा मामला जिसके तार देश-विदेश तक जुड़े हुए है, लेकिन कहीं से कोई आवाज नहीं। शयद ही किसी अखबार के पहले पन्ने की खबर बन पाया यह मामला।

मामला गरीब लोगों के मुंह से अन्न छीनने का है । यह सब जानते हैं कि पूरे मामले में ‘‘निर्दलीय होने के बाद भी राजा’’ बनने वाले बाहुबली का हाथ है। यह भी छुपा नहीं है कि राजा के तार राज्य के ‘‘राजा’’ के घर तक जुड़े हैं। राजा के तार बंबई के बदनाम दलाल ‘‘थ्री-ए’’ से जुड़े हैं और वह राजनाथ सिंह के जरिये सत्ता के गलियारों में नेताजी की मध्यस्थता करते रहे हैं । इसकी साजिश में वे लेाग शामिल हैं जो प्रो. रामगोपाल को सीबीआई के जाल में फंसाने की जुगत में अखिलेश को नीचा दिखा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के अनाज घोटाले के हमाम में या तो सभी नंगे हैं या फिर इसमें किसी व्यावसायिक घराने के हित प्रभावित नहीं हो रहे हैं या फिर इसमें किसी मीडिया-मुगल को अपने लिए कुछ नहीं दिख रहा है। जिन लोगों के मुंह से निवाले छिने, वे अखबार पढ़ते नहीं हैं, वे टीवी पर खबर भी नहीं देखते हैं। उनका वोट तो वैसे ही मिल जाता है। उप्र का सत्ता संग्राम या पारिवारिक विवाद असल में उस रकम के हिस्सेदारों पर लटक रही सीबीआई की तलवार का कठपुतली डांस है।
(नारद न्यूज़)

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

राजस्थान हाईकोर्ट में लगी मनु की मूर्ति के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आन्दोलन का ऐलान..

25 दिसम्बर 2016 को गांव गांव जलाई जायेगी मनुस्मृति और 3 जनवरी 2017 को जयपुर में होगा मनु मूर्ति हटाने का आन्दोलन.. -भँवर मेघवंशी|| जिसने असमानता की क्रूर व्यवस्था को संहिताबद्ध किया. जिसने शूद्रों और महिलाओं को सारे मानवीय अधिकारों से वंचित करने का दुष्कर्म करते हुये एक स्मृति रची,जिसके […]
Facebook
%d bloggers like this: