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बीबीसी दुनिया अब ईटीवी पर..

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अब आप ईटीवी चैनलों पर बीबीसी हिंदी का नया कार्यक्रम ‘बीबीसी दुनिया’ देख सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय खबरों का यह कार्यक्रम सोमवार से शुक्रवार तक ईटीवी नेटवर्क पर रात 9.20 बजे दिखाया जाएगा. इसकी घोषणा हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी स्थित ईटीवी हेड ऑफिस में न्यूज नेटवर्क हेड जगदीश चंद्र ने केक काटकर और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच की. सोमवार को ‘बीबीसी दुनिया’ का पहला एपिसोड प्रसारित किया गया. इस कार्यक्रम की खासियत यह है कि इसमें भारतीय दर्शकों को ध्यान में रखते हुए दुनियाभर की खबरें होंगी.etvbbc1

इस कार्यक्रम में राजनीति, विज्ञान, टेक्‍नोलॉजी, संस्‍कृति और मनोरंजन की खबरें होंगी. यह कार्यक्रम ईटीवी पर रात 9 बजे के स्लॉट में ‘ईटीवी न्यूज विद बीबीसी’ का हिस्सा होगा. दरअसल, आम आवाम की आवाज बन चुका ईटीवी लगातार कामयाबी की ओर न सिर्फ बढ़ रहा है, बल्कि कामयाबी के पायदान पर डे़ढ दशक से बना हुआ है. लोगों की बोली में लोगों से संवाद और खबर ही जीवन है, के फलसफे के साथ ईटीवी एक बार फिर अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने जा रहा है. जगदीश चंद्र ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के बाद हमारा फलक अब व्यापक हो गया है. नेटवर्क हेड ने इस मौके पर बीबीसी और ईटीवी नेटवर्क को नेचुरल एलाय बताया. ‘बीबीसी दुनिया’ ईटीवी नेटवर्क के ईटीवी राजस्थान, ईटीवी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड, ईटीवी बिहार-झारखंड, ईटीवी मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़, ईटीवी हरियाणा-हिमाचल और ईटीवी उर्दू पर रात 9.20 मिनट पर प्रसारित होगा.

इस नई शुरूआत की पहल को लेकर बीबीसी बिजनेस डेवलपमेंट के हेड इंदूशेखर सिन्हा बेहद उत्साहित दिखे. उन्होंने इसे एक शानदार कदम बताया. वहीं बीबीसी बिजनेस डेवलपमेंट एसोसिएट शेफाली कश्यप ने इस पहल के लिए न्यूज नेटवर्क हेड जगदीश चंद्र और ईटीवी के ग्रुप एडिटर राजेश रैना को बधाई दी. इस मौके पर ईटीवी नेटवर्क के हेड जगदीश चंद्र ने कहा, ‘ईटीवी अब आम लोगों की आवाज बन चुकी है. यह नेटवर्क बड़ी तेजी से तरक्‍की कर रहा है. बीबीसी के साथ हाथ मिलाने के बाद अब दर्शकों की ईटीवी और बीबीसी की संयुक्‍त गुणवत्‍ता देखने को मिलेगी. इस इंटरनेशनल विंडो बनने से हमें उम्‍मीद है कि ईटीवी के उन दर्शकों को फायदा होगा, जो दुनियाभर की रोचक और अहम खबरें देखना चाहते हैं.’

जगदीश चंद्र ने कहा, ‘ईटीवी भारत में क्षेत्रीय खबरों में अग्रणी है. बीबीसी के साथ समझौते ने इसके ताज में एक और हीरा जुड़ गया है. अब देश भर में फैले ईटीवी के दर्शकों को बीबीसी दुनिया के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय खिड़की मिल गई है. ईटीवी और बीबीसी का यह मिलन उन दर्शकों के लिए वरदान साबित होगा, जो उन खबरों को देखना चाहते हैं जो उनके लिए बेहद महत्‍वपूर्ण है.’  ईटीवी न्यूज के समूह संपादक राजेश रैना ने कहा, ‘बीबीसी के साथ बने इस रिश्‍ते पर हमें गर्व है. बीबीसी का अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कोई मुकाबला नहीं है. 10 मिनट का बीबीसी दुनिया का प्रसारण ईटीवी के चैनल पर लंदन से होगा. यह प्रोग्राम बीबीसी को ईटीवी के जरिए, जिसके पास देश में सबसे बड़ा न्यूज नेटवर्क है, भारत के जमीनी दर्शकों तक पहुंचाएगा.’

बीबीसी हिंदी के संपादक निधीश त्यागी ने कहा, ‘बीबीसी हिंदी की लंदन और दिल्ली की टीमों ने बीबीसी दुनिया को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए बहुत मेहनत की है. यह कार्यक्रम भारत के दर्शकों तक ईटीवी नेटवर्क के जरिए और बाकी दुनिया के दर्शकों तक http://www.bbc.com/hindi और यूट्यूब चैनल के माध्यम से पहुंचेगा.’ बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के बिजनेस डेवलेपमेंट के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख इंदुशेखर सिन्‍हा ने बताया, ‘बीबीसी दुनिया की शुरुआत का मतलब बीबीसी हिंदी टीवी का भारत में महत्‍वपूर्ण विस्तार है. इससे हमारी ईटीवी के साझीदारी मजबूत होगी. हमें उम्‍मीद है कि इससे भारत में हमारे दर्शकों की तादाद बढ़ेगी.’

ईटीवी की एक और नई उड़ान के आगाज के मौके पर न्यूज नेटवर्क हेड जगदीश चंद्र ने उम्मीद जताई कि बीबीसी की बुलेटिन के बाद हम अंतरराष्ट्रीय जगत में भी अपनी मौजूदगी को और पुख्ता कर पाएंगे. नेटवर्क हेड जगदीश चंद्र ने ईटीवी के फाउंडर रामोजी राव की दूरदर्शिता की न सिर्फ सराहना की बल्कि उन्हें एक सफल मार्गदर्शक बताया. जगदीश चंद्र ने कहा कि बीबीसी बुलेटिन की तरह आने वाले वक्त में भी ईटीवी लगातार नए और सफल प्रयोग करता रहेगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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