7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू ..

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एक जनवरी 2016 से लागू होगा बढ़ा वेतनमान
नई दिल्ली, 29 जून। मोदी कैबिनेट की आज हुई एक अहम बैठक में 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का फैसला लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट ने सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया है। यह बढ़ा वेतनमान 1 जनवरी 2016 से लागू होगा। आज के वेतन वृद्धि के ऐलान के बाद 50 लाख सरकारी कर्मचारी और 58 लाख पेंशनधारियों के हाथों में ज्यादा पैसा आएगा। कहा जा रहा है कि इस वेतन वृद्धि से रीयल एस्टेट सेक्टर और ऑटोमोबाइल सेक्टर में उछाल आएगा।images (1)
आरबीआई ने एक आकलन में अप्रेल में कहा था कि अगर आयोग की रिपोर्ट को ऐसे ही लागू किया गया तो 1.5 फीसदी महंगाई बढ़ जाएगी।
जानकारी के अनुसार इस कैबिनेट बैठक में शॉप एंड एस्टैब्लिसमैंट बिल पर चर्चा हुई है। अगर इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिलती है तो इसका फायदा 1 करोड़ से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारियों को मिलेगा। इससे पहले सातवें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी कर्माचारियों की बेसिक सैलरी में 14.27 फीसदी बढ़ोत्तरी की सिफारिश की थी।
साथ ही आयोग ने एंट्री लेवल सैलरी 7,000 रुपये प्रति महीने से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति महीने करने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। नई सैलरी 1 जनवरी 2016 से लागू होगी जिसके चलते सरकारी कर्मचारियों को 6 महीने का एरियर भी मिलेगा।
इनकी बढ़ेगी सैलरी
सातवें वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 14.27 फीसदी ब?ोत्तरी की सिफारिश की थी। माना जा रहा है कि कैबिनेट बैसिक सैलरी में 18 से 20 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इसका फायदा 50 लाख सरकारी कर्मचारियों और 58 लाख पेंशनधारियों को मिलेगा। नई सैलरी 1 जनवरी 2016 से लागू होगी, यानी सरकारी कर्मचारियों को छह महीने का एरियर मिलेगा। कैबिनेट तय करेगी कि एरियर एक मुश्त दिया जाए या किश्तों में दिया जाए। सातवें वेतन आयोग ने इंट्री लेवल सैलरी 7,000 रू प्रति महीने से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति महीने करने के प्रस्ताव सरकार के सामने रखा है। कैबिनेट सचिव की मौजूदा सैलरी 90,000 से बढ़ाकर 2.50 लाख रुपये करने की सिफारिश की है।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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