मंझधार में जी पुरवैया..

admin
0 0
Read Time:4 Minute, 15 Second

बिहार में विधान सभा के चुनाव की तारीख की घोषणा के बाद जी पुरवैया की नाव बीच मंझधार में हिचकोले लेने लगी है. वजह चुनावी मौसम है. अपनी अपनी जेबे भरनी है. अंदरुनी खबर यह है कि जी पुरवैया अंदरखाने में में दो खेमों में बटा हुआ है एक खेमा का नेतृत्व चैनल हेड शिवपूजन झा कर रहे है तो दूसरे खेमा का नेतृत्व ज़ी न्यूज़ नेशनल के ब्यूरो चीफ ब्रजेश मिश्रा कर रहे है दोनों खेमा एक दूसरे को नीचे दिखाने और एक दूसरे की टांग खीचने में लगे हुए है …खेमा बटना लाजिमी है विधानसभा का चुनाव …चुनाव हर पांच साल में आता है जाहिर सी बात है पैसा दोनों को कमाना है कोई मौका क्यों गवाए ? कोई बात नहीं चुनावी त्यौहार के मौसम में दोनों खेमा चुनावी विज्ञापन के बहाने अपने अपने सूत्रों की मदद से अपने अपने जेबे गर्म करने में जुटे है जी मीडिया की साख को दाव पर रख कर.Z1

इन दोनो खेमो के खींचतान का खामियाजा जी मीडिया को उठाना पड़ा अभी हाल में सभी नेशनल चैनल ने पटना में विधानसभा चुनाव पर कॉन्क्लेव का आयोजन किया जिसमे बिहार के सभी दिग्गज सभी चैनल में आये लेकिन जी मीडिया ने भी कॉन्क्लेव की तैयारी कर रखी थी लेकिन बिहार के राजनीती के टी आर पी मटेरियल नितीश कुमार और लालू यादव ने ज़ी मीडिया को इसके लिए समय नहीं दिया और आखिरकार जी मीडिया को कार्यक्रम रद्द करना पड़ा जो अपने काफी चौकाने वाली बात है. जी मीडिया के कोहिनूर और जी पुरवैया के चैनल हेड शिवपूजन झा और जी न्यूज़ पटना में लम्बे समय से काम कर रहे ब्रजेश मिश्रा जैसे दिग्गज पत्रकार दोनों नेताओं को अपने चैनल में नहीं ला पाये जो काफी शर्मनाक है चाहे मामला जो भी हो .

जी न्यूज़ नेशनल का झुकाव तो एक पार्टी की तरफ है जगजाहिर है लेकिन वही जी पुरवैया का झुकाव एक ख़ास पार्टी की तरफ ज्यादा है जो आपसी खीचतान की वजह से और दोनों खेमो में एक दूसरे को शह मात की वजह से जी मीडिया का रीजनल चैनल जी पुरवैया बिहार और झारखण्ड में अपनी पहचान और साख नहीं बना पाया जिसका उदहारण झारखण्ड चुनाव के समय जे एम एम से बहुत बड़ा विज्ञापन का पैसा आया था अभी पिछले महीने शिवपूजन झा रांची गए थे हेमंत सोरेन से चुनावी विज्ञापन के बकाये पैसे की उगाही करने. रांची के फाइव स्टार होटल में ठहरे काफी कोशिश करने के बाद हेमंत सोरेन से मिलने के लिए समय माँगा लेकिन हेमंत सोरेन ने आइना दिखा दिया शिवपूजन झा बैरंग रांची से पटना लौटे और अब बिहार विधान सभा चुनाव में दो क्षेत्रीय चैनल (ई टी वी और कशिश न्यूज़ ) के मुकाबले चुनावी विज्ञापन लाने में पसीने छूट रहे है चैनल दो खेमो में बटे रहने के कारन अभी तक अपना टारगेट (सालाना रेवेन्यू ) भी पूरा नहीं कर पाया है अब देखना है बिहार के विधान सभा चुनाव में क्या गुला खिलाता है जी पुरवैया ………..अब भगवान बचाये जी पुरवैया को

About Post Author

admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

स्मार्ट सिटीज़ के लिए मज़दूरों की बस्तियों की क़ुरबानी..

दिल्ली जैसे शहर में जहाँ एक तरफ़ मेट्रो रेल की रफ्तार से भी तेज़ भागती ज़िन्दगी है, जहाँ चमचमाती गाड़ियों की रेलमपेल के साथ-साथ बड़े-बड़े आलीशान मकान और कोठियाँ हैं, वहीं दूसरी तरफ़ वज़ीरपुर, आज़ादपुर, खजूरी, झिलमिल जैसी अनेक बस्तियाँ हैं। इन बस्तियों और झुग्गियों में रहने वालों की ज़िन्दगी […]
Facebook
%d bloggers like this: