क्या दो मीडिया घरानों की आपसी खींच-तान के बीच फंस गई उमर अब्दुल्ला की प्राइवेसी?

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जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आखिर अपनी पत्नी पायल से क्यों तलाक लेना चाहते हैं, ये सवाल सोशलाइट पार्टीज़ से लेकर मीडिया और राजनीतिक गलियारों तक हर तरफ जोरों पर है। 41 वर्षीय उमर ने ये तो स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी 13 साल पुरानी शादी तोड़ रहे हैं, लेकिन दूसरी शादी किस से करेंगे इस पर सस्पेंस बरकरार है। हालांकि उमर ने साफ कहा है कि वे दूसरी शादी नहीं करने जा रहे हैं, लेकिन अखबारों, वेबसाइटों और चैनलों पर उनके किस्से बदस्तूर जारी हैं।

मुश्किल सवाल: उमर अब्दुल्ला और निधि राज़दान

उमर की कहानी को दिल्ली की समाचार वाचिका का नाम सस्पेंस में रख कर चर्चा को और रोचक बनाया जा रहा है, जबकि सोशल नेटवर्किंग साइटों फेसबुक और ट्विटर आदि पर एनडीटीवी की एंकर निधि राजदान का नाम खुल कर लिया जा रहा है। मामले का दुखद पहलू यह है कि अखबारों में एंकर का नाम न खोल कर उन पर जम कर कीचड़ भी उछाला जा रहा है। कुछ अखबारों ने तो यहां कर लिख डाला है कि उमर इस एंकर के साथ लिव इन रिलेशन में रह रहे हैं। अब भला उनसे कौन पूछे कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री अपने सूबे के दिल्ली में किसी महिला के साथ लिव-इन रिलेशन में कैसे रह सकते हैं?

क्या मीडिया इतना निष्ठुर हो गया है कि अपनी ही किसी साथी के चरित्र हनन का मौका भी नहीं छोड़ना चाहता? हालांकि खुद उमर के खुद के भी मीडिया के कई लोगों से अच्छी दोस्ती है, लेकिन संभवत: उनमें से ज्यादातर अंग्रेजी पत्रकार हैं। निधि राजदान से उमर की दोस्ती कोई नई नहीं है। उमर निधि के कई इंटरव्यू और कार्यक्रमों में विषय रह चुके हैं तथा जैसा कि दोनों को जानने वाले भी कहते हैं, वे एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर सरकार ने तीन वर्षो के राज्य पुरस्कारों की घोषणा की तो जिन 71 लोगों को सम्मानित किया गया उनमें निधि का भी नाम था।

हॉट सीट: निधि के कार्यक्रम में उमर अब्दुल्ला

निधि कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से आती हैं और उनके पिता एम के राज़दान पीटीआई के एडीटर इन चीफ थे। आईआईएमसी से पत्रकारिता कर उन्होंने 1999 में एनडीटीवी ज्वाइन किया और तब से वहीं हैं। एक पत्रकार के तौर पर निधि को कश्मीरी उग्रवादियों के प्रति नरम और अपरिपक्व माना जाता रहा है। इसे निधि का गलती कहें या शरारत कि वे कई बार पाक अधिकृत कश्मीर को ‘आज़ाद कश्मीर’ कह चुकी हैं और इसके लिए खासी निंदा भी बटोर चुकी हैं। फेसबुक पर उनका पेज पिछले साल दिसंबर के बाद से अपडेट नहीं हुआ है और ट्विटर पर वे सिर्फ अपने चुने हुए मित्रों के लिए ही ट्वीट करती हैं।

जानकारों का कहना है कि एम जे अकबर के अखबार संडे गार्जियन की जिस रिपोर्ट के कारण उमर के दोबारा शादी की चर्चा शुरु हुई वह दरअसल निधि को ही निशाना बना कर लिखी गई थी। संडे गार्जियन और एनडीटीवी के तल्ख रिशते का इतिहास नया नहीं है। पिछले साल दिसंबर में दोनों के बीच लंबी बहस चल चुकी है जिनमें एनडीटीवी के खातों और कर्जों के बारे लंबी चर्चा की गई थी। मीडिया सर्किल में यह चर्चा आम है कि अगर एनडीटीवी के खिलाफ कोई खबर लिखनी हो तो संडे गार्जि़यन सबसे आसानी से उपलब्ध मंच है। लेकिन उमर और उनकी पत्रकार मित्र पर निजी टिप्पणी का ऐसा असर होगा शायद इसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।

आमने-सामने:  एम जे अकबर और प्रणॉय रॉय

संभवत: संडे गार्जियन की वेबसाइट पर उमर की कहानी के कीवर्ड एनडीटीवी की कहानियों से जुड़े हैं क्योंकि नोरा चोपड़ा के पोस्ट के साथ ही मोस्ट पॉपुलर कैटेगरी में एनडीटीवी की पुरानी कहानियों के भी लिंक दिख रहे हैं और पाठकों को उन तमाम लेखों से रू-ब-रू होने का मौका मिल रहा है जो वे पहले नहीं पढ़ सके थे। अलेक्सा रैंकिंग के मुताबिक पिछले एक महीने में इस वेबसाइट की लोकप्रियता में 40 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है।

साफगोई पसंद मुख्यमंत्री ने बाकायदा सरकारी बयान जारी कर अपनी निजी जिंदगी में बढ़ रहे मीडिया के दखल को निराशाजनक बताया, हालांकि उस वक्त वे लद्दाख महोत्सव के समापन समारोह में शिरक़त करने गए हुए थे, लेकिन उनके कार्यालय ने उनका बयान जारी कर इस मामले पर सफाई दी। बताया जाता है कि उमर के दिल्ली स्थित संपर्कों ने उनसे आपातकालीन संदेश भेज कर इस चर्चा पर विराम लगाने का अनुरोध किया था इसीलिए उनकी गैर मौजूदगी में भी यह बयान आया। उमर ने अपने आधिकारिक बयान के कुछ हिस्सों को अपने आई-फोन से ट्विटर पर भी डाला जहां उनके 58000 से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं और यह संख्या हर दिन बढ़ती ही जा रही है।

उधर उमर के शुभचिंतक यह प्रचारित करने में जुटे हैं कि पायल की गृहस्थी में आये तूफान की वजह उनकी मां की बीमारी है। इस लॉबी का कहना है कि पायल अपने पति से ज्यादा अपनी बीमार मां की तीमारदारी में समय देती हैं। पायल की मां गुड्डी और पिता मेजर जनरल रामनाथ नोएडा में रहते हैं। वो लंबे अर्से से बीमार चल रही हैं और पायल अपनी मां की तीमारदारी के लिए मां-पिता के साथ रहती हैं। यह भी कहा जा रहा है कि पायल अपने शौहर उमर से उम्र में बड़ी हैं और वे अपने और अपने बच्चों (ज़हीर और ज़मीर) का हर फैसला खुद ही लेती हैं।

उमर अब्दुल्ला के करीबियों का कहना है कि कश्मीर छोड़ कर दिल्ली आकर रहने का निर्णय भी पायल ने ही लिया था। जबकि उमर के लिए उनकी प्राथमिकता उनके बच्चे हैं। मां की बीमारी की वजह से पायल के लिए ये निर्णय करना कठिन हो गया था कि वो किसे प्राथमिकता दे, मां को या फिर उमर को। माना जा रहा है कि इन्ही स्थितियों ने उमर और पायल के बीच दूरियां बढ़ा दी। ऐसे में इस बारे में सिर्फ अटकलें ही लगाई जा सकती हैं कि आने वाले दिनों में ज़हीर और जमीर अब्बू या अम्मी में से किसके साथ रहेंगे?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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