दिल्ली में भी मैगी हो सकती है बैन..

Desk 2
Read Time:4 Minute, 15 Second

देश के अलग-अलग हिस्सों के बाद अब दिल्ली में भी मैगी अनसेफ पाई गई है। यहां जांच में मैगी के 13 में से 10 सैंपल फेल हो गए। उनमें लेड यानी सीसा की मात्रा तय सीमा से ज्यादा पाई गई। दिल्ली सरकार ने कंपनी के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की तैयारी कर ली है। इसके तहत केस रजिस्टर करने के साथ-साथ सरकार मिसब्रैंडिंग करने और असुरक्षित प्रोडक्ट बेचने के आरोप में कंपनी पर भारी जुर्माना लगाने पर भी विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फाइनल रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और इस बारे में बातचीत के लिए उन्होंने बुधवार को मैगी नूडल्स बनाने वाली
दिल्ली सरकार के अनुसार फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने उसे एक ई-मेल भेजकर मैगी के नमूनों की जांच करने के लिए कहा था। न्यूज पेपर्स और मीडिया में भी इस बारे में लगातार खबरें आ रही थीं। इसे देखते हुए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले फूड सेफ्टी विभाग के अधिकारियों को दिल्ली में भी अलग-अलग जगहों से मैगी के सैंपल्स कलेक्ट कर उनकी जांच करने का निर्देश दिया था। पिछले हफ्ते मैगी नूडल्स के 13 सैंपल्स जांच के लिए कलेक्ट किए गए थे। इन सभी नमूनों को जांच के लिए लैब में भेजा गया था, जहां पता चला कि मैगी नूडल्स में टेस्ट लाने के लिए बनाए जाने वाले मसाले में लेड की मात्रा तय सीमा 2.5 पीपीएम से अधिक थी। जांच में 13 में से 10 सैंपल्स इस लिहाज से बेहद असुरक्षित पाए गए। इतना ही नहीं, मैगी के साथ आने वाले मसाले के 5 सैंपल्स में मोनोसोडियम ग्लूटामेट भी पाया गया, जबकि लेबल पर इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इस लिहाज से यह मिसब्रैंडिंग की कैटिगरी में भी आता है, जो कि एक अपराध है।

maggi-759
दिल्ली सरकार ने कंपनी के खिलाफ केस दर्ज करने का फैसला किया है। इसके तहत कंपनी के खिलाफ लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से असुरक्षित प्रोडक्ट बेचने के आरोप में न केवल केस दर्ज किया जाएगा, बल्कि मिसब्रैंडिंग के आरोप में कंपनी पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। दिल्ली सरकार जल्द ही इस मामले में मैगी नूडल्स बनाने वाली कंपनी नेस्ले के अधिकारियों को समन भी भेजने वाली है। टेस्ट और एनालिसिस की विस्तृत और फाइनल रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। सरकार ने तय किया है कि फाइनल रिपोर्ट के आधार पर वह इस मामले में और भी सख्त एक्शन लेगी।
हाल ही में मैगी को लेकर उठे सवालों के बीच दिल्ली में मैगी की जांच का यह पहला मामला है। अधिकारियों का कहना है कि अगर जरुरत पड़ी, तो और जगहों से भी सैंपल कलेक्ट करके उनकी जांच की जा सकती है। दिल्ली सरकार अपनी जांच रिपोर्ट की कॉपी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भी भेजेगी।

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Facebook Comments
No tags for this post.

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

2 thoughts on “दिल्ली में भी मैगी हो सकती है बैन..

  1. मैग्गी पर रोक तो वाजिब है ही , और इसका कारण भी हमारी सरकारों की लापरवाही व अधिकारीयों का निकम्मापन है। अधिकारियों के काम न करने , कहीं पर पदाधिकारी ही न होने के कारन हमारे यहाँ प्रयोगशालाओं में नमूने जाते ही नहीं और यदि जाते हैं तो वहां शीघ्रता से उनकी सही जाँच नहीं होती। केवल मैग्गी ही नहीं अनेक उत्पादन बाजार में ऐसे बिक रहे हैं जो सही नहीं है , स्थानीय स्तर पर भी बहुत से ऐसे उत्पादन मिल रहे हैं व बिक रहे हैं लेकिन उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती
    यह मामला भी कुछ समय में दब जाना है जब योरपीय सरकारें भारत पर अपना कूटनीतिक दबाव डालेंगी हमारे यहाँ के लचर कानून , लचर जांच व सुस्त न्याय पद्धति का लाभ मिलना तय ही है और 4 – 5 रोज बाद कोई नया राजनीतिक पचड़ा खड़ा होगा जनता का ध्यान उधर चला जायेगा , और ये उत्पादन वापिस बाजार में उपलब्ध हो जायेंगे

  2. मैग्गी पर रोक तो वाजिब है ही , और इसका कारण भी हमारी सरकारों की लापरवाही व अधिकारीयों का निकम्मापन है। अधिकारियों के काम न करने , कहीं पर पदाधिकारी ही न होने के कारन हमारे यहाँ प्रयोगशालाओं में नमूने जाते ही नहीं और यदि जाते हैं तो वहां शीघ्रता से उनकी सही जाँच नहीं होती। केवल मैग्गी ही नहीं अनेक उत्पादन बाजार में ऐसे बिक रहे हैं जो सही नहीं है , स्थानीय स्तर पर भी बहुत से ऐसे उत्पादन मिल रहे हैं व बिक रहे हैं लेकिन उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती
    यह मामला भी कुछ समय में दब जाना है जब योरपीय सरकारें भारत पर अपना कूटनीतिक दबाव डालेंगी हमारे यहाँ के लचर कानून , लचर जांच व सुस्त न्याय पद्धति का लाभ मिलना तय ही है और 4 – 5 रोज बाद कोई नया राजनीतिक पचड़ा खड़ा होगा जनता का ध्यान उधर चला जायेगा , और ये उत्पादन वापिस बाजार में उपलब्ध हो जायेंगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

कैसे लोग हैं ये तुम्हारे, जो सूचना अधिकार अधिनियम को भी नहीं जानते..

-चन्द्रशेखर करगेती।। वर्तमान में राज्य की सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी यदि ज़रा भी लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं में आस्था और विश्वास रखती है तो उसे सूचना आयोग और उसमें कार्यरत आयुक्तों को अपना सहयोगी ही मानना चाहिए, वे सरकारी मशीनरी को रास्ता दिखाने का ही काम करते हैं, उनके […]
Facebook
%d bloggers like this: