सत्यम घोटाले में रामलिंगा राजू समेत 10 आरोपी दोषी करार, कल सजा मिलेगी..

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त्यम कंप्यूटर सर्विसेज लिमिटेड (SCSL) में करोड़ों रुपये के लेखा घोटाले में रामलिंगा राजू समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी माना गया है. मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत शुक्रवार को सजा का ऐलान करेगी. केस की जांच सीबीआई ने की है.satyam_s_650_040915092314_040915110023
सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत दोषी पाया गया है. रामलिंगा राजू पर धारा 409 के आरोप भी साबित हुए हैं. देश की सबसे बड़ी लेखा में धोखाधड़ी का मामला 7 जनवरी, 2009 को तब सामने आया, जब कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन अध्यक्ष बी रामलिंगा राजू ने कथित तौर पर अपनी कंपनी के बहीखाते में हेराफेरी और वर्षों तक करोड़ों रुपये का मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की बात कबूल की.

अपने भाई रामराजू और अन्य के साथ फर्जीवाड़े की बात कथित तौर पर स्वीकार करने के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस के अपराध जांच विभाग ने राजू को गिरफ्तार किया था. मामले में सभी 10 आरोपी अभी जमानत पर थे. करीब छह साल पहले शुरू हुए मामले में लगभग 3000 दस्तावेज जमा किए गए और 226 गवाहों से पूछताछ हुई.

ये हैं 10 आरोपी
1. रामलिंगा राजू, फाउंडर, पूर्व चेयरमैन
2. बी रामा राजू, रामलिंगा के भाई और सत्यम के पूर्व प्रबंध निदेशक
3. वदलामणि श्रीनिवास, पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी
4. सुब्रमणि गोपालकृष्णन, पूर्व पीडब्लूसी ऑडिटर
5. टी श्रीनिवास, पूर्व पीडब्लूसी ऑडिटर
6. बी सूर्यनारायण राजू, राजू के एक अन्य भाई
7. जी रामकृष्ण, पूर्व कर्मचारी
8. डी वेंकटपति राजू, पूर्व कर्मचारी
9. श्रीसाईलम, पूर्व कर्मचारी
10. वी एस प्रभाकर गुप्ता, सत्या के पूर्व आंतरिक मुख्य ऑडिटर

आमदनी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने, खाता में हेरफर, फर्जी सावधि जमा के साथ ही विभिन्न आयकर कानूनों का उल्लंघन करने के सिलसिले में राजू और अन्य पर आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत गलत रिटर्न भरने, फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया था.

फरवरी 2009 में सीबीआई ने जांच का जिम्मा संभाला और तीन आरोप पत्र (7 अप्रैल 2009, 24 नवंबर 2009 और 7 जनवरी 2010) दाखिल किया, जिसे बाद में एक साथ मिला दिया गया.

 

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