प्रशांत भूषण ने केजरीवाल को लिखा खुला ख़त..

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आम आदमी पार्टी के सभी प्रमुख पदों से हटाए जा चुके पार्टी के संस्थापक सदस्य और वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण ने अरविंद केजरीवाल के नाम एक ओपन लैटर लिखा है. इसमें उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से उन सभी आरोपों का जवाब दिया है, जो केजरीवाल ने 28 मार्च को पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में दिए गए अपने भाषण के दाैरान उन पर लगाए थे. प्रशांत ने केजरीवाल से यह भी कहा है कि उन लोगों ने मिलकर जो सपना देखा था, वह केवल दिल्ली में 5 साल सरकार चला लेने से पूरा नहीं होगा. उन्होंने ऐसी आशंका भी जताई है कि अगर अरविंद का बर्ताव और रवैया ऐसा ही रहा, तो यह सपना एक दु:स्वप्न में तब्दील न हो जाए. इसके बावजूद उन्होंने अरविंद को शुभकामनाएं देते हुए ‘गुडबाय एंड गुड लक’ कहा है. हालांकि प्रशांत भूषण ने इस बारे में औपचारिक तौर पर तो अभी कुछ नहीं कहा है, लेकिन इस ओपन लैटर को और खासकर इसके अंत में लिखी लाइन का पार्टी से उनके इस्तीफे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.prashant-bhushan

एक अंग्रेजी न्यूज चैनल की वेबसाइट पर किसी आर्टिकल की तरह लिखे इस ओपन में लैटर में प्रशांत ने बताया है कि राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अरविंद ने किस तरह भड़काऊ भाषण दिया, जिसकी वजह से कई विधायक भड़क गए और उन्होंने कैसे हमें गद्दार करार देते हुए बाहर निकाल देने का शोर मचाया और मेरे पिता की तरफ ऐसे दौड़े जैसे उन्हें जान से मार देंगे. प्रशांत ने कहा कि आपने हमें जवाब देने का मौका तक नहीं दिया और बिना किसी चर्चा के वोटिंग करवा ली गई. इस दौरान ज्यादातर ऐसे लोग मौजूद थे, जो परिषद के सदस्य थे ही नहीं. उन्होंने स्वतंत्र विडियोग्राफी न करवाने, लोकपाल को मीटिंग में आने की इजाजत नहीं देने और अलोकतांत्रिक तरीके से उन्हें व अन्य साथियों को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकाल देने के फैसले पर भी दुख जताया. बाद में पार्टी के द्वारा जारी किए गए अरविंद के भाषण के वीडियो को भी उन्होंने एडिटेड करार दिया.

प्रशांत ने बताया कि किस तरह लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में एक बार फिर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिशें शुरू होने के बाद उनके अरविंद से मतभेद शुरू हुए और कई बार कहने के बावजूद अरविंद ने उनकी बात नहीं मानी. यहां तक कि पीएसी और एनई की मीटिंग में लिए गए फैसलों को भी पलट दिया गया और अपनी मनमर्जी चलाई. प्रशांत ने यह भी खुलासा किया कि नवंबर में अरविंद ने किस तरह निखिल डे को फोन कर राहुल गांधी को इस बात के लिए फिर से मनाने की कोशिश करने कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह दिल्ली में फिर से आम आदमी पार्टी को सपोर्ट कर दे, लेकिन निखिल ने इस मसले पर राहुल से बात करने से साफ इनकार कर दिया.

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