मनमोहन की प्रेस कॉन्फ्रेंस से लपका मोदी ने ‘अच्छे दिन’ का जुमला..

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प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी का सबसे लोकप्रिय चुनावी नारा ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस से चुराया गया है. यह दावा ब्रिटिश राइटर लांस प्राइस ने अपनी किताब ‘द मोदी इफेक्ट: इनसाइड मोदीज कैंपेन टू ट्रांसफॉर्म इंडिया’ में किया है. प्राइस ने मोदी के चुनावी अभियान पर यह किताब चार महीनों के दौरान उनसे कई घंटों के इंटरव्यू के बाद लिखी है.1980295_10154020611835165_1705118862_o

सोमवार को इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में बीबीसी के फॉर्मर जर्नलिस्ट प्राइस ने कहा कि मोदी ने विरोधियों का सबसे अच्छा नारा चुराकर उसको अपना बना लिया. अपने दावे पर प्राइस कहते हैं, ‘मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि जब डॉक्टर सिंह ने जनवरी 2014 में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, मोदी ने उसको सुना और सोचा कि यह मेरे लिए काम की चीज हो सकती है.’

एक हफ्ते बाद या थोड़े वक्त बाद डॉ. मनमोहन सिंह के उस बयान को बीजेपी ने अच्छे से इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. कुछ ऐसे भी उदाहरण हैं जिनसे पता चलता है कि बेहद फुर्तीले मिस्टर मोदी को यह कला अच्छी तरह आती है कि विरोधियों के हर हमले और कमेंट को अपने हिसाब से ढालकर उसको अपने अभियान में कैसे पॉजिटिव तरीके से यूज किया जा सकता है. यह उसी का एक और उदाहरण है. विरोधी का सबसे अच्छा जुमला चुरा लीजिए और उसको अपना बना लीजिए.

टोनी ब्लेयर के 2001 के चुनावी अभियान में अहम रोल अदा करने वाले लेबर पार्टी के फॉर्मर कम्युनिकेशन डायरेक्टर प्राइस ने अपनी किताब में दावा किया है कि मिस्टर सिंह ने बतौर पीएम जनवरी 2014 में अपने अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनजाने में बीजेपी को उसका सबसे कामयाब नारा दे दिया.

वहां उन्होंने पब्लिक को भरोसा दिलाने के लिए कहा था, ‘हां अच्छे दिन जल्द आने वाले हैं.’ प्राइस ने कहा, ‘इसी जुमले से मोदी को उनका तुरुप का पत्ता हाथ लगा.’ उन्होंने कहा कि छह दिन बाद मोदी ने सुलह सफाई वाला रुख दिखाया और कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री से सहमत हूं. भारत के अच्छे दिन आनेवाले हैं.’ लेकिन खेल तो उनके अंतिम जुमले में था. अच्छे दिन तभी आएंगे, जब वह सत्ता में आएंगे. हमें चार छह महीने इंतजार करना होगा लेकिन अच्छे दिन जरूर आएंगे.

बीजेपी का यह नारा टोनी ब्लेयर के ‘हालात बेहतर ही होंगे’ या बिल क्लिंटन के ‘कल के बारे में सोचना बंद मत करो’ वाले नारे से मिलता-जुलता है. प्राइस ने इस जुमले पर मनमोहन सिंह का हक बताते हुए अपनी किताब में यह भी लिखा है कि बॉलीवुड के गीतकार प्रसून जोशी ने बीजेपी के लिए जो चुनावी गीत लिखा था उसमें यह जुमला इस्तेमाल हुआ था.

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