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हरीश रावत जी, शराब से आगे भी मुद्दे हैं..

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उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से नई आबकारी नीति को लेकर जनता के सुझावों का खुला आमंत्रण दिया है । इस बारे में सरकार ने अखबारों में बाकायदा इश्तहार जारी किये हैं । ये पहला ऐसा मौका है जब सूबे के मुखिया को किसी मुद्दे पर जनता से राय लेनी पड़ रही है । अब इसे इत्तेफाक कहें या दुर्भाग्य की ये राय भी उस शराब के मुद्दे पर ली जा रही है जिसे आज भी समाज में सम्मान की नजर से नहीं देखा जा सकता ।harishrawat
गजब की बात यह है कि मुखिया जनता से उस मुद्दे पर जनता से राय चाहते हैं, जिस पर उनकी सरकार पहले ही निर्णय कर चुकी है कि उसे क्या करना है ? यही नहीं एक साल पहले वह इस पर निर्णय भी ले चुकी है । वह चाहती है कि राज्य का शराब कारोबार एफलटू के माध्यम से दो लाइसेंसधारियों के हवाले कर दिया जाए । लेकिन इस पर विवाद है, मुखिया और उनकी सरकार विपक्ष ही नहीं अपनी ही सरकार के निशाने पर हैं । पूर्व में जब गुपचुप निर्णय लिया था तो कांग्रेस आलाकमान तक की नाराजगी सामने आई थी ।
लेकिन अब सरकार जनता के मुंह से ही अपनी पसंद पर मुहर लगवा देना चाहती है । मसला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है, ऐसे तमाम मुद्दे हैं जिनका संबंध राज्य की जनसरोकारों से जुड़ा है, लेकिन उनके बारे में सरकार ने क्यों कभी सुझाव नहीं मांगे ?
राज्य में दो-दो विधान सभाएं क्यों ?
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मौजूदा सरकार ने एक निर्णय लिया कि वह गैरसैंण और देहरादून में दो अलग-अलग विधान सभाएं बनाएगी । क्या सरकार ने जनता से पूछा था कि राज्य में दो विधानसभा भवन बनाये जाने की आवश्यकता है ? वह भी तब जब 14 साल से यही तय नहीं हो पाया है कि राज्य की स्थायी राजधानी कहां होगी ?
सिटी पार्क की जमीन क्यों छोड़ी ?
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सरकार ने सिटी पार्क की 160 बीघा जमीन अलग कर दी । उसका लैंड यूज आवासीय कर दिया । सरकारी खजाने को पूरे 25 करोड़ रुपये की चपत लगी । ये निर्णय करने से पहले क्या सरकार ने जनता से पूछा कि वह ऐसा करने जा रही है ? अगर वह जनता से इस बारे में सुझाव मांगती तो क्या जनता उसे ऐसा करने की इजाजत देती ?
फैसला हुआ नहीं हाइट बढ़ा दी ?
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राजधानी देहरादून में ही सरकार की नाक की नीचे एक बिल्डर ने बहुमंजिली इमारत खड़ी कर दी । उसने नियम-कायदों को ताक पर रखकर 10 मंजिल भवन बना दिया लेकिन सरकार ने उसके खिलाफ कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाई । उलटे सरकार के स्तर पर भवनों की ऊंचाई बढ़ाने के लिये नया नियम बनाने की कवायद शुरू हो गई । क्या सरकार जनता से पूछा कि भूंकपीय लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाकों में शुमार इस शहर में भवनों की ऊंचाई बढ़ाने की इजाजत दी जानी चाहिए कि नहीं ।
विधायकों को कैबिनेट रैंक क्यों ?
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मुख्यमंत्री ने सत्ता का संतुलन साधने के लिये सरकार में शामिल सभी विधायकों को कैबिनेट रैंक और कैबिनेट मंत्री को मिलने वाली सुविधाओं से लैस कर दिया । ये निर्णय लेने से पहले क्या उन्होंने जनता से यह पूछने की जहमत उठाई कि उन्हें ऐसा करना चाहिए कि नहीं ? क्या इस फैसले से राजकोष पर भार नहीं बढ़ा ? लेकिन सिर्फ कैबिनेट रैंक ही नहीं नेताओं को दज्रे बांटने और ओएसडी की फौज खड़ी करने में भी कांग्रेस सरकार बेहद उदार रही है ।
खनन में विस्तार
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सरकार का राजस्व बढ़ाने के लिये मुख्यमंत्री लगातार खनन कारोबार में विस्तार किये जाने पर जोर दे रहे हैं । उनका कहना है कि राज्य में कई नदियां, गाड-गदेरे हैं जहां खनन किये जाने से राज्य सरकार की आमदनी बढेगी । इस बारे में उनकी सरकार निर्णय भी लेने की तैयारी में हैं । लेकिन क्या सरकार को ये ख्याल आया कि इस बारे में जनता से सुझाव लिया जाना चाहिए कि वह इसके पक्ष में है कि नहीं ।
सीमेंट प्लांट कोकाकोला फैक्ट्री
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मौजूदा सरकार ने ही राज्य में दो सीमेंट प्लांट खोलने और कोका कोला को फैक्ट्री लगाने की इजाजत दी। यह दोनों ही फैसले राज्य के पर्यावरण से जुड़े हैं । सरकार ने इन दोनों मसलों पर करार करने से पहले क्या यह सोचा कि इस बारे में जनता की क्या राय है ?
साभार : दैनिक जनवाणी

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