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पसीने छूटने लगे मोदी सरकार के..

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-अभीक बर्मन||
ऐसा लग रहा है कि पॉलिसी, गवर्नेंस और पॉर्टी से एनडीए सरकार की पकड़ फिसलती जा रही है। सरकार फिलहाल जमीन अधिग्रहण, माइनिंग, इंश्योरेंस और इलेक्ट्रिक रिक्शा से जुड़े ऑर्डिनेंस को लेकर सदन में घिरी हुई है और उसे बजट सत्र में इन विधेयकों को पास कराने की उम्मीद है। 3 मार्च को राज्यसभा में एकजुट विपक्ष ने वह कर दिया, जिसकी सरकार कल्पना भी नहीं कर सकती थी। भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विपक्ष के एक संशोधन को सदन में मंजूर कर लिया गया। विपक्ष का कहना था कि सरकार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और काले धन को वापस लाने के मामले में पूरी तरह विफल रही है।narendra_modi_hand_paintitng_photo_303904507

प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद मोदी ने अपने भाषणों में कहा कि सरकार बनाने के 100 दिनों के भीतर विदेश में जमा 6 लाख करोड़ रुपये की ब्लैक मनी को वापस लाकर हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपया जमा कराए जाएंगे। मंगलवार को विपक्ष ने सरकार को जबरन अपनी ही आलोचना करने के लिए बाध्य कर दिया।

लोकसभा में 282 सांसदों के साथ बीजेपी बहुमत में है। मई में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत से पार्टी समर्थकों का सीना फूलकर 56 इंच का हो गया था, लेकिन हकीकत में भारत के 30 राज्यों में से बीजेपी महज 6 राज्यों में सत्ता में है। पंजाब मे अकाली दल, महाराष्ट्र में शिवसेना और हाल में जम्मू-कश्मीर में बीजेपी ने पीडीपी के साथ गठबंधन सरकार बनाई है। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है और इनमें से एक तिहाई सदस्य हर दो साल पर चुने जाते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्यों के विधायक करते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो 2019 तक बीजेपी राज्यसभा में अल्पमत में ही रहेगी। 2019 में ही मोदी सरकार का कार्यकाल खत्म हो रहा है।

फिलहाल राज्यसभा में बड़े राज्यों मसलन उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, असम और अन्य नॉर्थ-ईस्टर्न राज्यों की बड़ी हिस्सेदारी है। यहां यह जानना जरूरी है कि इन राज्यों में बीजेपी के विधायकों की संख्या बहुत कम है। ऐसे में एकजुट विपक्ष मोदी और अमित शाह की जोड़ी के साथ सरकार की पॉलिसी मेकिंग को घुटनों पर टिका सकता है।

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत ने बीजेपी को अपने सहयोगी दलों के प्रति घमंडी बना दिया है। महाराष्ट्र में शिवसेना मोदी-शाह की जोड़ी से मिले अपमान को बर्दाश्त कर चुकी है तो पंजाब में अकालियों के लिए स्थिति ठीक नहीं है। जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ करीब दो महीने तक चली बातचीत के बाद बीजेपी वहां सरकार बनाने में सफल तो हो गई, लेकिन उसके हाथ कुछ खास नहीं लगा। सरकार बनाने के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने राज्य के सफल चुनाव के लिए पाकिस्तान को श्रेय दे दिया।

बीजेपी को एकजुट विपक्ष से निपटने की चुनौती होगी। राज्यसभा में वामपंथी दलों को तृणमूल कांग्रेस का भी समर्थन मिला जबकि दोनों एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में एक-दूसरे के खिलाफ हाथों में तलवार लेकर घूमने वाली एसपी और बीएसपी ने भी राज्यसभा में सरकार के खिलाफ हाथ मिला लिया। ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजेडी भी बीजेपी के खिलाफ खड़ी हो चुकी है।

कांग्रेस भले ही अपनी समस्याओं से जूझ रही हो, लेकिन राज्यसभा में वह एक बड़ी ताकत है। दूसरी तरफ जल्द ही आम आदमी पार्टी भी राज्यसभा में नजर आएगी। पार्टी ने दिल्ली की 70 में से 67 सीटें जीती हैं। बिना किसी बड़े रिफॉर्म्स को लेकर पेश किया गया बजट और यूपीए सरकार की योजनाओं को फिर से सामने रखना सरकार के लिए मुसीबत बन सकता है। रेकॉर्ड्स बताते हैं कि 88 पर्सेंट सरकारी विभागों में काम रुका हुआ है। अचानक ही विपक्ष सुर्खियों में आ गया है जबकि मोदी सरकार अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए जूझती नजर आ रही है।

(नभाटा)

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