Home देश Snapdeal पर सेक्स ट्वॉयज बेचने पर केस, अश्लीलता फैलाने का आरोप..

Snapdeal पर सेक्स ट्वॉयज बेचने पर केस, अश्लीलता फैलाने का आरोप..

ऑनलाइन मार्केट में सेक्स ट्वॉयज बेचने के कारण दिल्ली के एक वकील ने Snapdeal पर केस किया है. एक खबर के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के वकील सुहास जोशी ने Snapdeal के अलावा चेन्नई की वेबसाइट Ohmysecret.com के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है. शिकायतकर्ता का कहना है कि ई-कॉमर्स की वेबसाइटें ल्यूब, डिसेंसिटिसर, वाइब्रेटर/मसाजर जैसे सेक्स ट्वॉयज बेच कर गे-सेक्स को बढ़ावा दे रही हैं और अश्लीलता फैला रही हैं जो कि धारा 377 का उल्लंघन है. शिकायत में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के एक आदेश का उल्लेख किया गया है. शिकायतकर्ता की मांग है कि धारा 377 पर यह स्थिति साफ होनी चाहिए.snapdeal_1424919333

Durex Play Very Cherry - Buy Sexual Wellness Online in India   Snapdeal.comपिछले महीने एक खबर आई थी कि तेलंगाना सरकार सेक्स ट्वॉयज जैसे प्रोडक्ट्स बेचने के कारण Flipkart,Iambesharam.com, Thatspersonal.com and Ohmysecrets.com जैसी वेबसाइटों को ब्लॉक करना चाहती थी.
दिल्ली की अदालत ने क्या कहा था.
दिल्ली की एक अदालत ने पूछा है कि क्या ई-कॉमर्स वेबसाइटों को ‘सेक्स ट्वॉयज’ बेचने के लिए कानूनन दंडित किया जाना चाहिए? दलील ये दी गई कि इन ट्वॉयज के जरिए सेक्स का आनंद लेना धारा 377 का उल्लंघन है, जिसके तहत समलैंगिकता या अप्राकृतिक सेक्स को अपराध माना गया है. बता दें कि भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के कारण सेक्स के अधिकार और सेक्स के तरीके को लेकर पहले से ही लोगों की राय भिन्न-भिन्न है. सुप्रीम कोर्ट से इस संबंध में अंतिम फैसला आना बाकी है कि धारा 377 के तहत समलैंगिकता या अप्राकृतिक सेक्स करना अपराध है या नहीं.
सुप्रीम कोर्ट के वकील सुहास जोशी की शिकायत पर उठे इस सवाल पर जांच किए जाने की मंजूरी देते हुए अदालत ने ‘सेक्स ट्वॉयज’ बेचने वाली कुछ साइटों के खिलाफ पुलिस जांच के आदेश दिए हैं. इस मामले में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रिचा गुसेन सोलंकी ने सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस अफसर (एसएचओ) को प्राथमिक जांच का आदेश दिया है. मजिस्ट्रेट ने एसएचओ को 21 मार्च तक इस संबंध में रिपोर्ट पेश करने को कहा है. माना जा रहा है कि रिपोर्ट में इस बात का भी जवाब मिलेगा कि ‘सेक्स ट्वॉयज’ बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी कि नहीं.
Snapdeal की सफाई
केस के संबंध में स्नैपडील के प्रवक्ता का कहना है, ” Snapdeal वेबसाइट एक ऑनलाइन मार्केट प्लेस है जो कि बॉयर्स और सेलर्स को जोड़ने के लिए एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराती है. हम समझ सकते हैं कि कुछ प्रोडक्ट्स रखना अनुचित है, हम लिस्टिंग कर के जल्द ही उन्हें हटाने पर विचार करेंगे.”
377 पर बहस चाहते हैं शिकायतकर्ता
वकील ने कहा, “मेरी शिकायत एलजीबीटी समुदाय या किसी विशेष ई-रिटेलर के खिलाफ नहीं है. मेरा उद्देश्य धारा 377 की अप्रासंगिकता को सामने लाना है, जिसके कारण लोगों की निजी अधिकारों को नियंत्रित किया जा रहा है. यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट की कार्रवाई के खिलाफ सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है.”

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