सियासत कहीं हिमाचल के हाथ से केन्द्रीय विश्वविद्यालय ही न सरका दे..

Desk

-अरविन्द शर्मा||
हिमाचल में केंद्रीय विश्वविद्यालय की अंततः कहां स्थापना होगी यह सवाल पिछले पांच वर्ष से हर हिमाचली के लिए एक पहेली सी बन कर रह गया है. जहां एक ओर अन्य राज्यों के लिए आवंटित सेंट्रल युनिवेर्सिटीयां लगभग पूरी तरह स्थापित हो चुकी हैं, वहीं दूसरी ओर हिमाचल के लिए आवंटित केन्द्रीय विश्वविद्यालय अभी स्थापना के लिए स्थली की तलाश में ही भटक रही है.cuhp-logo-img

केन्द्रीय विश्वविद्यालय साइट पर हिमाचल के काँगड़ा जिला के सियासत दानो में भारी जंग छिड़ी हुई है. पूर्व कांग्रेस सरकार ने इस धर्मशाला में स्थापित करने का निर्णय लिया था तो उनके बाद आयी भाजपा की पूर्व सरकार ने इसे देहरा (काँगड़ा), जो पूर्व मुख्मंत्री के सांसद बेटे अनुराग ठाकुर का संसदीय इलाका है में इस ले जाने का फैसला किया. पिछले पाच वर्ष में इसी सियासी खींचा तानी के चलते दिल्ली की पूर्व यूपीए सरकार ने इसी दो भागों धरमशाला व देहरा में बाटने का निर्णय लिया.

हिमाचल में फिर से कांग्रेस सरकार आने के बाद इसे फिर से धर्मशाला में लाने की कवायत चली जिसमे धर्मशाला के विधायक /मंत्री व मुख्यमंत्री वीरभद्र के करीबी सुधीर शर्मा की अहम भूमिका रही. किन्तु केंद्र में मोदी की सरकार आते ही इस पर सियासत तेज़ी से गरमाई और हिमाचल की कांग्रेस सरकार तथा केंद्र की भाजपा सरकार के सिपहसालारों ने झंडे बुलंद करने आरम्भ कर दिए. पाच साल से आपनी ज़मीन तलाशती हिमाचल की सेंट्रल यूनिवर्सिटी फिर से रस्सा कस्सी के खेल में आ लटकी.

भाजपा के देहरा से विधायक व् पूर्व मुख्मंत्री धूमल के दायें हाथ रविंदर रवि ने देहरा में विश्वविद्यालय का नीव पत्थर स्थापित करने के लिए दावा ठोका है और इस मसले में फिर से गर्माहट ला दी है और हिमाचल प्रदेश के केन्द्रीय विश्वविद्यालय (CUHP) के स्थान के बारे में चल रहा विवाद एक बार फिर से बढ़ गया है. रवि ने गत दिवस देहरा में कहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च 2015 में देहरा में CUHP का शिलान्यास करेंगे. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने सोमवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने राज्य से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की कहा, जिसके उपरान्त प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने हिमाचल के रामपुर में एक बिजली परियोजना और देहरा में CUHP का शिलान्यास करने की हामी भरी है.

उन्होंने कहा कि देहरा में CUHP के नाम पर हस्तांतरित 900 कनाल भूमि के संबंध में कागजात केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भेज दिए गए है और वह इस मामले के अनुपालन करने के लिए अधिकारियों से कहा गया है.

रविंदर रवि, बिक्रम ठाकुर और वरिंदर कंवर सहित हमीरपुर अनुराग ठाकुर और तीन भाजपा विधायकों से भाजपा सांसद सोमवार को स्मृति ईरानी से मुलाकात की और देहरा में CUHP का शिलान्यास करने के लिए उसके अनुरोध किया.रविंदर रवि के इस बयान के बाद एक बार फिर से इस मुद्दे पर हिमाचल के भाजपा तथा कांग्रेस नेता आपस में भिड़ने लगे है.

मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा देहरा में CUHP परिसर चाहता है, वहीं राज्य में कांग्रेस की सरकार ने इसके लिए कोई झुकाव नहीं दिखाया गया है. जबकि धर्मशाला शहर के और योजना मंत्री सुधीर शर्मा ने धर्मशाला में CUHP परिसर के लिए पैरवी कर रहे है.
उनके अनुसार सरकार ने धरमसाला के पास स्थित इन्द्रूनाग मंदिर के पास CUHP के लिए 400 एकड़ जमीन देने की पेशकश की है. हालांकि कहा जता है की प्रस्तावित् भूमि सक्रिय स्लाइडिंग जोन में आती है तथा इस बारे याचिका को पहले ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था. जबकि हिमाचल सरकार ने अभी तक CUHP परिसर के लिए कोई वैकल्पिक भूमि का सुझाव नहीं दिया है.
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हाल ही में धरमसाला में संपन्न विधान सभा के शीतकालीन सत्र के दौरान, CUHP परिसर के स्थान पर राजनीति खेलने के लिए विपक्ष के हमलों की भरपूर निंदा की. उन्होंने कहा कि सरकार कांगड़ा जिले में कहीं भी CUHP का एक ही परिसर बनाने के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही विश्वविद्यालय के लिए एक उपयुक्त भूमि का सुझाव केंद्र सरकार से पारित करवाएगी.
हिमाचल विधानसभा में भी इस प्रश्न पर बहस पर कड़वाहट ही निकली.

उधर विधानसभा में हल्ला बोलते जनप्रतिनिधियों के व्यवहार से असंतुष्ट धर्मशाला के बुद्धिजीवी इस विषय को, मंथन की सौम्यता से अभिव्यक्त करने में जुटे रहे. राजनीतिक चारदीवारी की कैद में फंसे एक राष्ट्रीय संस्थान की पैरवी का मंच बुद्धिजीवियों को उद्वेलित कर गया. संवेदना के हर शिखर ने स्वीकार किया कि बड़े संस्थानों की स्थापना में सियासत की नजर नहीं लगनी चाहिए, लेकिन सदन की बहस बार-बार सड़क पर हार जाती है. कोई भी पक्ष यह नहीं सोच रहा कि पांच सालों से चल रहे केंद्रीय विश्वविद्यालय ने अपने अस्तित्व के लिए कितनी बार माथा रगड़ा. उन छात्रों का क्या कसूर जो पूरे देश से धर्मशाला केंद्रीय विश्वविद्यालय का पता पूछते-पूछते शाहपुर तो पहुंच गए, लेकिन भविष्य की गलियां मुखातिब न हुईं. जिस केंद्रीय विश्वविद्यालय के नसीब में मात्र पांच प्रोफेसर, 11 एसोसिएट व इतने ही सहायक प्रोफेसर कार्यरत हों, वहां पाठ्यक्रम चीखता होगा और अध्ययन-अध्यापन का माहौल उदास रहता होगा. कुल स्वीकृत पदों में पैंतीस प्रतिशत रिक्तियां और कई प्रस्तावित विभागों के बंद ताले किस जुल्म का शिकार हैं. इसलिए बुद्धिजीवियों की तड़प बताती है कि वह केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना शीघ्र चाहते हैं, ताकि शिक्षा की यह इमारत अपनी बुलंदी हासिल कर सकेविधायकों, सरकार या विपक्ष के पूर्वाग्रह सामने हैं और अब तक का घटनाक्रम किसी को निर्दोष नहीं ठहराता. हैरानी यह भी कि यदि आईआईएम सिरमौर के छोर तक पहुंच जाता, तो किसी को आपत्ति नहीं होती. तकनीकी विश्वविद्यालय या होटल प्रबंधन संस्थान हमीरपुर में खुलते हैं, कहीं शोर नहीं मचता. आईआईटी व नेरचौक में मेडिकल कालेज पर मंडी गौरव महसूस करता है, लेकिन केंद्रीय विश्वविद्यालय के धरमशाला में खुलने पर सभी सियासतदां क्यों नाक भों सिकोड़ने लगते हैं.

आश्चर्य तो यह कि केंद विश्वविद्यालय के मसले पर राजनीतिक संकीर्णता ने क्षेत्रवाद को गहरा दिया है. पहले जमीन की अड़चनों में बाधाएं और उसके बाद बदनामी के अंगारे बिछाए गए. पिछली सरकार के एक मंत्री ने तो धर्मशाला शहर के अस्तित्व को खारिज करते हुए इसे भूकंपीय संवेदनशीलता का केंद्र बना इस शहर को ही मनहूस बना दिया.

किसी उपेक्षित जगह या क्षेत्रीय पिछड़ेपन की समस्या जरूर हल होनी चाहिए, लेकिन केंद्रीय संस्थानों की स्थापना को लेकर सियासी खिचड़ी पकाने से कुछ हासिल नहीं होगा. सवाल है की अब सियासी बहस और विवाद अगर केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्तित्व को यूं ही खोखला करते रहे तो कहीं परदेश ही इस संस्थान के वजूद से वंचित न रह जाये.

ऐसे में इन सियासत के ठेकेदारों को अपने वोटो की मजबूती को भूल कर विद्यार्थियों के भविष्य का ख्याल रख एक जुट हो इसकी स्थापना की ओर देना चाहिए.

Facebook Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

भाजपा ने छोड़ा हिंदू मुख्यमंत्री का राग..

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में पहले हिंदू मुख्यमंत्री के दांव से भाजपा ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. ताजा राजनीतिक घटनाक्रम से इतना तय है कि सरकार तुरंत बनने का कोई फार्मूला नहीं निकलेगा और इसमें कुछ समय लग सकता है. पहले बिल्कुल पस्त दिख रही पीडीपी ने नेशनल कांफ्रेंस […]
Facebook
escort eskişehir - lidyabet - macbook servis - kabak koyu
%d bloggers like this: