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गर्भवती महिलाओं के ईलाज में की जा रही लापरवाही के खिलाफ हुआ सोशल मीडिया द्वारा जन आंदोलन,निकला मौन जूलूस

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-सिकंदर शैख़||
जैसलमेर, विगत लम्बे समय से स्थानीय जवाहर चिकित्सालय में आने वाली गर्भवती महिलाओं के इलाज में बरती जा रही लापरवाही व ड्यूटी चिकिस्कों की हठधर्मिता को लेकर सोशल मीडिया के जरिये उठी आवाज जन आंदोलन में तब्दील होकर मौन जूलूस मे परिणीत हुई जिसमें सैकड़ो स्थानीय युवाओ ने भाग लिया.vlcsnap-2014-12-08-14h53m25s166

जिला मुख्यालय स्थित एक मात्र सरकारी अस्पताल जवाहर चिकित्सालय में डॉक्टरों द्द्वारा की जा रही मनमानी के विरोध में जैसलमेर के युवा पहली बार सोशल मीडिया के द्वारा एक अभियान चलाकर इकट्ठे हुए तथा मौन जुलुस निकाल जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया. जिला कलेक्टर ने उनको जल्द ही कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है. गौरतलब है की स्थानीय जवाहर चिकित्सालय में वैसे भी डॉक्टरों की भारी कमी है और अभी जमे डॉक्टर मरीजों के साथ मनमानी करते हैं तथा उनको परेशां करते है.

इस घटना से आहत हुए जैसलमेर के युवा सोशल मीडिया के द्वारा अभियान चलाया तथा आज के दिन का चुनाव आन्दोलन के रूप में किया , आज सुबह स्थानीय सत्यदेव व्यास पार्क में इकठ्ठा हुए इन युवाओं ने काली पट्टी बांध व अपने मुंह को बंद रखते हुए शहर के मुख्य मार्गो से होते हुए जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचे जहां पर एक प्रतिनिधि मंड़ल ने मिलकर जिला कलक्टर नारायणलाल मीना को इस बाबत ज्ञापन सौंपा तथा ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ जल्द कार्यवाही करने के साथ ही जवाहर चिकित्सालय में चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग की.

इस दौरान जिला कलक्टर मीना ने उन युवाओं को आश्वासन दिया कि इस समस्या को लेकर पीएमओ से बात की जायेगी तथा ऐसे संवेदनहीनता न हो इसके लिये उन्हे चिकित्सकों को पाबंद करने के लिये कहां जायेगा. चिकित्सकों की नियुक्ति को लेकर आ रही परेशानी को स्वीकार करते हुए जिला कलक्टर ने कहां कि मेरे द्वारा हर महीने इसकी स्थिति से उच्चाधिकारियों के साथ बात व पत्र व्यवहार होता है लेकिन समाधान नहीं हो रहा इसका क्या कारण है मुझे भी पता नही चल रहा.जनआंदोलन से जुडे युवाओं का कहना था कि अगर इस प्रकार का रवैया रहा ओर सही हल नहीं निकला तो आने वाले दिनों में जैसलमेर बंद का आह्वान व उग्र प्रदर्शन किया जायेगा.

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admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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