कलियुग का नया तीर्थ- जेल, प्रथम पूज्य भगवान- रुपया और इकलौता धर्म- लूट

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-कुंवर सत्यम||

एक नवीनतम वैज्ञानिक अध्ययन से सिद्ध हो चुका है कि नारद जी ने एक गुप्त वार्ता में विष्णु भगवान से एक कलियुगी रहस्य पर मंत्रणा की थी। नारद जी ने विष्णु जी से  जानना चाहा था “कि भगवान कलियुगी  लोगों का इच्छित तीर्थ कौन सा होगा? हे भगवान मेरी दूसरी शंका का भी समाधान करें, भगवन, यह अफवाह है कि प्रथम पूजा पर गणेश जी अपना आनुवंशिक अधिकार त्याग करने वाले हैं. हे भगवन मै चिंतित हूँ फिर कौन सा देव होगा जिसको कलियुग में प्रथम पूजा का अधिकार हस्तांतरित होने वाला है ?

नारद जी के चेहरे पर एक के बाद एक उभर रही चिंता कि लकीरों को देखकर भगवान बोले, हे नारद, अब मै जो कहता हूँ उसे ध्यान पूर्वक सुनो..

” कलियुग में प्रथम पूजा का अधिकार ‘ रुपया ‘ नामक एक  नए भगवान को मिलेगा तथा सर्वाधिक लोगों का इच्छित तीर्थ जेल-तीर्थ होगा’ अध्ययन में बताया गया है कि  इतना कहकर विष्णु जी अंतर्ध्यान हो गए .कहा जाता है कि तभी एक आकाशवाणी हुई, ”हे नारद कलियुग में सारे धार्मिक विभेद समाप्त हो जायेंगे..सिर्फ एक ही धर्म होगा..लूट-धर्म..सभी बड़ी निष्ठा से अपने धर्म का पालन करेंगे.”

आज नारद -विष्णु वार्ता के फलीभूत होने का समय है. राष्ट्रमंडल खेलों  के दिल्ली में आयोजन से अधिक प्रभावशाली तरीके से ये बाते सच्ची प्रतीत होती नज़र आ रही है..यहाँ कुछ दुर्बुद्धि लोग कुतर्क दे सकते  है कि खेलों के आयोजन से पहले नारद-विष्णु संवाद फलीभूत हो रहा है. आपको मै याद  दिलाना चाहूँगा कि इस आलेख के विरुद्ध कोई भी तर्क स्वीकार्य नहीं है..मै यहाँ लूट-धर्म के सिर्फ स्वर्ण काल कि ही विवेचना कर रहा हूँ. आपको यदि कोई तर्क देना है तो अपने शोध पत्र के माध्यम से दे..यह मेरा मोलिक शोध-पत्र है.

जेल-तीर्थ आज का महानतम तीर्थ है. वैसे तो देश के कोने – कोने में भक्तों के धार्मिक लाभ के लिए जेल-तीर्थ स्थापित किये गए है..लेकिन दिल्ली में स्थित ” तिहाड़ जेल सर्वाधिक मान्यता वाले जेल-तीर्थ के रूप में हाल ही के कुछ दिनों से उभर कर सामने आया है. गुलामी के समय में सबसे प्रसिद्द जेल-तीर्थ अंदमान निकोबार टापू पर स्थित सेलुलर जेल थी. सावरकर जैसे प्रसिद्द क्रांतिकारियों ने यहाँ की यात्रा करके लाभ उठाया था. देश कि आज़ादी कि उनकी मन्नत पूरी भी हुई थी हालाकि उसको देखने के लिए वे जीवित नहीं रहे.

ए. राजा,कनिमोझी,शाहिद बलवा (लिस्ट लम्बी है) जैसे कई लोगों  ने रुपया भगवान की पूजा करते समय मन्नत मांगी थी कि यदि उनकी मन्नत पूरी हुई तो वे जेल-तीर्थ यात्रा करके धार्मिक लाभ उठाएंगे.उनकी मन्नत पूरी हुई..

कांग्रेस के पास आज़ादी से पूर्व नेताओं कि एक लम्बी फेहरिस्त रही है जिन्होंने जेल तीर्थ यात्रा की.उनकी यात्राओं का प्रसाद इसे देश पर लम्बे समय तक सत्ता में बने रहने के रूप में मिला. अब कांग्रेसी जेल यात्राओं को महत्व नहीं दे रहे है.उनका दावा है कि वे देश का प्रमुख धर्मनिरपेक्ष दल है..लेकिन शायद उनको …धार्मिक विभेद समाप्त होने वाली भविष्यवाणी कि संभवतः  जानकारी नहीं है.

अनेक लोग  कांग्रेस में ऐसे है जिनकी धार्मिक आस्था पर सवाल नहीं उठाये जा सकते है.. शायद शीघ्र उनकी मन्नत पूरी हो जाये. वैसे तो राजनीतिक विश्लेषक यह अनुमान लगा रहे हैं कि राहुल गाँधी जी अपनी मन्नत पूरी करने के लिए कई बार जेल-यात्रा का प्लान बना चुके है. अब भी उनकी कोशिश जारी  है. वे हर ऐसी जगह पहुँच जाना चाहते हैं जहाँ से जेल-यात्रा हो सकती है..उदाहरण के लिए वे भूमि अधिग्रहण मसले पर भट्टा-पारसौल  गाँव जा पहुंचे जहाँ निषेधाज्ञा लागू थी, मायावती कदाचित नहीं चाहती कि राहुल जी को जेल-यात्रा का पुन्य प्राप्त हो.

भाजपा  का एक लम्बा इतिहास रहा है जेल-यात्रा करके पुण्य प्राप्त करने का. इसके संस्थापक डाक्टर श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर मसले पर जेल यात्रा की थी जिसका  पुण्य उनकी म्रत्यु के बाद पार्टी को प्राप्त हुआ. 1975 में इमरजेंसी काल में देश में जनता पार्टी का गठन हुआ जिसमे जनसंघ सहित समस्त समकालीन विपक्ष शामिल था. इन सब ने इमरजेंसी को देश पर थोपने का विरोध किया..जेल यात्रायें की  और सत्ता के रूप में यात्रा लाभ प्राप्त किया.

जनता पार्टी का भविष्य बहुत उज्जवल नहीं रहा यह शीघ्र ही बिखर गई. बाद में जनसंघ भाजपा में बदल गया. अटल, अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सबने मिलकर सत्ता प्राप्ति का सपना देखा. अडवाणी ने रामंदिर मसले पर तो जोशी जी ने कश्मीर मसले पर ९० के दशक में यात्रायें निकली.जिसके चलते उनको जेल तीर्थ यात्रा का धार्मिक पुण्य प्राप्त हुआ.भाजपा सत्ता में आई.

वैसे तो एक लम्बा इतहास बन गया है..जेल-तीर्थ यात्रा के पुन्य फल का, लेकिन हाल ही में अन्ना हजारे की  तिहाड़ जेल-तीर्थ यात्रा ने यात्रा-महात्म्य को और भी सार्थक बना दिया है. अन्ना बाबा ने तिहाड़ के पवित्र जेल-तीर्थ कीयात्रा करके तिहाड़ जेल को एतिहासिक तो बना ही दिया अपनी मन्नत भी पूरी करवा ली..लोकपाल के रास्ते में आई कई बाधाओं को दूर करवाने की..अब यह तो हो गया की बात वहां से आगे बढेगी जहाँ आकर ठहर गई है.अपनी मन्नत को पूरी तरह से फलीभूत करवाने के लिए अन्ना को अभी और जेल यात्रा करनी पद सकती है, यद्यपि इसकी कम गुंजाईश है.

अमर सिंह जी इस देश के सत्ता के गलियारों का एक शाशाक्त स्तम्भ रहे है..जो राजनितिक खरीद-फरोक्त के माहिर रहे हैं.जीवन में सब कुछ हासिल कर लेने के बाद जैसे आदमी अक्सर सोचता है की अब तीर्थ यात्रा पर चला जाय, ठीक उसी प्रकार के उपेक्खा भाव को लेकर अमर जी तिहाड़ जेल यात्रा पर निकल गए है.

भक्तों मै एक बात बताना चाहूँगा कि पूजा एवं यात्रा की कुछ विधियाँ  होती हैं जिससे उनका फल कम अथवा ज्यादा होता है..अगर ये धार्मिक विधान त्रुटिपूर्ण हों तो नकारात्मक फल भी प्राप्त होता है..

भाजपा नेता फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा ने जरुर पूजा विधि में कुछ त्रुटि की होगी. इसलिए उनको भी जेल हो गई.. लेकिन वे शायद नादाँ है और समझ नहीं  पाए की बिना किसी मन्नत अथवा इच्छा के ही उनको जेल-तीर्थ यात्रा का पुण्य कैसे प्राप्त हो गया? वे कुछ समझ पाते इससे पहले ही अडवाणी जी ने छक्का जड़कर अपनी और से पारी घोषित कर दी.. और अगली पारी के लिए जुट गए.. अडवाणी जी जेल-तीर्थ के महत्व को आज की राजनीति में सबसे ज्यादा समझते हैं. तभी तो कल संसद भवन में सारी दुनिया के सामने उन्होंने जेल-तीर्थ यात्रा की मन्नत मांग ली. और मांग की है कि जब कुलस्ते और भगोरा को सरकारी खर्च पर जेल-तीर्थ यात्रा कराई जा सकती है तो मुझे भी जेल भेजो.. क्योंकि इन दोनों की जेल यात्रा की प्रष्ठभूमि मैंने ही तय की थी.. ये तो सरासर अन्याय है की इनको जेल और मुझे जेल गए बिना ही बेल?

भक्तों हम सभी जानते है कि एक बार सत्ता में रहने के बाद इससे दूरी बर्दाश्त करना बड़ा ही कठिन कार्य है. अब अडवाणी जी ने ठान लिया है कि वो किसी भी सूरत में जेल-तीर्थ यात्रा करके भगवन से दुआ मांगेगे कि उन्हें पुनः सत्ता प्रदान करे.. अडवाणी जी ने घोषणा कर दी है कि वे भ्रष्टाचार  के खिलाफ रथ यात्रा करेंगे.. ताकि सत्ता-पक्ष उन्हें जेल भेजकर उनकी मन्नत पूरी होने में सहायता  कर सके. हमारी शुभ कामनाएं आपके साथ है अडवाणी जी कि आप जेल जाएं.. इस देश के जन मानस को अपनी इस तीर्थयात्रा के पुण्य से लाभान्वित करें आप.

मित्रों ऐसे भी साक्ष्य मिले हैं कि नारद जी ने जाते जाते विष्णु जी से भ्रष्ट-आचार यानि भ्रष्टाचार के बारे में भी जानना चाहा था. इस सवाल को सुनकर विष्णु जी कन्फ्यूज लगे.. उन्होंने कहा ” नारद ऐसा लगता है कि यह कलियुगी लोगों कि आचार-संहिता से जुड़ा है. क्योंकि इसके बाद में भी आचार शब्द जुड़ा है. इसके सन्दर्भ में तुम्हे बताने के लिए मुझे अधिक अद्ययन कि जरुरत है. यह उतना आसान  नहीं है जितना तुम इसे समझते हो..”

भक्तों, अब आप जेल-तीर्थयात्रा महात्मय के बारे में जान गए होंगे. निश्चय  ही आपके मन में भी इसके पुण्यों को प्राप्त करने की चाहत जग रही होगी. अगर ऐसा है तो रुपया भगवान की प्रथम पूजा शुरू करिए. भगवान् आपकी मनोकामना पूरी करेंगे.. मै भी कोशिश करता हूँ..

इति शुभः ..


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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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