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नई दिल्ली, ग्रीनपीस इंडिया ने सरकार द्वारा जंगलों की कटाई के लिये आदिवासियों की अनिवार्य सहमति से छुटकारा पाने की तैयारी की निंदा की है. एनजीओ ने कहा कि सत्ता में आने के बाद से ही एनडीए सरकार पर्यावरण नियमों में ढील देने की रणनीति बना रही है, जिससे बड़ी परियोजनाओं और खनन योजनाओं को तेजी से मंजूरी दी जा सके.Children collect flowers in the Mahan forest

ग्रीनपीस के कैंपेनर नंदिकेश सिवलिंगम ने कहा, “सरकार के इस प्रस्ताव को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोयला घोटाले की अवधि के बीच आवंटित सभी कोल ब्लॉक को अवैध बताने के बाद की जा रही तैयारी से जोड़ कर देखा जा सकता है. संभावना है कि सभी कोल ब्लॉक के आवंटन को रद्द करने के बाद राजग सरकार फिर से इनके आवंटन और त्वरित मंजूरी की तैयारी कर रही है.

अगर सरकार वर्तमान संवैधानिक अधिकारों को खत्म करती है तो यह कोयला घोटाला की जगह आदिवासियों के अधिकारों का घोटाला होगा”.

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