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-रमेश सर्राफ धमोरा||
जयपुर,  केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों का आह्वान किया है कि वे वर्दी का मान-सम्मान बनाकर रखें. उन्होंने कहा कि हर भारतीय को शांति, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी मिले, इसे दायित्व के रूप में समझते हुए सब मिलकर कार्य करें.03-09-14 phq-1 (1)

सिंह बुधवार को यहां राजस्थान पुलिस एकेडमी में देश के पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुखों की अखिल भारतीय सिम्पोजियम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे. उन्होंने सभी को बड़े मन से कार्य करने की सीख भी दी. पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियां, ‘छोटे मन से बड़ा नहीं हो सकता, टूटे मन से खड़ा नहीं हो सकता’ सुनाते हुए उन्होंने कहा कि ऊंचाईयों को व्यक्ति तभी प्राप्त कर सकता है जब उसका मन बड़ा होगा. उन्होंने कहा कि आम जन ट्रेफिक पुलिस के सिपाही में ही प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और सरकार की छवि देखता है. पुलिस के व्यवहार और कार्य से ही छवियां प्रतिबिम्बित होती हैं. इसलिए अपने आपको बड़ा और बेहतर साबित करने के लिए हर कोई कार्य करें.

गृह मंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की चर्चा करते हुए कहा कि बदली हुई परिस्थिंितयों में प्रशिक्षण कैसे उपयोगी और प्रभावी हो, इसके लिए निरंतर विचार किए जाने की जरूरत है. उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण के संबंध में गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर आम जन से सुझाव देने का भी आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्रदान करने वाले रॉल मॉडल के रूप में कार्य करे. उनके कहे का असर तभी होगा जब वे स्वयं जो उपदेश दें, उसे अपने जीवन में भी उतारें.

सिंह ने कहा कि बेहतरी के लिए जीवन में सदा ही जगह रहती है. अच्छे विचार कहीं पर भी आ सकते हैं. किसी के भी दिमाग में जब अच्छे विचार आएं, मानना चाहिए कि ईश्वर की कृपा है. उन्होंने कहा कि पद से कद बड़ा नहीं होता. कद कृतित्व से, अच्छे कार्यों से बड़ा होता है. इसी के लिए सभी को निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए. उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उत्तरप्रदेश में नकल रोकने के लिए लागू किए गए कानून और माओवादियों से निपटने के लिए पुलिस ने बेहतरीन कार्य किया. पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता उत्कृष्ट है. वे अपने को पहचानें. सदा बेहतर से बेहतर करने के लिए तैयार रहें.

राज्य के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी ने इस मौके पर कहा कि अनुसंधान और कानून एवं शांति व्यवस्था संधारण दो अलग-अलग चीजें हैं. इन्हें समझते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी चिंतन किए जाने की जरूरत है. उन्होंने बदली परिस्थितियों में आपराधिक चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिस को सशक्त किए जाने के लिए प्रशिक्षण में रचनात्मक बदलाव किए जाने पर जोर दिया. उन्होंने गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा नकल विरोधी कानून लाए जाने और कृषि मंत्री रहते किसानों को क्रेडिट कार्ड दिए जाने की योजना की सराहना भी की.

पुलिस महानिदेशक ओमेन्द्र भारद्वाज ने पुलिस में क्षमता और कौशल विकास के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि केन्द्र सरकार द्वारा पुलिस प्रशिक्षण के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं.

इससे पहले ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डवलपमेंट के महानिदेशक राजन गुप्ता ने तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का संक्षिप्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि देशभर के 40 पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों के 75 अधिकारियों ने इस संगोष्ठी में महत्वपूर्ण विचार रखे हैं. उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में महिला सुरक्षा, दंगों को रोके जाने के लिए कार्ययोजना, साईबर सुरक्षा आदि पर प्रशिक्षण में अब विशेष ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने भारतीय प्रशिक्षकों को विदेश स्थित प्रशिक्षण संस्थानों में भेजे जाने और उन्हें प्रोत्साहित किए जाने पर जोर दिया. पुलिस एकेडमी के निदेशक और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बी.एल. सोनी ने संगोष्ठी में आए विचारों और सुझावों के आधार पर भविष्य की प्रशिक्षण कार्ययोजना बनाए जाने के बारे में जानकारी दी.

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों के प्रमुखों की आयोजित 33 वीं राष्ट्रीय सिम्पोजियम के समापन समारोह में राजस्थान पुलिस एकेडमी में ‘जेंडर सेंसिटाईजेशन नेशनल ट्रेनिंग सेंटर’ स्थापित किए जाने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि यह केन्द्र महिलाओं की सुरक्षा और उनसे जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर प्रशिक्षण के उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में कार्य करेगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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