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हाल ही में शुरु हुए न्यूज चैनल जीएनएन में काम करने वाले पुरुष और महिला एंकर को अपने ही घर में ‘अंतरंग स्थिति’ में ‘पकड़े’ जाने का मामला उजागर होने के बाद दोनों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। बताया जा रहा है कि दोनों को कॉलोनी वालों की शिकायत पर पुलिस ने उनके घर से पकड़ा था।

अब सवाल यह उठता है कि पुलिस के साथ-साथ चैनल प्रबंधन को इससे क्या लेना-देना है कि दो लोग अपनी निजी जिंदगी में क्या करते हैं? बताया जा रहा है कि चैनल प्रबंधन अपनी ‘बदनामी’ के डर से मामले को दबाने में लगा हुआ है, इसीलिए दोनों को चैनल से निकाला गया है, लेकिन दो लोगों के बीच संबंध से पुलिस और चैनल को क्या दिक्कत थी, यह बात समझ से परे है।

खबर के मुताबिक, दोनों महिला व पुरुष जीएनएन नामक चैनल में कार्यरत थे। पुलिस ने दोनों को चैनल के पास ही स्थित पुरुष एंकर के घर से पकड़ा है। वैसे यह चैनल अपनी लॉन्चिंग के समय से ही कई मामलों को लेकर सुर्खियों में रहा है। वजह, चैनल को शुरू हुए अभी तीन महीने भी नहीं हुआ, लेकिन तीन-तीन चैनल हेड बदले जा चुके हैं। इतना ही नही, कई लोगों को नौकरी से भी निकाला जा चुका है। सूत्र बताते हैं कि चैनल के महिला एवं पुरुष एंकर के काफी समय से संबंध थे।

चैनल के अंदर भी दोनों के बीच संबंधों को लेकर चर्चा थी। बताया जाता है कि कुछ सीनियर भी दोनों पर मेहरबान थे और दोनों की शिफ्ट भी एक साथ लगाई जा रही थी। खबर है कि चैनल के पास ही रहने वाले पुरुष एंकर के घर पर भी महिला एंकर का खूब आना जाना था। घटना वाली रात भी दोनों वहीं मौजूद थे, तभी किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने छापेमारी करके दोनों को पकड़ लिया। वैसे यहां पर पुलिस का रवैया भी कम चौंकाने वाला नहीं है। सवाल यह उठता है कि जब दोनों युवक-युवती बालिग हैं और किसी सार्वजनिक स्थल या पार्क आदि में कोई अश्लील हरकत नहीं कर रहे हैं तो उनके बीच पड़ने का कानूनी आधार क्या होगा? सवाल यह भी है कि क्या पुलिस पर निजता का उल्लंघन का मामला नहीं बनता है? खास कर तब, जब शिकायत में किसी भी पक्ष के रिश्तेदार या दोस्त जुड़े नहीं हैं।

उधर चैनल प्रबंधन का दोहरा रवैया ज्यादा संदेहास्पद है। पहले तो उसने अपने स्टाफ पर कोई रोक-टोक नहीं रखी (जिसका कोई नैतिक आधार भी नहीं था) और दोनों को प्यार की पींगे बढ़ाने में मदद भी की, और जब मामला पुलिस तक जा पहुंचा तो बजाय उनका साथ देने के उल्टे उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। जीएनएन इकलौता संस्थान नहीं है जहां महिला और पुरुष कर्मचारियों के बीच दोस्ती से आगे के रिश्ते बने हैं। टीवी-18 हो या टीवी टुडे या फिर ज़ी न्यूज़ या एनडीटीवी, तकरीबन सभी शीर्ष मीडिया संस्थानों में विपरीत लिंग के कर्मचारियों के बीच संबंध बनते ही रहे हैं। इस तरह रिश्ते बनने के दर्जनों उदाहरण हैं, लेकिन इस कारण नौकरी से निकाले जाने का यह शायद पहली मिसाल है।

बताया जा रहा है कि वास्तव में चैनल प्रबंधन पुलिस से किसी भी मामले मं पंगा नहीं चाहता इसीलिए एक इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के दबाव में यह फैसला लिया गया है। चैनल के एक मीडियाकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मैनेजमेंट का सख्त आदेश है कि वैसी ही खबरें दिखाई जाएं जो किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को बुरी न लगे। ऐसा माना जा रहा है कि चिटफंड के कारोबार में जुटा चैनल प्रबंधन अपना हर कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है क्योंकि छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान आदि राज्यों में (जहां इस ग्रुप के चिटफंड का करोबार चल रहा है) पहले ही कई मुकद्दमे दर्ज़ हो चुके हैं और उसके नोटिस आदि दिल्ली में आने पर यही अधिकारी काम आते हैं। लेकिन शायद प्यार में डूबे दो जवां दिलों को इन समीकरणों का कोई पता नहीं था, इलीलिए उन्हें अपनी नौकरी जाने का दुख भी है।

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By admin

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 thoughts on “दो दिल मिल रहे हैं.. मगर चैनल को ऐतराज़ है.. नौकरी से निकाला”
  1. यह दोनों पत्रकारों का निजी मामला है, सर्विस के बाद अपनी निजी जिंदगी में वो दोनों या कोई अन्य कुछ भी करे , चैनल को दखल नहीं करना चाहिए था,
    क्या जी एन एन चैनल दुसरे के निजी कामों में भी दखल देने का ठेका ले रखा है…….?????????????

  2. यह चैनल जब लौंच हुआ था तक दिल्ली मेट्रो में कुछ विज्ञापन चिपके/टंगे दिखे: लिखा था : “अब तक की पत्रकारिता बकवास:GNN”. जब सीमेंट, बालू, बदरपुर, और लोहा बेचने वाला टीवी चैनल का मालिक हों जाये तो उसमे “तथाकथित पत्रकार बंधू” भी तो वैसे ही मिलेंगे. और टीवी चैनल में “बिस्तर बाँटने की परंपरा तो चल चुकी है”. काश ऐसा मौका मिलता – गजब की कहानी लिखता, सेक्सी इंट्रो के साथ

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