भड़काऊ फोटो मामले में घिरी तीस्ता ने माफी मांगी..

Desk 3

नई दिल्ली,  स्वयं को नफरत औरहिंसा के खिलाफ सक्रिय बताने वालीं मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ट्विटर पर एक बेहद आपत्तिजनक फोटो पोस्ट कर फंस गई हैं. उनके खिलाफ एक खास समुदाय की भावना भड़काने का मामला दर्ज करा दिया गया है. उनका पद्मश्री सम्मान वापस लेने का ऑनलाइन अभियान भी शुरू किया जा चुका है. इस मामले पर अपने को घिरता देख तीस्ता ने कोलाज को अपनी प्रोफाइल से हटा लिया है और माफी भी मांग ली है.tista

शुक्रवार को तीस्ता ने ट्विटर पर एक कोलाज जारी किया था इसमें आतंकियों को हिन्दू देवी-देवताओं की तरह दिखाया गया था. तीन फोटो के इस कोलॅाज में एक फोटो में एक आतंकी को काली की तरह दिखाया गया था. दूसरे में आतंकी के हाथ में सुदर्शन चक्र जैसा दिखाया.

तीसरी फोटो वह है जो इस्लामिक स्टेट (आइएस) के आतंकियों ने अमेरिकी पत्रकार जेम्स फोले की हत्या के बाद जारी की थी. इसमें फोले के साथ उनका हत्यारा आतंकी भी दिखाई दे रहा है. तीनों फोटो पर आइएस-आइएस लिखा गया है. यह स्पष्ट नहीं कि तीस्ता इन फोटो के जरिये क्या कहना चाह रही थीं, क्योंकि उन्होंने उनका शीर्षक-खौफनाक हकीकत दिया है.

फोटो ट्वीट होते ही तीस्ता के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया आने लगी. दिल्ली में विश्व ¨हदू परिषद के प्रांत महामंत्री रामकृष्ण श्रीवास्तव ने तीस्ता के खिलाफ पुलिस में शिकायत की. ट्विटर पर अपने खिलाफ नाराजगी भरी प्रतिक्रिया के बाद तीस्ता ने आपत्तिजनक फोटो हटा ली और माफी मांगते हुए सफाई भी दी कि फोटो गलती से ट्वीट कर दी थी. किसी को आहत करने का इरादा नहीं था. इसके बावजूद वह ट्विटर पर ट्रेंड करती रहीं. उनकी हरकत से नाराज लोग उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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3 thoughts on “भड़काऊ फोटो मामले में घिरी तीस्ता ने माफी मांगी..

  1. This act was not bu mistake. don't make us fool. it will take one or two hour to make these type of file. This image is saying that what is ISIS doing is had been done in past by the god and goddess of HINDUS. so she is justifying the killings of innocent people in IRAQ by ISIS. So in my view she should be sent to jail. she is not neutral and not human right activits, she is criminal.

  2. मानवाधिकार वादी का बिल्ला लगा कुछ ही कह देना , कुछ भी कर लेना आजकल एक फैशन बन गया है तीस्ता तो मुस्लिम सम्प्रदायवादियों को राजी रखने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती हैं वे स्वयंभू मानवाधिकारवादी हैं जिन्हें कोई भाव नहीं देता अपने धधे की दुकान चलाने के लिए व सम्प्रदाय विशेष में अपनी छवि बनाने का उनका यह भी एक हथकंडा है उनके पिछले करतबों का इतिहास इस बात की गवाही भी है

  3. मानवाधिकार वादी का बिल्ला लगा कुछ ही कह देना , कुछ भी कर लेना आजकल एक फैशन बन गया है तीस्ता तो मुस्लिम सम्प्रदायवादियों को राजी रखने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती हैं वे स्वयंभू मानवाधिकारवादी हैं जिन्हें कोई भाव नहीं देता अपने धधे की दुकान चलाने के लिए व सम्प्रदाय विशेष में अपनी छवि बनाने का उनका यह भी एक हथकंडा है उनके पिछले करतबों का इतिहास इस बात की गवाही भी है

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