सामूहिक बलात्कार के बाद गुप्तांगों में डाली लकड़ियां और खा गए नोच नोच के..

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बाड़मेर के रतेऊ गाँव में समाज से बहिष्कृत एक परिवार की 2 सगी बहनों के स्कूल से लौटते समय उनके साथ उन्ही के 3 पड़ौसी दरिंदो ने पहले उन्हें साथ सामूहिक बलात्कार किया और फिर भी हवस की प्यास नहीं बुझी तो दरिंदों ने उनके गुप्तअंगो में लकड़ियाँ भर दी और पूरे शरीर को जगह-जगह से काट-काट खा गए.IMG-20140822-WA0000

2 दिन पूर्व इस घटना में न्याय ना मिलने के बाद दोनों पीड़िता आज बाड़मेर पुलिस अधीक्षक हेमन्त शर्मा से मिली तथा उन्हें अपने साथ हुई इस खौफनाक अत्याचार के बारे में अवगत कराया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने तुरंत कार्यवाही के आदेश देते हुवें एक वहसी दरिन्दे को गिरफतार कर लिया है और बाकी के दरिंदों की तलाश जारी है.

पंचो ने किया था समाज से बहिष्कृत

पीड़ित बच्चियों का मेडिकल करवाया जा रहा है. एक हत्या के प्रकरण में पीडि़ताओं के भाई-बहन को संदेह के आधार पर आरोपी बना कर पुलिस ने गिरफ्तार कर रखा है और वर्तमान में दोनों जेल में हैं. ऐसे में समाज के पंचो ने परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया है. इनके कहीं आने जाने, सार्वजनिक स्थान पर पानी भरने पर भी रोक लगाई हुई है.

समाज की सबसे बड़ी समस्या है, महिलाओं के प्रति पुरुषों की विकृत मानसिकता और औरत को अपनी हवस का साधन समझने की सोच. बाड़मेर में दुष्कर्म के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और पुलिस भी पिछले कुछ सालो में लगातार बढ़ रहे दुष्कर्म के मामलो के कारण स्तब्ध हैं. कई आरोपी जेल जा चुके हैं लेकिन बलात्कारियों की तादाद बढ़ती जा रही हैं.

बलात्कार कर नोंच-नोंच कर खाया

12वीं कक्षा में पढ़ने वाली इन दोनों बलात्कार पीड़िताओं ने तो इस बात की कल्पना भी नहीं की होगी कि उसके इर्द-गिर्द हैवान और शैतान भी बसते हैं. इस पूरे मामले के संबंध में बुधवार को दोनों पीड़िताओं ने ने पुलिस अधीक्षक हेमन्त शर्मा को बताया कि वे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाटाडू गांव में पढ़ती है तथा 2 दिन पूर्व स्कूल से छुट्टी होने के बाद अपने गांव रतेवू आ रही थी, इसी दौरान घर से एक किलोमीटर पूर्व उसके पड़ौस में रहने वाले रामाराम जाट, रामचन्द्र जाट व सवाई राम जाट ने दरिन्दगी की सभी हदे पार कर उनके साथ ना केवल बलात्कार किया, वरन पूरे शरीर को जगह-जगह से दांतो से कांट डाला और तो और इन तीन दरिन्दो ने उनके गुप्तांगो में लकड़ी डाली व उन्हें घसीटते हुवें लहुलुहान कर डाला.

लापरवाह पुलिस

इन्होंने इस मामले की शिकायत गिड़ा थाने में दर्ज करवाई थी लेकिन कोई कार्यवाही ना होते देख वे पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची हैं.

बच्चियों की मेडिकल जाँच

पुलिस अधीक्षक हेमन्त शर्मा ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं तथा मेडिकल जांच करवाने के भी निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि दरिंदों ने दरिंदगी की सभी हदे पार कर दी हैं तथा पीडि़ता के शरीर पर काफी जगह चोट के निशान हैं उसका मेडिकल करवाया जा रहा हैं.

2 आरोपी अभी भी फरार

इस मामले में अभी तक एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया हैं तथा बाकी की तलाश की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि एसटी एससी सेल के पुलिस उपाधीक्षक को इस प्रकरण में बयान दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.

नहीं देखी कभी ऐसी दरिंदगी

दूसरी तरफ युवतियों के अधिवक्ता कन्हैया लाल जैन के अनुसार उन्होंने अपने 30 सालों के वकालत के जीवन में इतनी दरिंदगी पहली बार देखी हैं जो मानवता पर दाग हैं. अधिवक्ता के अनुसार लड़कियों को दरिंदो ने सिर्फ इस लिए निशाना बनाया क्यूंकि वो समाज से बहिष्कृत हैं. इस पूरे मामले में अपराधियों में कानून का भय कहीं पर भी यहां नजर नहीं नहीं आता.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.
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6 thoughts on “ सामूहिक बलात्कार के बाद गुप्तांगों में डाली लकड़ियां और खा गए नोच नोच के..

  1. केवल कानून बना देने मात्र से ही नहीं उसके सख्ती से लागू होने की भी जरुरत है। गिरफ्तार कर समयबद्ध सीमा में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने पर ही इस प्रकार के अपराध कम होंगे होना तो चाहिए कि इनकी खुली जनसुनवाई करा सजा दे प्रचारित भी की जानी चाहिए ताकि लोगों में अपराध करने से पहले उसके अंजाम का भय भी उत्पन्न हो सके , हालाँकि मानवाधिकारवादी इस बात सेसहमत नहीं होंगे अदालतों की लम्बी प्रक्रिया व बार बार उच्च अदालतों में अपील की अनुमति भी नियंत्रित हो शीघ्र न्याय व कड़ी सजा रोकने व काम करने का एक उपाय हो सकता है

  2. केवल कानून बना देने मात्र से ही नहीं उसके सख्ती से लागू होने की भी जरुरत है। गिरफ्तार कर समयबद्ध सीमा में दोषियों को कड़ी सजा दिलाने पर ही इस प्रकार के अपराध कम होंगे होना तो चाहिए कि इनकी खुली जनसुनवाई करा सजा दे प्रचारित भी की जानी चाहिए ताकि लोगों में अपराध करने से पहले उसके अंजाम का भय भी उत्पन्न हो सके , हालाँकि मानवाधिकारवादी इस बात सेसहमत नहीं होंगे अदालतों की लम्बी प्रक्रिया व बार बार उच्च अदालतों में अपील की अनुमति भी नियंत्रित हो शीघ्र न्याय व कड़ी सजा रोकने व काम करने का एक उपाय हो सकता है

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