गणित नोबल विजेता के लिए नारायण मूर्ति ने की भारत रत्न की सिफारिश..

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इनफ़ोसिस साइंस अवार्ड समारोह में पुरस्कार पाते मंजुल

इनफ़ोसिस के प्रमुख नारायण  मूर्ति ने देश और मीडिया के नाम एक सन्देश में गणित के नोबल विजेता मंजुल  भार्गव को भारत रत्न दिए जाने की उम्मीद जताई है . गौरतलब है कि मंजुल इस सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय हैं. ईमेल के ज़रिये भेजे गए सन्देश में नारायण मूर्ति ने मीडिया से अपील की है कि ऐसी ख़बरों को प्रमुखता दिया करें.

“प्रिय दोस्तों,

मैं आज एक आपको सम्बोधित करते हुए लिखने का असाधारण कदम उठा रहा हूँ. जैसा कि आप जानते हैं मैंने आज तक ऐसा कभी नहीं किया है. मैं आज बेहद प्रफुल्लित हूँ. आज हम सभी भारतीयों के लिए एक बेहद ख़ुशी का दिन है. मंजुल भार्गव, प्रोंसतों विश्वविद्यालय में गणित के एक बेहद शानदार प्रोफेसर, ने फील्ड मैडल जीत लिया है जो कि गनिय की दुनिया में सर्वोच्च सम्मान है. ये कुछ मायनों में नोबल से अधिक दुसाध्य है क्यों कि इसे चार साल में एक बार चालीस से नीचे की उम्र वालों को दिया जाता है. ये एक अद्भुत और अद्वितीय उपलब्धि है. मंजुल इसे जीतने वाले पहले भारतीय हैं.

मैं उनसे तीन साल पहले तब मिला था जब उन्होंने इनफ़ोसिस स्किन्स अवार्ड जीता था. अगर आप मंजुल से मिलेंगे या बात करेंगे तो पाएंगे कि वो भारत को लेकर बहुत भावुक और जुनूनी हैं और भारत उनके दिल के बेहद करीब है. वो उतने ही विलक्षण और मिलनसार हैं जितने कि वो प्रतिभावान हैं. उम्मीद करता हूँ भारत सरकार उन्हें भारत रत्ना से ज़रूर सम्मानित करेगी.

मैं आप सभी को इसलिए लिख रहा हूँ क्यों कि ये एक गौर करने लायक समाचार है जिसे समाचार पत्रों के मुख्य पृष्ठ और टीवी में प्राइम टाइम में जगह मिलनी चाहिए. ये खबर भारत में करोड़ों युवाओं को प्रेरित करेगी. उन जैसा बनने के लिए और एक सकारात्मक सन्देश फैलाएगी. ऐसी ख़बरों को आम तौर पर वांछित महत्त्व नहीं मिल पाता. देश के युवाओं को गणित और विज्ञान के अनुसरण के लिए प्रेरित करने के लिए मंजुल एक आदर्श रोल मॉडल हैं.

हार्दिक अभिनन्दन

नारायण मूर्ति

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One thought on “गणित नोबल विजेता के लिए नारायण मूर्ति ने की भारत रत्न की सिफारिश..

  1. श्री नारायण मूर्ति जी के कथन और सुझाव सराहनीय हैं । भारत सरकार को इस पर विचार करना चाहिए । देश के नेतागण विभिन्न मौकों पर देश में वैज्ञानिक शोध को प्रोत्साहन देने का वक्तव्य देते रहते हैं लेकिन आज भी भारत में विश्वस्तरीय शोध नहीं के बराबर हो रहे हैं ना ही उसके लिए आवश्यक व्यवस्था ही है । सरकारों ने इस दिशा में आजादी के 67 सालों के बाद भी बहुत ध्यान दिया है । नतीजा है कि विज्ञान और प्राद्यौगिकी के छात्रों को स्नातक स्तर के बाद आगे की पढाई और शोध के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों का रूख करना पड़ता है ।
    भाषण देने से भारत विश्वशक्ति नहीं बनानेवाला । इसके लिए भारत के विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाना ही होगा और यह इसकी पहली शर्त है । याद रहे केवल व्यापार प्रोत्साहन देकर भारत को विश्वशक्ति बनाने की कोशिश मात्र छलावा है और कुछ नहीं ।

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