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राक्षस राज0जब बात आसमानी ताकतों की हो रही हो तो भला राक्षस का ज़िक्र कैसे न हो. फेसबुक पर ब्रह्माण्ड की ताकतों के बीच छिड़े शाब्दिक युद्ध में एक नया किरदार प्रकट हो गया है. परमपिता परमेश्वर, हजरत शैतान इब्लीस और  गुनाहों का देवता के बाद ये किरदार है राक्षस राज.

अपने और परमेश्वर के पुराने रिश्ते और पुरानी बातों को याद करते हुए राक्षस राज लिखते हैं.

“सदियों पुरानी बात है. एक बार मुझमें व परमपिता परमेश्वर में जमकर युद्ध हुआ. पातळ से आकाश लोक तक हमारी युद्ध के टंकारों से गूंज रहे थे. परम पिता मुझे मारकर हमेशा के लिए अपने भक्तों के संकट खत्म कर देना चाहते थे और मैं उन्हें खत्म कर अपने साम्राज्य को निरंकुश बनाना चाहता था… पर हम दोनों सम बलवान थे … दोनों में से कोई जीत नहीं पा रहा था और लड़ते-लड़ते दोनों बुरी तरह घायल हो गए थे. दिन के आखिरी पहर में जब हम लड़ते-लड़ते पहाड़ की चोटी पर थे और थकावट बुरी तरह हमपर तारी थी… थोड़ी दुरी पर परम पिता मेरी तरफ पीठ किये लम्बी-लम्बी सांस ले रहे थे कि पीछे से मैंने उनपर वार कर दिया. मगर बुरी तरह थके होने से मेरा निशाना चूक गया और संतुलन बिगड़ गया और मैं उस चोटी से फिसल कर नीचे तलहटी में काँटों की झाड़ियों में गिर गया. मुझे बहुत चोट आई. और कराहते हुए मदद के लिए परम पिता को पुकारा. परम पिता ने मुझसे जब मदद करने से इनकार किया तो मेरे सामने मौत नाच उठी. मैंने कहा परम पिता मुर्ख मत बनो. मुझे मदद की जरुरत है और तुम ले चलकर मेरा इलाज करो. ये मत भूराक्षस राजलो कि यदि यहाँ मैं मर गया तो तुम भी ज़िंदा न रह पाओगे और तुम्हारे अनुयायी तुम्हें पूजना बन्द कर देंगे. अगर उन्हें पता चल गया कि राक्षस राज मारा गया फिर उनको किसी का डर भी न रहेगा और ना ही फिर वो तुम्हारे पास मुझसे सुरक्षा की गुहार लेकर जायेंगे… सो तुम्हारा मरना भी तय है. याद रखो हम एकदूसरे के पूरक हैं और बिना एक दूसरे के हमारा अस्तित्व नहीं. परम पिता को मेरी बात समझ में आ गयी और मुझे उठा सीने से लगा लिया और अपने घर ले जा इलाज किया. तबसे जाहिरी हम एक दूसरे के दुश्मन पर मन ही मन में एक दूसरे की खैर मनाते हैं … और रात की कालिमा में जब हाथ को हाथ नहीं सूझता हमारी आपस की मीटिंग होती है और अपने अनुयायियों के क्रियाकलापों व मुर्खता पर हँसते हैं.”

इसके जवाब में परमपिता परमेश्वर  भी मजाकिया लहजे में कहते हैं आज भी इमोशनल हो जाता हूँ वो पल याद करके.राक्षस राज2

परमेश्वर के साथ अपनी दोस्ती को नए सिरे से गांठने के बाबत राक्षस राज कहते हैं, “मैं अपने नए दोस्तों हजरत शैतान इबलीस व गुनाहों का देवता का अपनी सल्तनत में स्वागत करते हैं…… वैसे परमपिता परमेश्वर को भी दोस्ती का पैग़ाम तो दिया है लेकिन लगता है उन्हें हमेशा की तरह हिचकिचाहट हैं और मुझे धोखे से मारने की योजना भी बना रहे हों तो कोई आश्चर्य नहीं …….”

खुद को राक्षसों का राजा बताने वाले राक्षस राज के बारे में हजरत शैतान इबलीस कहते हैं कि इन सभी की जान एक तोते में है जिसका नाम है धर्म.. जब तक धर्म रहेगा, परमेश्वर, देवता, शैतान और राक्षस ..सभी जिंदा रहेंगे.

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